क्या कभी सोचा है दुसरे विश्व युद्ध के बाद यूरोप में कोई युद्ध क्यों नहीं हुआ

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दूसरे विश्वयुद्ध पर जिन इतिहासकारों ने काम किया है उनका कहना है कि दूसरे विश्वयुद्ध में यूरोप के कम से कम एक करोड़ लोग मरे थे कम से कम एक करोड़ लोग मरे थे दूसरे विश्वयुद्ध में बहुत तबाही हुई थी और इस तबाही में पूरी अर्थव्यस्था डूब गई थी दूसरे विश्वयुद्ध से अगर किसी को फायदा हुआ था तो एक ही देश था उसका नाम था अमेरिका अमेरिका को बहुत फायदा हुआ था अमेरिका को कोई नुकसान नहीं हुआ था नुकसान नहीं हुआ उसका कारण क्या था सबसे बड़ा कारण यह था दूसरा विश्व युद्ध अमेरिका की जमीन पर नहीं लड़ा गया दूसरे विश्व युद्ध में जो जमीन इस्तेमाल की गई जो स्थान था युद्ध का जो बैटल फिल्ड था जो वार फिल्ड थे वह यूरोप था और यूरोप में भी सेंट्रल यूरोप था केंद्रीय यूरोप जिसको कहा जाता है वेस्टर्न यूरोप भी आज काल कह सकते हैं.  सबसे ज्यादा लाभ अमेरिका को दो कारण से हुआ एक तो अमेरिका की जमीन पर युद्ध नहीं हुआ था दूसरा अमेरिका को लाभ इस युद्ध में हुआ था कि अमेरिका के हथियार बनाने वाली बड़ी बड़ी कंपनियां को जबरदस्त आर्डर मिले थे

दूसरे विश्व युद्ध में जर्मनी ने जो हथियार इस्तेमाल किये फ्रांस के खिलाफ या ब्रिटेन के खिलाफ वो सारे के सारे हथियार अमेरिका ने बेचे और दूसरी तरफ जर्मनी के खिलाफ ब्रिटेन और फ्रांस ने जो हथियार इस्तेमाल किये वो भी अमेरिका ने बेचे माने अमेरिका दोनों तरफ हथियार सप्लाई करने वाला सबसे बड़ा देश था अमेरिका की जो यह बड़ी-बड़ी कंपनियां हैं जिनके नाम कभी-कभी आप अखबारों में पढ़ते हैं जैसे जनरल मोटर्स जी एम फोर्ड IBM raxon exon ITT ऐसी अमेरिका की जो बड़ी-बड़ी कंपनियों के नाम अक्सर आप सुनते हैं ये सब हथियार बनाने वाली बड़ी कंपनियां हैं इन  हथियार बनाने वाली कंपनियों को जबरदस्त मुनाफा हुआ था इन्होंने जो मित्र देश है मित्र देश माने ब्रिटेन के साथ मिलकर जर्मनी के खिलाफ  लड़ने वाले देशों को मित्र देश कहा जाता था जर्मनी के साथ मिलकर लड़ने वाले देशों को शत्रु देश कहा जाता था तो मित्र देशों को भी हथियार अमेरिका बेच रहा था और शत्रु देशों को भी हथियार अमेरिका बेच रहा था अमेरिका की दसों उंगलियों घी में थी और दसों पैर की  उंगलियां घी में थी बीसों उंगलियों घी में थी ऐसा कह सकतें है

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दूसरे विश्वयुद्ध का सबसे बड़ा लाभ किसी एक देश  को हुआ तो अमेरिका को और सबसे बड़ा नुकसान जिन देशों को हुआ यूरोप के देशों को हुआ फ्रांस जर्मनी स्वीडन स्विट्जरलैंड डेनमार्क ग्रेट ब्रिटेन आदि आदि देशों को जिन देशों को नुकसान हुए उन देशो ने आपस में बैठकर कुछ समझोता किये उनमें से एक समझौता यह था कि युद्ध अब समाप्त हुआ है हम को आगे बढ़ना है तो एक दूसरे को सहयोग करना सीखना चाहिए

तो यूरोप के देशों ने आपस में मिलकर एक दूसरे को सहयोग करने के लिए एक समझौता किया जिसको नो वार एक्ट कहा जाता है वह समझौता यूरोप के देशों ने इस तरह से किया कि  हम भविष्य में कभी भी एक दूसरे के खिलाफ युद्ध नहीं लड़ेंगे क्योंकि युद्ध के भयंकर दुष्परिणाम उन्होंने देखे तो युद्ध नहीं लड़ेंगे ऐसा समझौता उन्होंने कर लिया और वो समझौता आज तक कायम हैं यूरोप के देशों ने 1945 के दूसरे विश्वयुद्ध के बाद आपस में 2004 की तारीख में कोई युद्ध नहीं  लड़ा गया

