ऐसी क्या मज़बूरी होती है कि हर अधिकारी अपने उच्च अधिकारी की चाटुकारिता करता है

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आपके गाँव में छोटे से छोटा अधिकारी कौन होता है? पटवारी आपके गाँव में सबसे छोटा अधिकारी होता है अब आप समझो की ये सिस्टम क्या है? गाँव का सबसे छोटा अधिकारी पटवारी उसकी जवाबदेही (Accountability) किसके प्रति है, अपने उच्च अधिकारी के प्रति और उसका उच्च अधिकारी SDM हो सकता है या SDO हो सकता है। SDM/SDO की जवाबदेही (Accountability) DM (District Magistrate) के प्रति और DM की जवाबदेही (Accountability) Commissioner के प्रति और Commissioner की जवाबदेही (Accountability) Chief secretary of State के प्रति और Chief secretary की जवाबदेही (Accountability) cabinet secretary के प्रति और cabinet secretary की जवाबदेही (Accountability) किसी के प्रति नहीं। हो गया कल्याण। क्या आप जानते है हिन्दुतान सरकार का cabinet secretary किसी के प्रति जवाबदेह (Accountability) नहीं है क्यों? क्योकि अंग्रेज कानून बनाकर गए थे और वो वैसे का वैसे ही चल रहा है।

अब आप सोचो मेरे गाँव के पटवारी की जवाबदेही (Accountability) SDM/SDO के प्रति है, अब वो जीवन भर क्या करेगा? SDM खुश को खुश रखो। उसको पटा के रखो क्योकि वो उसकी CR ख़राब कर सकता है, उसकी उलटी रिपोर्ट लिख देगा, उसकी परमोशन रोक देगा। ये हो जायेगा वो हो जायेगा। उसको गाँव के लोगो की चिंता नहीं है। वो गाँव के लोगो पर अत्याचार करेगा, उनसे घुस लेगा। क्योकि वो जनता है कि गाँव के लोगो के हाथ में कुछ नहीं है। तो पटवारी को खुश रखना है अपने SDO को,  और SDO को खुस रखना है DM को, इसी तरह ऊपर तक चलता रहेगा। ये सब हरामखोर हमारे टैक्स के पैसे से पगार पा रहे है और हमें ही खुश नहीं रखेगे। जिनसे पगार नहीं मिल रही है उनको खुश रखेगे क्योकि कानून वैसा है कि उसकी जवाबदेही (Accountability) अपने उच्च अधिकारी के प्रति है। जिस जनता की सेवा कर रहे है उसके प्रति कुछ लेना देना नहीं है, वो भाड में जाये या चूले में, बुख से मरे या प्यास से उसको उससे कोई मतलब नहीं है। तो जब यही सब चलता है तो सभी अधिकारी अपने उच्च अधिकारी की चाटुकारिता करते है तो corruption हो होगा ही होगा।आप बताओ कैसे रोकोगे इसे।

ये जो सिस्टम है इसको अंग्रेज ऐसे ही चलाते थे क्योकि उनकी एक प्रॉब्लम थी कि 50 हजार अंग्रेजो को 34 करोड़ लोगो के ऊपर शाशन करना था। तो 34 करोड़ लोगो पर 50 पर शाशन करने के लिये क्या करना होगा? तो ये सब तो कुछ कानून बनाकर ही हो सकता है डंडे से तो नहीं होने वाला क्योकि ये संभव नहीं है।तो उन्होंने हिसाब जोड़ा कि 50 हजार अंग्रेज अगर पुरे भारत के लोगो पर रुल करना है तो उसके कुछ कानून बना दो। उसके हिसाब से रूलिंग चलेगी। तो उन्होंने कानून बना लिए उसी को उन्होंने रूलिंग कहा और उसी के आधार पर सजा तय हुई। अगर आप रूल का पालन नहीं करते तो जेल के अन्दर जाईये करते है तो बहार रहिये। इस तरह की व्यवस्था उन्होंने बनाई। ये व्यवस्था चलाना उनकी मज़बूरी थी क्योकि उनको सब पर रूल करना था। वो ज्यादा लोग ला नहीं सकते थे क्योकि उनके पास थे ही नहीं ।

एक बार डिमांड उठी थी और ईस्ट इंडिया कंपनी ने ये कहा था कि 50 हजार ऑफिसर से भारत देश को मेन्टेन करना बहुत मुश्किल है हमें और लोग चाहिए। तो ब्रिटिश पार्लियामेंट ने कहा कि तुम कुछ भी करो हम तो एक आदमी भी ज्यादा नहीं दे सकते, क्योकि हमारे पास आदमी है ही नहीं कहा से दे। अगर 50 हजार लोगो पर रूल करने के लिये जो रूल एंड रेगुलेशन बनेगे और उन्ही को हम भी चलाएंगे तो उसमे से रिजल्ट तो वही आयेगा जो उस ज़माने में आता था। क्योकि सिस्टम तो वही है ना। तो प्रोडक्ट भी उसमे से वही निकलेगा। आपने मशीन नहीं बदली, मशीन वही चला रहे है जो अंग्रेज चला रहे थे तो प्रोडक्ट तो वही बनेगा जो मशीन बनाती थी। भाई राजीव दीक्षित जी हमेसा कहते थे कि “हमने कार नहीं बदली है, सिर्फ कार का ड्राईवर बदल लिया है”, पहले कार का ड्राईवर था लार्ड माउंट बैटन, फिर हमने पंडित जवाहर लाल नेहरु को बिठा दिया, कार वही थी हमारे पास। जो कार माउंट बैटन छोड़कर गया था उसी पर सवारी किया नेहरु ने, शास्त्री जी ने, इंद्रा गाँधी ने, गुजराल ने, अटल बिहारी वाजपाई ने और अब उसी पर सवारी कर रहे है मोदी।

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