राईट टू रिकाल ग्रुप के बारे में

1780

नाम एवं संगठन.
हम देश की शासन व्यवस्था में राईट टू रिकाल प्रक्रियाएं तथा जूरी प्रथा लागू करना चाहते है, अत: अपनी विचारधारा के अनुरूप हम अपने समूह को राईट टू रिकाल ग्रुप या प्रजा अधीन राजा समूह कहते है । यह उन नागरिको/कार्यकर्ताओं का अनौपचारिक संघठन है, जो यह मानते है कि भारत के नागरिको के पास अपने जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, न्यायधीशो जैसे प्रधानमन्त्री, मुख्यमंत्री, विधायक, सांसद, मंत्री, जिला पुलिस प्रमुख, जिलाधीश, जिला शिक्षा अधिकारी, सत्र, उच्च तथा उच्चतम न्यायालय के न्यायधीशो को नौकरी से निकालने का अधिकार होना चाहिए तथा साथ ही दंड देने की शक्ति भी प्रजा के अधीन होनी चाहिए । जो भी नागरिक यह अधिकार चाहता है वह राईट टू रिकाल ग्रुप में जुड़ सकता है । राईट टू रिकाल ग्रुप में जुड़ने की कोई औपचारिक प्रक्रिया नहीं है, यदि आप इन कानूनों को देश में लागू करवाने की मांग अपने सांसद/विधायक से करते है तो आप खुद को राईट टू रिकाल कार्यकर्ता (रिकालिस्ट) कह सकते है । मांग करने का तरीका इसी लेख में नीचे वर्णित किया गया है । वस्तुत: राईट टू रिकाल एक अपंजीकृत समूह है अत: हमारे पास सदस्य जोड़ने के लिए चंदे, शुल्क, आवेदन पत्र आदि स्वीकार करने की कोई प्रक्रिया नही है ।

Right to Recall (1)

इतिहास
राईट टू रिकाल एवं जूरी प्रथा का वर्णन अथर्ववेद में मिलता है । 1870 में लिखे अपने ग्रन्थ सत्यार्थ प्रकाश में महर्षि दयानंद सरस्वती ने समुल्लास 6 में कहा है कि, ‘राजा को प्रजा अधीन होना चाहिए, वरना वो प्रजा को लूट लेगा और राज्य का विनाश होगा । तदुपरांत महात्मा भगत सिंह, महात्मा चंद्रशेखर आजाद और महात्मा सचिन्द्र नाथ सान्याल ने इन कानूनों की मांग करते हुए भारतीय नागरिको को चेतावनी दी थी कि ‘यदि आजाद भारत में नागरिको के पास राईट टू रिकाल क़ानून नहीं हुए तो लोकतंत्र एक मजाक बन कर रह जाएगा’ । स्वतंत्र भारत में जेपी के बाद महात्मा राजीव दिक्षित ने व्यवस्था परिवर्तन के लिए राईट टू रिकाल कानूनों की मांग की थी, साथ ही कई स्वतंत्र नागरिक/कार्यकर्ता भी लम्बे समय से लगातार राईट टू रिकाल कानूनों की मांग कर रहे है ।
.
नेतृत्व
.
हम विकेन्द्रित व्यवस्था के अंतर्गत कार्य करते है, अत: हमारे पास कोई पदानुक्रम व्यवस्था नही है । यहाँ सभी कार्यकर्ता अपने आप में एक स्वतंत्र ईकाई है तथा सभी कार्यकर्ता क़ानून ड्राफ्ट के नेतृत्व में कार्य करते है । हमारे पास कोई नेता नही है, परन्तु प्रस्तावित क़ानून ड्राफ्ट ही हमारा नेता है । चूंकि हम क़ानून ड्राफ्ट के नेतृत्व में ही कार्य करते है अत: कोई ऐसा व्यक्ति जो राईट टू रिकाल कानूनों का मौखिक समर्थन करता है, किन्तु न तो वह हमारे द्वारा प्रस्तावित ड्राफ्ट्स को अपना नेता मानता है, न ही खुद कोई कानूनी ड्राफ्ट का प्रस्ताव करता है, तो ऐसे व्यक्ति को हम धूर्त, कपटी और प्रजा विरोधी व्यक्ति मानते है । अत: यदि कोई व्यक्ति राईट टू रिकाल, जूरी प्रथा का समर्थन करता है किन्तु रिकाल करने की प्रक्रिया का लिखित में ड्राफ्ट नहीं देता है, तो यह साबित है कि अमुक व्यक्ति फर्जी रिकालिस्ट है, तथा राईट टू रिकाल कानूनों का विरोधी है । जहाँ तक हमारा प्रश्न है, हमने व्यवस्था परिवर्तन के लिए 100 से अधिक कानून प्रस्तावित किये है, जिनके ड्राफ्ट आप दिए गए लिंक पर देख सकते है :
righttorecall.info
.
लक्ष्य
.
हमारा मुख्य लक्ष्य भारत की सेना को अमेरिका की सेना के बराबर ताकतवर बनाना है ताकि भारत के इराकी करण को टाला जा सके । चूंकि गरीबी, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, सुस्त न्याय व्यवस्था, अशिक्षा, बेरोजगारी आदि समस्याओं के निस्तारण बिना किसी भी देश की सामरिक क्षमता बढ़ाना मुमकिन नही है, अत: हमने इन सभी समस्याओं के निवारण के लिए भी कानूनी ड्राफ्ट प्रस्तावित किये है, जिन्हें आप उपरोक्त लिंक पर देख सकते है ।
.
मुख्य मांग
.
हम टी सी पी* को गेजेट** में प्रकाशित करने की मांग कर रहे है ।

