ऐसे पायें इस भयानक रोग से हमेशा के लिए छुटकारा

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इस रोग को दमा के नाम से भी जानते है जिसमें सांस फूलने और सांस लेने में दिक्कत जैसी समस्या आती है। अस्थमा का रोग महिला, पुरुष और बच्चे किसी को भी हो सकता है सांस वाली नली फेफड़ों से हवा अंदर और बाहर करती है और अस्थमा होने पर इस नली के अंदर की और सूजन हो जाती है। ये सूजन सांस की नली को संवेदनशील बना देती है जिस वजह से किसी भी बेचैन करने वाली चीज़ से जल्दी एलर्जी हो जाती है और इससे फेफड़ों में कम हवा पहुँचती है। अस्थमा रोग 2 प्रकार का होता है स्पेसिफिक और नॉन स्पेसिफिक। सांस फूलने की परेशानी जब किसी एलर्जी की वजह से हो तो ये स्पेसिफिक है और जब दमा की समस्या मौसम के प्रभाव या एक्सरसाइज की वजह से हो तो ये नॉन स्पेसिफिक अस्थमा है

दमा के कारण क्या है

खाने पीने की ग़लत आदतें, मिलावटी आहार और जादा मसालेदार चीजें खाना, गुस्सा, तनाव या किसी चीज़ से डर से भी दमा हो सकता है, खून में किसी तरह का दोष होना, पालतू जानवरों से भी ये रोग हो सकता है, किसी नशीली चीज़ का सेवन करना, लंबे समय तक सर्दी जुकाम या फिर नजला होना या ठंड लग जाना, आँतों और फेफड़ों में कमज़ोरी होना, सांस लेने वाली नली में धूल मिट्टी फस जाना, धूम्रपान और तंबाकू का अधिक सेवन करना, अगर परिवार में पहले किसी को दमा हुआ है तो आपको ये रोग होने की संभावना अधिक है, जादा दवाई लेने और कफ सुख जाने पर अस्थमा हो सकता है, प्रदूषण से होने वाली एलर्जी से भी अस्थमा हो सकता है।

अस्थमा के लक्षण

दमा का प्रमुख लक्षण है सांस फूलना और सांस लेने में तकलीफ होना, थकावट महसूस करना और पसीना आना, इस बीमारी में सुखी खाँसी आती है, छाती में जकड़न होना, दमा के रोगी का कफ बदबूदार होता है, सांस लेने में जादा ज़ोर लगना और चेहरा लाल हो जाना, सांस लेते समय सिट्टी की हल्की हल्की आवाज़ सुनाई पड़ना।

अस्थमा के लिए आहार

अस्थमा के रोगी को खाने पीने का ख्याल रखना चाहिए और हल्का जल्दी पचने वाला आहार लेना चाहिए, आहार में लहसुन, लौकी, मैथी, अदरक, टिंडे और तरोई का सेवन अधिक करे, मोटा पीसा हुआ आटे से बनी रोटियां और दलिया खाए, खजूर और मुनक्का खाये, हमेशा पानी गुनगुना करके पिए।

अस्थमा के लिए योग

अस्थमा का इलाज करने के लिए होम रेमेडीज के साथ अगर योग भी किया जाए तो जल्दी फायदा मिल सकता है। दमा के लिए योगमें अनुलोम विलोम प्राणायाम, भास्त्रिका प्राणायाम और कपालभाती कर सकते है।

दमा का आयुर्वेदिक उपचार

आयुर्वेदिक दवा और घरेलू तरीके से इलाज करने का फायदा ये है की ये बीमारी और उसके कारण दोनों का उपचार करने में मदद करते है और इनके साइड इफ़ेक्ट भी ना के बराबर है, एक कप में दो चम्मच आंवला पाउडर डालें अब इसमें एक चम्मच शहद मिला कर अच्छे से मिक्स कर ले। रोजाना सुबह इसका सेवन करने पर अस्थमा कंट्रोल होने लगता है, चार से पांच लौंग आधे गिलास पानी में डाल कर पांच मिनट तक उबल ले फिर इसे छान कर थोड़ा शहद मिलाए और पिए। ये अस्थमा का आयुर्वेदिक इलाज  हर रोज दो से तीन बार करने पर दमा ठीक होने में मदद मिलती है, एक तिहाई हिस्सा पालक का रस और दो तिहाई हिस्सा गाजर का रस मिला कर एक गिलास हर रोज पिए, बथुआ, लहसुन, जों और अदरक का प्रयोग अस्थमा के रोगी के लिए काफी फायदेमंद है

राजीव दिक्सित जी द्वारा बताया उपचार

आधा चमच्च दालचीनी और आधा चमच्च शहद मिलकर गरम पानी के साथ लें या फिर 3 महीने तक गौमुत्र का सेवन करें ऐसी गाये जो अभि तक माँ नही बनी उसका गौमूत्र ज्यादा अच्छा रहता है

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