1945 से सन 2004 के बीच में यूरोप के देशों ने एक-दूसरे के खिलाफ कोई युद्ध नहीं लड़ा है लेकिन आश्चर्य की बात यह है कि 1945 से 2004 के बीच में दुनिया में 345 युद्ध हुए हैं 345 युद्ध हो चुके हैं लेटेस्ट जो है वो इराक का है इराक से पहले अफगानिस्तान अफगानिस्तान  के पहले आप जानते हैं कुवैत का कोरिया का वियतनाम का ऐसे चिल्ली का कोस्टारिका का कोलंबिया का भारत और पाकिस्तान का  बांग्लादेश का ऐसे कुल मिलाकर अगर सूची बनाए जाए तो 1945 से लेकर सन 2004 के बीच में 345 युद्ध हो चुके हैं आने वाले  समय में और भी होने की तैयारी है सीरिया में युद्ध हो सकता है ईरान में हो सकता है अमेरिका ने घोषित कर दिया है कोरिया में भी होने की  संभावना है तो युद्ध तो लगातार हो रहे हैं

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1945 के बाद दुनिया में कोई शांति स्थापित नहीं हुई है काफी युद्ध हो रहे हैं लेकिन यूरोप की  जमीन पर नहीं हो रहे हैं ध्यान देने की बात यह है क्यों क्योंकि यूरोप के देशों ने आपस में समझोता किया हुआ है कि हम एक-दूसरे के  खिलाफ लड़ेंगे नहीं लेकिन यह जो दूसरे विश्वयुद्ध के बाद से दुनिया में युद्ध हो रहे हैं इन युद्धों में अभी फायदा किसको हो रहा है अभी फायदा यूरोप और अमेरिका दोनों को बराबर बराबर हो रहा है 1945 के दूसरे विश्वयुद्ध में पूरा फायदा सिर्फ अमेरिका को हुआ .1945 के बाद  345 युद्ध दुनिया में हुए हैं उसमें फायदा यूरोप को भी हो रहा है और अमेरिका को भी हो रहा है कैसे हो रहा है यूरोप की बड़ी-बड़ी कंपनियां  हथियार बना रही हैं और दूसरे देशों को बेच रही हैं अमेरिका की बड़ी-बड़ी कंपनियां हथियार बना रही हैं और दूसरे देशों को बेच रही हैं..  अगर आप ध्यान से अखबार पढ़ते हैं तो दो-तीन दिन पहले आपने देखा होगा अमेरिका की एक बड़ी कंपनी जो F-16 विमान बनाती है फाइटर प्लेन उस ने पाकिस्तान को बेचना शुरु किया है परिणाम क्या निकलेगा भारत भी वही खरीदेगा क्योंकि भारत को  पाकिस्तान से डर है पाकिस्तान को भारत से डर है..  तो अमेरिका ने पाकिस्तान को बेचना शुरू किया तो भारत सरकार भी खरीदेगी थोड़े  दिन के बाद पाकिस्तान सरकार और ज्यादा खरीदेगी तो भारत सरकार और ज्यादा खरीदेगी तो अमेरिका का दोनों देशों में व्यापार चल गया हथियार बेचने का F-16 प्लेन बेचने का और F-16 का फाइटर प्लेन कोई कोलगेट का पेस्ट नहीं है जो 10 20 रूपये में बेचा जाएगा यह तो ऐसा  फाइटर प्लेन है जो अरबों डॉलर में बिकता है और उसमें मुनाफा हजारों प्रतिशत में होता है ऐसे ही तरीके से हथियार बेचने के काम किए  जाते हैं एक देश को देना फिर पड़ोसी देश अपने आप खरीदेगा उसके देना फिर उसका पड़ोसी अपने-आप खरीदेगा तो  हथियारों की अंधी दौड़ पूरी दुनिया में जो चल रही है दूसरे विश्वयुद्ध के बाद उस का सबसे बड़ा लाभ अमेरिका और यूरोप को हो रहा है यह  लाभ जो है इतना अधिक है कि इन दोनों इलाके में अमेरिका और यूरोप के इलाके में पिछले 50 साल में अभूतपूर्व समृद्धि आई है 50 साल पहले का यूरोप का अध्ययन अगर आप करें और अमेरिका का अध्ययन आप करें तो पिछले 50 साल में यूरोप और अमेरिका की प्रति व्यक्ति  आमदनी हजारों गुणी बडी है सिर्फ इन्हीं युद्धों के होने से क्योंकि उनको भयंकर हथियार बेचने के रास्ते खुल गए हैं तो इस तरह से  दुनिया चल रही है

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