गाय पर 6 साल एक्सपेरिमेंट ! गाय के मुख में भगवान शंकर का वास है

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दोस्तों राजीव भाई एक जगह व्याख्यान दे रहे थे. वहा पर वो गौमूत्र से होने वाली चिकित्सा के बारे में बता रहे थे कि गौमूत्र से कौन कौन से रोग ठीक हो सकते और कैसे ? उस व्याख्यान में सवाल जवाब का दौर भी जारी था. जिसमे एक व्यक्ति ने सवाल किया कि गौमूत्र कौन सी गाय का सही है ?

बहुत से लोग सोचते है कि अगर गाय बीमारी है तो उसका मूत्र पीने से किस तरह की बीमारियाँ आ सकती हैं, अगर गौमूत्र सही नही है तो उस हाल में क्या करना चाहिए, वगैरह वगैरह.

राजीव भाई ने ये जाने के लिए एक देशी गाय के ऊपर 6 साल तक एक्सपेरिमेंट किया . गाय को लगातार 6 साल (बहुत कम मात्रा में जिससे वो मरे ना) तक जहर खिलाया गया. और सबसे ख़राब जहर खिलाया. जिसका नाम है संखिया है इसको अंग्रेजी में आर्सेनिक कहा जाता है. हर रोज गाय को चारे में दिया गया वो भी बिलकुल थोडा-थोडा क्योकि ज्यादा देने से गाय मर जाती. 6 साल जिस गाय पे राजीव भाई ने ये एक्सपेरिमेंट किया, वो आज भी जीवित है और स्वस्थ है तंदरुस्त है.

राजीव भाई ने लगातार 6 साल गौमूत्र – गोबर, ब्लड को टेस्ट किया. क्योंकि लोगों का ये कहना है कि जो भी कुछ खाते पीते है वो ब्लड या पेशाब बाहर में आता ही है. दोस्तों जब लगातार 6 साल इसको टेस्ट किया गया तो हुआ ये कि कभी भी थोडा सा भी जहर किसी भी चीज में नहीं पाया गया. ये बहुत ही अद्भुत है. गाय के शरीर में खुद ऐसी व्यवस्था भगवान ने की है कि वो जहर को फ़िल्टर कर सकती है.

हिन्दू धर्म में कहते हैं कि गाय का पूरा शरीर देवभूमि है जहां 33 कोटि देवी-देवता निवास करते हैं। पुराणों में एक पुराण है भविष्य पुराण। जिसमें गाय में कहाँ, कौन से देवता का वास है, स्पष्ट लिखा है। गाय की पीठ वाले हिस्से में ब्रह्म देव, कंठ में विष्णु भगवान और मुख प्रदेश में भगवान शिव का वास है। और जैसे शंकर जी ने विष पीकर लोगो को बचाया था वैसे ही गाय भी खुद विष पीकर लोगो को बचाती है. जो इस एक्सपेरिमेंट में सिद्ध हो गया.

दोस्तों वो सारा जहर गाय के गले में वहीँ रुक गया. क्योकि जिस गाय पर एक्सपेरिमेंट किया गया उसे जहर देने के बाद उस गाय के गले के पास 6 साल में एक ब्लू कलर का रिंग बन गया. राजीव भाई ने वहां से खून निकाला और उसको टेस्ट किया तो उसमें संखिया (आर्सेनिक) जहर पाया गया. इससे ये पता चलता है कि वो जहर गले के नीचे उतरा ही नही, शायद शंकर भगवान ने रोक दिया.

दोस्तों अगर आपको कोई बीमारी है और आपको गौमूत्र लेना है तो आप बेचिंत होकर गौमूत्र पीजिये. अगर आपको लग रहा है कि गाय कचरा खा रही है तो आप चिंता मत कीजिये ये कचरा जायेगा नही उसके मूत्र तक क्योकि भगवान ने उसके शरीर में ऐसी ही व्यवस्था की हुई है. लेकिन आपके दिल और मन की तसल्ली के लिए कि गाय अच्छा चारा खाती हो, साफ़ सुथरे वातावरण में रहती हो, और नियमित घुमने के लिये जाती हो उसका मूत्र जरुर पीयें, अगर उपलब्द हो तो.

अगर आप ऐसी जगह रहते हों जहाँ गाय कचरा ही खाती हो. कोई गाय मिल ही नही रही हो जो शुद्द चारा खाती हो और बराबर घुमने जाती हो और आप कोई ऐसी बीमारी से तड़प रहे हो, और उस बीमारी में आपको गौमूत्र चाहिए ही चाहिए. तो आप बिना किसी संकोच के उसी गाय का गौमूत्र ले लें जो वहां मौजूद है. और वो कुछ नुकसान नही करेगा, बल्कि  कुछ न कुछ फायदा ही करेगा.

अब तक की गौमूत्र पे जो रिसर्च है वो ये है कि इसके कोई साइडइफ़ेक्ट नही है. अगर आपने गौमूत्र ज्यादा भी पी लिए तो आपका शरीर 20 मिनट में फालतू गौमूत्र को आपके पेशाब के साथ बाहर निकाल देगा. इसलिए अगर थोडा ज्यादा या ख़राब पी लिया तो शरीर उसको बाहर निकाल देगा. जो काम का है, वो शरीर में ही रह जायेगा.

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