गंगा सफाई पर एक भारतीय वैज्ञानिक का उमा भारती को खुला पत्र

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लोकसभा में गंगा की सफाई को लेकर मुद्दा उठा. सरकार ने आज स्वीकार किया कि गंगा में भारी मात्रा में गाद जमा होना एक बड़ी चुनौती है और सरकार बिहार एवं पश्चिम बंगाल सरकार के प्रतिनिधयों एवं केंद्र की सहभागिता वाली एक समिति जल्द बनाने जा रही है ताकि गाद की समस्या को दूर किया जा सके. लोकसभा में राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव, जयप्रकाश नारायण यादव, अधीर रंजन चौधरी आदि के पूरक प्रश्नों के उत्तर में जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्री उमा भारती ने कहा कि यह सच्चाई है कि गंगा नदी में गाद एक बड़ी समस्या है. इस संबंध में साल 2002 में मित्तल समिति का गठन किया गया था लेकिन उसकी रिपोर्ट धूल खाती रही. हमने माधव चिताले समिति बनाई और उसने रिपोर्ट पेश की. हमने इस रिपोर्ट को बिहार सरकार को दिखाया. बिहार के मुख्यमंत्री ने इसके बारे में कुछ सुझाव भी दिए.

वैज्ञानिक और शोधकर्ता डा. शिवदर्शन मालिक जी ने केन्द्रीय मंत्री उमा भारती जी को अपने फेसबुक प्रोफाइल पर एक खुला पत्र लिखा है. आप भी इसे पढ़े और इतना शेयर करे की मंत्री जी तक पहुच जाए. ताकि जिसे वो समस्या बता रही है, वो भी उसे समाधान के रूप में देख सके. आगे उनका पत्र आप पढ़ सकते है.

माननीय उमा भारती जी,
मंत्री गंगा स्वच्छता अभियान,
भारत सरकार।

विषयः- गंगा की गाद।

मंत्री उमा भारती बहन जी नमस्ते, मंत्री बहन जी कल 3 अगस्त 2017 को आपको संसद में बोलते हुए देखा तो आप असहाय सी नजर आई। आप ने गंगा की गाद को एक बड़ी समस्या बताया और खबरों में देखता रहता हूँ कि बिहार सरकार भी नदियों की गाद से खासी परेशान रहती है। आप की पीड़ा मैं समझ सकता हूँ कि आप अपने कार्यकाल में ही गंगा की सफाई करवाने के प्रति कितनी समर्पित हैं। लेकिन आप को इस गाद का रूपी समस्या का कोई समाधान नजर नहीं आ रहा। आप अपनी जगह बिलकुल सही हैं, गाद एक समस्या है जो हमनें पश्चिमी जगत का अंधाधुंध अनुसरण कर के खड़ी की।

अख़बार में दी गई खबर

क्षमा करें मंत्री बहन जी जो आपको समस्या नजर आ रही है वो समस्या नहीं थी समाधान था। आईए समय की घडी को कुछ दशक पीछे घुमाते हैं। ज्यादा नहीं बस चालीस या पचास साल पहले। यह गाद सिर्फ गंगा में ही नहीं आती थी या आती है, यह तो हिमालय या किसी भी नये पुराने पर्वत से निकलने वाली एक अमुल्य संपदा है जो प्रकृति ने हमें दी है।

क्योंकि मैं रोहतक का रहने वाला हूँ, इस लिए जानता हूँ की खादर की मिट्टी की उर्वरकता यही यमुना की गाद बढाती थी, कुछ वर्षों के अंतराल के बाद यमुना का पानी गोहाना व खरखौदा तक आता ही रहता था तथा प्रकृति के वरदान के रूप में वह पानी यह गाद हमारे खेतों में ले आता था। इस गाद के आने के कुछ साल बाद तक किसान को खेत में बस बीज डालना पड़ता था, इस गाद का रासायनिक विष्लेषण तो कराईए यह गाद खेती के लिए सर्वोत्तम है।

पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम जी के साथ डा. शिव दर्शन मालिक

यह गाद ही हमारे तालाबों में जम जाती थी और वैशाख व ज्येष्ठ माह यही गाद ढेलों के रूप में हमें दिखाई देती थी। सभी ग्रामीण भारतवासी इन मानसून पूर्व के महीनों में मिल जुलकर तालाबों से वो गाद के ढेले निकाल कर अपने अपने घर अपने अपने उपयोग हेतु ले जाते थे। इसी गाद से हमारे कच्चे वातानुकूलित घर बनते थे व इसी गाद से कुम्हार सभी प्रकार के बर्तन, घडे, सुराही व पता नहीं क्या क्या बनाता था।
हम अपने पशुओं के ठाण भी इसी गाद से ठीक करते थे तथा हम बच्चे तालाबों के किनारे इसी गाद की फिसलन पट्टी बना कर तालाबों में नहाते थे।

भारतीय गांव में बने मिट्टी के घर
नीचे जो घर बन रहा है उस के नीचे लिख विदेश में बन रहा मिट्टी का अत्याधुनिक घर

मंत्री बहन जी गाद नहीं बदली है हम बदले हैं, गाद आज भी समस्या नहीं वरदान है। मुझे याद है कि नैशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने कोयला बिजली घर में से निकलने वाली राख को कानून बना कर सीमेंट कंपनियों को सीमेंट में मिलाने के लिए मजबूर किया था तो यह गाद तो मात्रात्तामक रूप में उस से कहीं अधिक निकलती है। आप भी उसी नैशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल से कानून बनवाईए कि अब कुम्हार मिट्टी के लिए परेशान नहीं होगें, अब आगे से सभी घर के लिए ईको फ्रेंडली मिट्टी यानि इसी गाद के बनेंगे। अगर घर ऐसे दोबारा बनने लगे तो सोचिए देश को कितना फायदा होगा।

मंत्री बहन जी पश्चिमी जगत में आज मिट्टी, लकड़ी व घास फूस के कॉब हाऊस व थैच्ड रुफ हाऊस स्टेटस् सिंबल बन रहे हैं आप गंगा सफाई के नाम पर यह जनहितकारी कानून संसद में रखिये। मिट्टी के बर्तनों पर सब्सिडी दिजिऐ, कुम्हारों, किसानों व ग्रामीणो को इस गाद के प्रयोग की आजादी तो दीजिऐ वह गाद वरदान है वो सब दिखा देंगे फिर यह गाद समस्या नहीं अवसर व वरदान बन जाएगी।

आप के लिए दो चित्र संलग्न कर रहा हूँ एक चालीस पचास साल पहले के भारतीय गांव की तथा दूसरी किसी पश्चिमी देश में बन रहे अत्याधुनिक घर की कि कैसे गाद का घर बनाने में होने लगा है। मिट्टी के बर्तन तो आपने देख व प्रयोग कर ही रखे हैं।

पत्र इस भावना के साथ सार्वजनिक कर रहा हूँ ताकि यह आप तक जल्दी पहुंचे।

आप की तरह ही गंगा मैया की गाद को लेकर चिंतित आपका एक भारतीय भाईः-
डॉ. शिव दर्शन मलिक, वैदिक भवन, शीला बायपास, रोहतक (हरियाणा) – 9812054982

Website- www.VedicPlaster.com

दिनाकंः – अगस्त 04, 2017

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