अगर यही चलता रहा तो वो दिन दूर नहीं जब हर शहर दिल्ली होगा !

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बेरोजगारी इस देश में इतनी भयंकर है कि हमारी सरकार ये कहती है हमारे देश में दो हाथो से काम करने वाले लोगो की सख्या 64 करोड़ है जो काम कर सकते है और उनके हाथो में काम करने का दम है इसका मतलब ये हुआ कि जिन लोगो की उम्र काम करने की है उनकी संख्या 64 करोड़ है जिसका अंग्रेजी में वोर्किंग ऐज भी कहा जाता है| सरकार के आंकड़ो के अनुसार जिन लोगो को सम्मान जनक काम मिला हुआ है उनकी संख्या मात्र 3.5 करोड़ है, आजादी के 63 साल बाद 64 करोड़ में से सिर्फ 3.5 करोड़ लोगो के पास काम है| और ये 3.5 करोड़ लोग वो है जो बैंक, बिमा कंपनी, तीनो सेना, सरकार के पब्लिक सेक्टर, राज्य सरकार में, कुल मिलकर सरकारी सत्र पर काम करते है जिनका रोजगार निशचित है

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बाकि लोगो के पास तो काम ही नहीं है किसी को साल में 3 महीने काम मिलता है किसी को 6 महीने किसी को 9 महीने, किसी को ठेला लगाना है, किसी को सड़क के फूटपाथ पर अपना माल बेचना है, वो भी वो शांति से नहीं बेच सकता, पुलिस वाले आते है और डंडा मारते है और पैसे वसूलते है| तो सड़क के किनारे सामान बेचने वालो को भी सरकार कोई सम्मानजनक काम नहीं दे सकी है| किषानो की हालत भी बहुत ख़राब है  मात्र 40% खेतो में ही सिंचाई की वयवस्था है बाकि सभी खेत भगवान के भरोसे है अगर बारिश हो गई तो खेती हो जाएगी अगर ना हुई तो कुछ नहीं होगा| इतना दर्दनाक हाल खेती का है|

एक बहुत ही दर्दनाक बात मै आपसे कहना चाहता हूँ कि भारत की 60% खेती पानी के बिना है भगवान के भरोसे है, प्रकृति के भरोसे है, अगर बारिश हो जाये तो ठीक है नहीं तो लोग गाँव से उजाड़ना शुरू हो जाते है | सरकार के आंकड़ो के अनुसार हर  मिनट में 30 गाँव के लोग शहर भाग जाते है और शहर में झुगी झोपड़ियों की संख्या बढ़ाते है, फिर झुगी झोपड़ियों बसना शुरू हो जाती है क्योकि गाँव में बारिश नहीं हुई पेट तो पालना ही है तो वो शहर चले जाते है और झोपड़ियों में रहना शुरू कर देते है, और बहुत दुःख के साथ कहना पड़ता है कि दिल्ली, मुंबई, मद्रास, हैदराबाद, सिकंदराबाद जैसे बड़े शहरो में आधे से ज्यादा आबादी झुगी झोपड़ियो में रहती है और उन झुगी में 10×10 की एक खोली होती है उसमे 8-10 व्यक्ति भेड बकरियों की तरह रहते है जिसमे बहुत बदबूदार स्थिति होती है, अगर आप किसी झोपड़ पट्टी में चले जाये तो आप नाक पर रुमाल रखे बिना एक मिनट भी खड़े नहीं रह सकते, आप कल्पना करिए कि लोग सालो साल अपनी पूरी जिंदगी वही गुजार देते है क्योकि गाँव से पूरी तरह से बेघर होकर, उजड़ कर वो शहर में आये है क्योकि गाँव में रोजगार की कोई व्यवस्था नहीं है, खेतो में पानी नहीं है| और सरकार की नीतियाँ भी कोई ऐसी नहीं है जिससे गाँव में रोजगार उत्पन हो सकते|

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जब देश की ऐसी स्थिति हो कि गाँव के गाँव उजाड़ रहे हो हो सरकार कोई निति नहीं बना पा रही हो तो फिर क्यों ना इस देश में क्रांति होनी चाहिए| क्यों ना भगावत होनी चाहिए, क्यों नहीं कानून बदलने की बात होनी चाहिए, क्यों नहीं व्यवस्था की बात होनी चाहिए|

राजीव दीक्षित जी अमर रहे

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