*टी सी पी : टी सी पी (Transparent Complaint Procedure) या पारदर्शी शिकायत प्रणाली हमारे द्वारा प्रस्तावित एक तीन लाइन का क़ानून है, जो कि भारत के नागरको को अपनी शिकायत/सुझाव/प्रस्ताव आदि पारदर्शी और अधिकृत विधि से प्रधानमन्त्री के सम्मुख रखने का अधिकार देता है । टी सी पी ड्राफ्ट का लिंक :
tinyurl.com/TeenLineKanoon
.
**गेजेट : गेजेट (राजपत्र) में प्रधानमन्त्री/मुख्यमंत्री द्वारा अधिकारियों के लिए आदेश जारी किये जाते है । यदि टी सी पी को इस राजपत्र में प्रकाशित कर दिया जाता है, तो यह प्रस्तावित ड्राफ्ट क़ानून के रूप ले लेगा और देश में लागू हो जाएगा ।
.
लक्ष्य साधन की रूपरेखा
.
हम अपने लक्ष्य की पूर्ती के लिए ‘क़ानून ड्राफ्ट के नेतृत्व में, कार्यकर्ताओं के निर्देशन से ऐसा जन आन्दोलन खड़ा करने का प्रयास कर रहे है जो अहिंसा मूर्ती महात्मा उधम सिंह जी से प्रेरणा लेता है’ । उधम सिंह जी हमारे आन्दोलन के मूल प्रेरक तथा लोकतंत्र के रक्षक है। हमारा विश्वास है कि सिर्फ जन आन्दोलन ही एक मात्र ज्ञात तरीका है जो सकारात्मक रूप से लोगो को निश्चित उद्देश्य के लिए जोड़ते हुए आगे बढ़ता है, अन्य सभी तरीके क्लोन नेगेटिव होने के कारण लक्ष्य को साधने में असफल रहते है । इस विषय पर ‘क्लोन पोजिटिव बनाम क्लोन नेगेटिव’ शीर्षक से लिखे गए लेख में विस्तार से चर्चा की गयी है ।
.
गतिविधियाँ
.
राईट टू रिकाल ग्रुप पूरी तरह से प्रजातांत्रिक मूल्यों में विश्वास करता है । अत: हम चाहते है कि सरकार बहुमत का सम्मान करते हुए नागरिको की मांग के अनुसार शासन का संचालन करे । इसके लिए हम दो प्रकार की गतिविधियों का संचालन करते है, तथा अन्य नागरिको से भी ऐसा करने की अपेक्षा करते है ।

(1) हम प्रजा लक्षी क़ानून ड्राफ्ट्स की जानकारी देश के करोड़ो नागरिको तक पहुंचाने के लिए कार्य कर रहे है, ताकि भारत के नागरिको की मांग पर देश में राईट टू रिकाल प्रक्रियाएं तथा जूरी प्रथा लागू हो सके ।

(2) हम अपने क्षेत्र के सांसद/विधायक से इन कानूनों को गेजेट में प्रकाशित करने की मांग कर रहे है ।
.
अपने प्रतिनिधि के सम्मुख अपनी मांग रखने के लिए हम उन्हें SMS द्वारा आदेश भेजते है, कि अमुक प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट को गेजेट में प्रकाशित किया जाए । SMS द्वारा ऐसा आदेश भेजना हमारी कार्य योजना का मुख्य हिस्सा है । क्योंकि यदि हम कोई मांग अपने प्रतिनिधियों के सम्मुख अधिकृत तरीके से नहीं रखते है, तो कोई कारण नही कि जनप्रतिनिधि उस मांग को पूरा करे । इसलिए यदि हम सरकार के समक्ष कोई भी मांग रखना चाहते है तो हमें उसके लिए अपने सांसद/विधायक को आदेश अवश्य भेजना चाहिए । बिना SMS भेजे किसी मांग का समर्थन करना कोरी हवाबाजी है ।
.
SMS का नमूना :
.
Hon MP, I order you to print the law draft mentioned in tinyurl.com/PrintTcp
Voter ID : ######
.
इस मेसेज में जो लिंक दर्ज किया गया है, उसे क्लिक करके सांसद या विधायक आसानी से प्रस्तावित क़ानून को पढ़ सकते है । अनशन, धरने, ज्ञापन आदि तरीके अनाधिकृत तथा उर्जा चूसने वाले होते है, जबकि SMS द्वारा कोई भी नागरिक अपनी मांग आसानी से जनप्रतिनिधि के समक्ष रख सकता है । इस SMS में अपनी मतदाता संख्या दर्ज करने से यह अधिकृत मांग का रूप ले लेती है तथा आपके पास यह साक्ष्य रहता है कि आपने सरकार से अमुक मांग की थी । करोडो नागरिको द्वारा ऐसी मांग करने पर भी यदि प्रधानमन्त्री अमुक क़ानून को गेजेट में प्रकाशित नहीं करते है तो लोकतंत्र की रक्षा के लिए अहिंसा मूर्ती महात्मा उधम सिंह जी प्रधानमन्त्री से मिलेंगे । तब या तो प्रधानमन्त्री अमुक क़ानून को गेजेट में प्रकाशित कर देंगे वरना अगले प्रधानमन्त्री इस क़ानून को गेजेट में प्रकाशित करेंगे ।

 अगर आपको ये पोस्ट अच्छी लगी तो जन-जागरण के लिए इसे अपने  Whatsapp और  Facebook पर शेयर करें