5,000 रुपए से शुरुआत कर 5 करोड़ तक का सफ़र तय करने वाले एक लड़के की प्रेरक कहानी

341

कॉलेज ड्रॉपआउट बिल गेट्स, स्टीव जॉब्स, मार्क जुकरबर्ग की कहानियां तो सबने पढ़ी होंगी। लेकिन इनके अलावा भी कुछ ऐसे शख्स हैं, जो कॉलेज ड्रॉपआउट होने के साथ-साथ एक कामयाब शख्स भी है। आज की कहानी एक ऐसे ही भारतीय की है, जिसने अपने शौक को ही अपनी जिंदगी का मकसद बनाते हुए कामयाबी की अनोखी कहानी लिखी है।

मध्यप्रदेश के इंदौर में एक मध्यम-वर्गीय परिवार में पैदा लिए शशांक चौरे को बचपन से ही कंप्यूटर में काफी रुची थी। 13 साल की उम्र होते-होते उनका कम्प्यूटर से लगाव और बढ़ता चला गया। धीरे-धीरे उन्हें कोडिंग का चस्का लग गया साथ ही हैकिंग में भी उनकी रुचि दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही थी। कंप्यूटर और हैकिंग में शशांक की रुची बढ़ते देख उनके माता-पिता भी काफी परेशान हो गए और उन्होंने शशांक को इससे दूर करने की भरपूर कोशिश की, लेकिन शशांक के जीवन में कंप्यूटर ही सबकुछ बन कर रह गया था।

अपने इसी नए शौक की वजह से उन्होंने क्रैकपाल डॉट कॉम नाम की एक वेबसाइट के लिए काम करना शुरू किया, उन्हें एक ईमेल अकाउंट को हैक करने के लिए 50 डॉलर मिलते थे। इंजीनियरिंग कालेज में दाखिला लेने के बाद धीरे-धीरे शशांक की दिलचस्पी पढ़ाई-लिखाई से खत्म होने लगी। सेकंड ईयर में उन्होंने इंजीनियरिंग कालेज छोड़ दिया और इंदौर की सबसे नामचीन सॉफ्टवेयर कंपनी में वेब सिक्योरिटी कंसल्टेंट में नौकरी कर ली। इतना ही नहीं इस दौरान उन्हें नौकरी में तीन बार तरक्की भी मिली। जब शशांक की प्रतिभा के बारे में इंदौर शहर की पुलिस को पता चला तो, उसने भी शशांक की सेवाएं ली। जब शशांक ने कुछ दिनों तक दूसरों के लिए काम किया, तब उन्हें एहसास हुआ कि क्यूं न ख़ुद की एक कंपनी खोली जाय? इसी आईडिया के साथ उन्होंने ख़ुद की एक हैकिंग कंपनी खोलने का निश्चय लिया।

अक्टूबर 2009 में शशांक ने इंडिया इंफोटेक नाम से एक कंपनी की स्थापना की। हालांकि, कम पूंजी के साथ यह कर पाना काफी मुश्किल था लेकिन शशांक को एक उपाय सूझा कि क्यों न सेवा को ही उत्पाद की तरह बेचा जाए। इसी आईडिया के साथ उन्होंने नए शिरे से काम शुरू किया। धीरे-धीरे उनका स्टार्टअप एक स्पेशलाइज्ड ई-कॉमर्स वेबसाइट डेवलपमेंट कंपनी में बदल गया और दुनिया भर के क्लाइंट्स को एसईओ सर्विसेज उपलब्ध करवाने लगा।

फरवरी 2014 तक शशांक के हाथ में 10,000 प्रोजेक्ट्स थे। पांच साल में उन्होंने 5 हजार से 5 करोड़ रुपए का सफर तय किया।

एक कॉलेज ड्रॉपआउट का नाममात्र की पूंजी के साथ इस मुकाम तक पहुंचना अपने आप में मिसाल है। आप कल्पना कीजिये की किसी शख्स के हाथ में न कोई डिग्री और न दूसरे जॉब का विकल्प, ऐसे करो या मरो की स्थिति में ज्यादातर लोग शशांक की तरह ही ऑनलाइन काम करने का रास्ता चुनते हैं। हालांकि, बहुत कम लोगों को ही ऐसी सफ़लता नसीब होती है।