हाथ में आने के बाद निकल गया था कश्मीर ! आखिर नियमो के खिलाफ जाकर रेडियो पर घोषणा करने की क्या जरुरत थी

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कश्मीर के मामले में हुआ यह था कि जम्मू कश्मीर के महाराजा थे हरि सिंह. उनके दिल में अंग्रेजो ने यह जोत जला दी थी कि अलग देश बनाना, अलग राष्ट्र बनाना, बफर स्टेट बनाना और वह इसी का गाना गाते रहते थे और अंग्रेजों के मन में था कि जम्मू कश्मीर अलग हो ही जाए जैसे पाकिस्तान अलग हुआ और अंग्रेज उस आग में घी डाल रहे थे. उसी समय पाकिस्तान ने जम्मू कश्मीर पर हमला कर दिया और जैसे ही जम्मू कश्मीर पर हमला हुआ तो महाराजा हरि सिंह के हाथ-पांव फूल गए. उनके पास पूरी सेना नहीं थी जो पाकिस्तान के हमले का सामना कर सकें और महाराजा हरि सिंह को यह दिख गया कि अब तो पाकिस्तान की सेना जम्मू तक पहुंचने वाली है अब ज्यादा दूर नहीं है अब तो यह श्रीनगर भी गया, जम्मू भी गया, सबकुछ गया. उनके दिल में तो ये था कि एक स्वतंत्र राष्ट्र बनेगा लेकिन अब तो लगा कि यह पाकिस्तानी राष्ट्र बन जायेगा. तो अंत में उन्होंने हथियार डाले और सरदार वल्लभभाई पटेल के पास अपने प्रधानमंत्री को भेजा और कहा कि अब आप हमें बचाओ.

विडियो में देखिए कैसे एक बयान से कश्मीर हमारे हाथो से चला गया >>

सरदार वल्लभभाई पटेल ने मुस्कुराते हुए कहा की हम आपको क्यों बचाएं. जम्मू कश्मीर तो भारत का अंग है नहीं और आप तो कहते हैं कि हम स्वतंत्र देश बनाएंगे. अपना स्वतंत्र देश बना लो हम आपको क्यों बचाएं. महाराजा हरि सिंह का प्रधानमंत्री बहुत होशियार बहुत चतुर व्यक्ति था. उसने कहा इस समय बहस करने का समय नहीं है बाद में हम तय कर लेंगे लेकिन यह पाकिस्तानियों से तो हमें अपने राज्य को बचाना है. सरदार वल्लभ भाई पटेल ने कहा कि मैं मेरी सेना भेज सकता हूं और पाकिस्तान को हमारी सेना गाजर मूली की तरह काट देगी लेकिन एक शर्त है शर्त यह है कि आप बिना किसी शर्त के भारत में मिलने का फैसला करो और ऐलान करो कि भारत में आपका पूरा राज्य का विलय होगा. उसी कंडीशन पर भारत की सेना आपको बचाने के लिए आएगी क्योंकि तकनीकी रूप से जब तक आप भारत देश से जुड़ते नहीं है तब तक भारत की सेना आपकी रक्षा क्यों करेगी क्योंकि भारत की सेना तो भारत की सीमाओं की रक्षा करने के लिए है और जम्मू-कश्मीर भारत का अंग नहीं बन पा रहा है और आप ने ऐलान कर दिया है इसको स्वतंत्र देश बनाना है तो हम आपकी रक्षा नहीं कर पाएंगे तो प्रधानमंत्री भागा भागा वापस गया महाराजा हरि सिंह के पास और कहा कि सरदार पटेल ने तो ना कह दिया है. सेना तो नहीं आएगी जब तक हम भारत में विलय के दस्तावेजों पर हस्ताक्षर नहीं करते. भारत के साथ विलय के संधि पत्र पर हस्ताक्षर नहीं करते तब तक भारत की सेना नहीं आएगी और हम तो मारे जाएंगे और उस समय पाकिस्तानी सेना श्रीनगर के बिल्कुल नजदीक में थी. हमला करते हुए वह आगे बढ़ रहे थे कबाइली लोग पाकिस्तानी सेना की भरपूर मदद कर रहे थे. महाराजा हरि सिंह ने फिर दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए भारत में जम्मू कश्मीर का विलय हुआ और जम्मू कश्मीर भारत का अभिन्न अंग बना और सरदार पटेल के सामने जब या दस्तावेज प्रस्तुत हो गए कि महाराजा हरि सिंह ने स्वीकार कर लिया है

