विज्ञानं के क्षेत्र में भारत और India का अंतर ! पूरा पोस्ट जरुर पढ़े

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भारत में : किसी को वैज्ञानिक बनने से पहले उसका ऋषि होना आवशक होता था।
इंडिया में: वैज्ञानिक बनने के लिए पुस्तकों का ज्ञान और कुछ जड़ का प्रयोग करने की क्षमता काफी है।

भारत में: भारतीय वैज्ञानिक जानते थे की मनुष्य प्राकृतिक वातावरण में ही स्वस्थ रहता है उन्नति करता है इसलिए यहाँ प्रकृति को पुष्ट कर उससे अधिक से अधिक लाभ उठाने का विज्ञानं विकसित हुआ, भारत का विज्ञानं समृद्धि का विज्ञानं था।
इंडिया में: इंडिया ने प्रकृति को उजड़ा लोगों को प्रकृति से दूर कर दिया, इससे जो अभाव और विकृतिया पैदा हुई उसकी पूर्ति करने के लिए विज्ञानं का विकास किया, इसलिए इंडिया का विज्ञानं अभाव एवं दुर्गति का विज्ञानं है।

भारत में: प्रकृति से जुड़े होने के कारण
भारत में स्वस्य्थ जीवन का विज्ञानं विकसित हुआ।
इंडिया में: प्रकृति विरोधी होने के कारन रोग बड़े तो इंडिया ने पश्चिम की चिकित्सा पद्धति अपनाया।
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भारत में: यही विज्ञानं का विकास हुआ सभी बड़े आविष्कार यहाँ हुए।
इंडिया में: हमारे वैज्ञानिक सिद्धांतो के आधार पर आविष्कार करने वाले अंग्रेजो को ही मूल आविष्कार मानना, पश्चिम के इसी विज्ञानं की नक़ल और उसपर आधारित तकनीक का विकास हो रहा हैं।

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भारत में: भारत के हर गाँव और शहर बहुत ही समृद्ध थे, गाँव में ही रोजगार उपलब्ध थे, बेरोजगारी नामक शब्द तक नही था समाज में, कभी व्यापारी, तीर्थयात्री, विद्यान दूर दूर तक आते थे, यात्रियों को कोई कष्ट न हो इसलिए अतिथि सत्कार की परंपरा विकसित हुई, भारत निर्यात में बहुत आगे था, इसलिए यहाँ नौका विज्ञानं अति समृद्ध था, वास्कोडिगामा ने भारत की खोंज नही की थी वह अफ्रीका के नाविकों और व्यापारियों के साथ यहाँ पहुंचा था।
इंडिया में: शहरों को बसने के लिए गाँव को उजाड़ा। गाँव से शहर, शहर से महानगर, दूरियों के कारन यातायात के लिए नेशनल हाईवे, ट्रक, रेल, विमान इसी तरह शहरों में भीड़ बड़ी तो शहरों में ऊँची इमारतों आदि मजबूरी का विज्ञानं विकसित हो रहा हैं। 5 लाख से अधिक जनसँख्या होने के बाद शहर विकृत होने लगते हैं, उस विकृति को दूर करने के लिए जिस विज्ञानं की आवश्यकता होती हैं वह प्रकृति के विरुद्ध होने से विकृति का विज्ञानं हैं।
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भारत में: प्रकृति से जुडाव होने के कारण हर व्यक्ति की सोच वैज्ञानिक थी।
इंडिया में: प्रकृति से कटा व्यक्ति भेद चाल चल रहा है, सुनामी यहाँ एक भी वनवासी या खुला पशु नही मरा, पड़े लिखे समाज के लाखों लोग मरे। होटलों, आधुनिक अनुष्ठानो का अधिक से अधिक क्षति हुआ। पशु जितना सामान्य ज्ञान न होने के बाद भी यह अहंकार की हम वैज्ञानिक युग में जी रहें है, व्यक्ति को प्रकृति से जोड़ने की वजाय, आपदा की सुचना के लिए वैज्ञानिक अनुसंधानों पर अरबों खरबों खर्च किया जाता हैं।
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भारत में: समाज की प्रगति के लिए विज्ञानं की तकनीकों का विकास होता था।
इंडिया में: तकनिकी प्रगति के अनुरूप समाज को ढलने का प्रयत्न किया जाता हैं।
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भारत में: भारत के ऋषि जानते थे की शक्ति का आधार आहार नही है उसमे निहित प्राण हैं। अतः प्राण विज्ञानं आधारित बैल से कृषि का विकास हुआ।
इंडिया में: इंडिया का वैज्ञानिक जानते ही नही के क्या है प्राण। सारा आहार प्राणहीन ही नही प्राणनाशक होता जा रहा हैं।
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भारत में: गेहूं पिसने की घट्टी, तेल निकलने की घाणी, घी निकालने की बिलोना पद्धति, रोटी बनाने वाली आदि तकनीकों का विकास प्राण विज्ञानं के आधार पर हुआ, विज्ञानं में पिछड़ेपन का कारण नही।
इंडिया में: आता चक्की, तेल मिल, डेयरी घी यह अज्ञान की दें हैं विज्ञानं की नही, ब्रेड बनाने में गेहूं के 23 पौष्टिक गुण नष्ट हो जाते हैं फिर उसमे 8 कृत्तिम और सुगन्धित गुण डालकर कंपनी कहती है ‘एनरिच्ड ब्रेड’ ‘हमारा आटा बिना मिलावट वाला’ और पड़ी लिखी महिलाये उसे खरीद कर गौरान्वित होती हैं।
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भारत में: प्रकृति आधारित आयुर्वेद के मानदंडो पर खरा उतरने पर ही किसी विद्या को स्वस्थ विज्ञानं का प्रमाण पत्र मिलता हैं।
इंडिया में: अंग्रेजी चिकित्सा पद्धति के मानदंडो पर खरा उतरने पर ही किसी विद्या को स्वस्थ विज्ञानं का प्रमाण मिलता हैं।
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भारत में: स्वस्थ अर्थात स्व में स्थित।
इंडिया में: स्वस्थ अर्थात रोग मुक्त।
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भारत में: वैज्ञानिक भाषा संस्कृत का विकास हुआ।
इंडिया में: सभी भाषाएँ अवैज्ञानिक भाषा अंग्रेजी के अधीन हैं।

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