20 साल नौकरी के बाद की फूलों की खेती, फूलो की तरह खिले गाँव वालो के चहरे

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मेरठ। फूल भला किसे अच्छे नहीं लगते, लेकिन फूलों की खेती में भविष्य देखने की हिम्मत बहुत कम ही लोग जुटा पाते हैं। मेरठ के मन्ड़ौरा गांव और इसके आसपास के इलाकों में कई किसानों ने ऐसी हिम्मत दिखाई और अब इनके चेहरे खिले हुए हैं। 20 साल तक आईटी इंजीनियर की नौकरी करने के बाद जब विवेक विहान ने फूलों की खेती करने का फैसला किया, तो किसी को भरोसा नहीं हो रहा था, लेकिन अब इनके चेहरे की मुस्कान बता रही है कि भारतीय किसान भी बदल रहा है और किसानी का तरीका भी।

नौकरी की बजाय फूलों की खेती से जुड़े
विवेक विहान को फूलों की खेती की प्रेरणा मिली मेरठ के बुजुर्ग किसान रमेश कुमार से। इन्होंने पारंपरिक गन्ने की खेती को कई साल पहले बाय-बाय कर दिया और फूलों में अपनी किस्मत आजमाने का फैसला किया। रमेश की कामयाबी और फूल की खेती में मुनाफा देखते हुए जिले के नौजवानों ने नौकरी के लिए शहरों में भटकने की जगह मिट्टी से मोहब्बत करना बेहतर समझा और फूल की खेती में जुट गए। इलाके में फूलों की खुशबू और मुनाफे की चर्चा ऐसी चली कि कुछ वकीलों ने वकालत तक छोड़ दी और इन लाल-पीले फूलों में अपना भविष्य देखने लगे। ये नई सोच के किसान हैं। खेती को सिर्फ बीज डालने और काटने से आगे की सोच रखते हैं। युवा किसान खेती में भी नौकरी की तरह मेहनत और समर्पण की वकालत करते हैं तभी तो इनके चेहरे पर फूलों जैसी मुस्कान है।