फिर सरदार पटेल ने आदेश दिया कि आप भारत की सेना जम्मू-कश्मीर कूच करेगी तो भारतीय वायु सेना ने और थल सेना ने रातों-रात 24 घंटे में जम्मू कश्मीर में जो ऑपरेशन चलाया वह दुनिया का सबसे अद्भुत ऑपरेशन था. हजारों सैनिक उतार दिए जम्मू कश्मीर में और उन सैनिकों ने जो पराक्रम दिखाया वो भी दुनिया में अदभुत था. आप कल्पना कर सकते हैं श्रीनगर तक पाकिस्तान की सेना पहुंच चुकी हो, तब भारत की सेना ने एंट्री की थी और परवेश करते-करते गाजर मूली की तरह से पाकिस्तानियों को काट दिया और पाकिस्तानी फिर उल्टे पैर भागे वहां से और भागते भागते भारत की सेना ने जब उनका पीछा किया तो पाकिस्तानी सीमा तक भारत की सेना पहुंच गई और पाकिस्तान की सीमा का एक बड़ा हिस्सा भारत की सेना के कब्जे में आ गया और तब भारत के सैनिक उत्साह से भरे हुए थे इतने जोश से भरे हुए थे कि भारत के प्रधानमंत्री को बार-बार कह रहे थे कि आप कुछ करना मत बस थोड़ी मोहलत और दे दो लाहौर और कराची भी अब हमारे हाथ में आने वाला है यह ज्यादा दूर नहीं है लेकिन उसी समय हमसे एक भूल हो गई और उसी भूल की चर्चा राजीव भाई आपसे  कर रहे है. ओर वो भूल ये थी कि भारत के प्रधानमंत्री नेहरु ने भारत के ग्रहमंत्री को बिना पूछे अपनी तरफ से युद्ध विराम की घोषणा कर दी. युद्ध विराम का नियम है कि जब युद्ध विराम की घोषणा की जाती है तो कैबिनेट की मीटिंग बुलानी पड़ती है और उस मीटिंग में बात रखनी पड़ती है और पूरी कैबिनेट उस पर सही माने और मंत्रिमंडल का सबका हाँ हो जाए तब प्रधानमंत्री उसकी घोषणा कर सकता है. लेकिन प्रधानमंत्री नेहरु ने ना तो कैबिनेट की मीटिंग बुलाई न उनकी सहमति ली उन्होंने अपने मन से घोषणा कर दी और वह घोषणा भी उन्होंने ऐसे नहीं कि लोगों के सामने रेडियो पर जाकर कर दी

दिल्ली का ऑल इंडिया रेडियो स्टेशन है वहां गए और जाकर घोषणा कर दी और अपनी तरफ से दुनियाभर को यह कह दिया कि हम संयुक्त राष्ट्र संघ की मध्यस्ता में इस जम्मू कश्मीर के मामले को हल करेंगे. मतलब ये कि संयुक्त राष्ट्र महासंघ आए और हमारे और पाकिस्तान के बीच में चौधरी बनकर बैठे और इसका फैसला वो यह करें कि जम्मू कश्मीर भारत में रहेगा कि पाकिस्तान में रहेगा. जब पहले से ही जम्मू कश्मीर के महाराजा ने यह बोल दिया था, हस्ताक्षर कर दिए थे, दस्तावेज उसके मौजूद हैं, कि वो तो भारत में विलय कर चुके हैं तो भारत के प्रधानमंत्री को यह कहने की कोई बात नहीं बनती कि भारत और पाकिस्तान के बीच में जम्मू कश्मीर को हम एक डिस्प्यूटेड एरिया मानते हैं. विवादित क्षेत्र मानते हैं, और इसका फैसला संयुक्त राष्ट्र महासंघ में होगा. बस वही से यह छोटा सा बयान हमारे गले की फांस बन गया और हड्डी बन गया. अब पाकिस्तान बार-बार इसी को कहता रहता है कि भारत ने तो बोला है कि जम्मू कश्मीर किस डिस्प्यूटेड एरिया है, विवादित क्षेत्र है और भारत ने तो बोला है इसका फैसला संयुक्त राष्ट्र महासभा के द्वारा होगा. पाकिस्तान ये चाहता है कि संयुक्त राष्ट्र महासभा के लोग आए, जम्मू कश्मीर में रहे भारत की सेना वहां से हटाई जाए पाकिस्तान की सेना भी वहां ना रहे और जम्मू कश्मीर में जनमत संग्रह कराया जाए और वह जनमत संग्रह के आधार पर तय हो कि जम्मू कश्मीर भारत में रहेगा या पाकिस्तान में रहेगा. अब तकनिकी बात जो राजीव भाई कह रहे है वो ये कि जब पहले विलय हो चुका था तो जम्मू कश्मीर का तो यह प्रश्न ही नहीं उठना चाहिए था. लेकिन वह बहुत बड़ी भूल हो गई और उसी भूल ने जम्मू कश्मीर की विवादित क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय दुनिया में बना रखा है भले हमारे लिए जम्मू कश्मीर भारत का अंग है लेकिन संयुक्त राष्ट्र महासभा के लिए जम्मू कश्मीर एक विवादित क्षेत्र है और विवादित क्षेत्र में चौधरियों को घुसने का दखल करने का अधिकार है तो जम्मू कश्मीर के मामले में संयुक्त राष्ट्र को भी दखल करने का अधिकार है और वहीँ से यह सारा मामला खिचड़ी बन गया. अच्छा खासा पूरा जम्मू कश्मीर वहां के महाराजा ने दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करके भारत के साथ विलय कराया लेकिन प्रधानमंत्री नेहरु के छोटे से बयान ने सारे मामले को बिगाड़ दिया