श्याम तुलसी बुखार को तोड़ने में पेरासिटामोल से भी तेज असर दिखाती है- दोनों तुलसी के बारे में जानिए

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नमस्कार दोस्तों ! आज हम आपको राजीव दीक्षित जी के लिखे हुए तुलसी के फायदे बताने जा रहे है. जेसा कि हम सब जानते ही हैं की तुलसी दो प्रकार की होती है. जिनमे से एक होती है “राम तुलसी” और दूसरी है “श्याम तुलसी”. तकरीबन तुलसी हम सबके घर में होती है, एसा कोई ही घर होगा झा तुलसी मोजूद न हो. तो चलिए जानते है इन तुलसी की किस्मो के बारे में विस्तार से

तुलसी सभी स्थानों पर पाई जाती है। इसे लोग घरों, बागों व मंदिरों के आस-पास लगाते हैं लेकिन यह जंगलों में अपने आप ही उग आती है। तुलसी की अनेक किस्में होती हैं परन्तु गुण और धर्म की दृष्टि से काली तुलसी सबसे अधिक महत्वपूर्ण व उत्तम होती है। आमतौर पर तुलसी की पत्तियां हरी व काली होती है। तुलसी का पौधा सामान्यत: 1 से 4 फुट तक ऊंचा होता है। इसकी पत्तियां 1 से 2 इंच लंबे अंडाकार, आयताकार, ग्रंथियुक्त व तीव्र सुगंध वाली होती है। इसमें गोलाकार, बैंगनी या लाल आभा लिए मंजरी (फूल) लगते हैं।

राम तुलसी और श्याम तुलसी – बात अगर तुलसी की किस्मो की जाये तो सबसे उपर राम तुलसी पाई जाती है. राम तुलसी का रंग हल्का हरा होता है. जबकि श्याम तुलसी दिखने में डार्क ग्रीन होती है. कभी कभी श्याम तुलसी दिखने में काले रंग की भी नजर आती है इसलिए, उसको श्याम तुलसी कहा जाता है. श्याम तुलसी में बहुत सारे औषधीय गुण पाए जाते हैं. जबकि श्याम तुलसी में ज्यादा गुण नही है.

घर में लगाने के लिए जरूरी किस्म

अगर आपको घर में तूलसी लगनी है तो हमेशा श्याम तुलसी ही लगायें. जेसा की हम जानते ही है कि तुलसी की एक खास विशेषता है. और वो विशेषता ये है कि तुलसी साल में कभी भी लगाई जा सकती है भले मौसम कोई भी हो. इसकी एक और विशेषता है कि तुलसी किसी भी समय में मिल सकती है. तुलसी को घर के गार्डन में भी लगा सकते है और अगर गार्डन नही है तो इसको हम किसी गमले में भी लगा सकते है.

श्याम तुलसी के उपयोग

श्याम तुलसी के बहुत सारे उपयोग है. सबसे पहले उपयोग की अगर बात की जाये तो, श्याम तुलसी किसी भी तरह के बुखार को ठीक कर सकती है. चाहे वो बैक्टीरियल फेवर हो या वायरल फेवर, श्याम तुलसी का सेवन करने से आपको इन सब बुखारो से हमेशा के लिए छुटकारा मिल जायेगा. तो आप हमेशा घर में तुलसी को लगाये.

श्याम तुलसी को उपयोग करने के सरल तरीके

श्याम तुलसी को उपयोग केना बेहद सरल है. इसके लिए आपको 15-20 पत्तों की चटनी बना कर उसको गर्म करके उसका रस निकलना होगा. रस निकलने के बाद इसमें थोडा गुड मिला लीजिये. अगर आपको शहद पसंद है तो इस रस में 1-2 चम्मच आप शहद के मिला सकते है. अंग्रेजी की दवा “पेरासिटामोल” जो काम करती है वही काम यह तुलसी करती है. अगर आपको 104-105 डिग्री बुखार किस शिकायत रहती है तो इसका काढ़ा बना क्र सेवन करें. बहुत कम समय में ही आपका बुखार उतर जायेगा.

काढ़ा बनाने का तरीका

तुलसी के पत्तो का काढ़ा बनाना बहुत ही आसान है. इसके लिए आपको तुलसी के कुछ पत्ते लेकर उन्हें किसी बर्तन में पानी मिलाकर उबालने होंगे. पत्तो को तब तक पानी में उबालते रहे, जब तक पानी आधा न हो जाये. इसके बाद पानी में थोडा गुड मिला दे. और पानी को पीने लायक गुनगुना करलें. इस काढ़े से कितना भी खराब बुखार क्यों न हो, तुरंत उतर जायेगा.

महिलाओं के लिए फायदेमंद

काफी माताओं को आजकल अंदर से पानी आने की शिकायत हो रही है. जिसको अंग्रेजी में लिकोरिया कहते हैं, उसकी सबसे अच्छी औषध है यह श्याम तुलसी. यह श्याम तुलसी का भरपूर उपयोग करिए आपको इस बीमारी से बिल्कुल आसानी से निजात मिल जाएगी.

गुण (Property)

आयुर्वेद के अनुसार :आयुर्वेद के अनुसार तुलसी, हल्की, गर्म, तीखी कटु, रूखी, पाचन शक्ति को बढ़ाने वाली होती है तुलसी कीडे़ को नष्ट करने वाली, दुर्गंध को दूर करने वाली, कफ को निकालने वाली तथा वायु को नष्ट करने वाली होती है। यह पसली के दर्द को मिटाने वाली, हृदय के लिए लाभकारी, मूत्रकृच्छ (पेशाब करने में कष्ट होना) को ठीक करने वाली, विष के दोषों को नष्ट करने वाली और त्वचा रोग को समाप्त करने वाली होती है। यह हिचकी, खांसी, दमा, सिर दर्द, मिर्गी, पेट के कीड़े, विष विकार, अरुचि (भोजन करने की इच्छा न करना), खून की खराबी, कमर दर्द, मुंह व सांस की बदबू एवं विषम ज्वर आदि को दूर करती है। इससे वीर्य बढ़ता है, उल्टी ठीक होती है, पुराना कब्ज दूर होता है, घाव ठीक होता है, सूजन पचती है, जोड़ों का दर्द, मूत्र की जलन, पेशाब करने में दर्द, कुष्ठ एवं कमजोरी आदि रोग ठीक होता है। यह जीवाणु नष्ट करती है और गर्भ को रोकती है।

यूनानी चिकित्सकों के अनुसार : यूनानी चिकित्सकों के अनुसार तुलसी बल बढ़ाने वाली, हृदयोत्तेजक, सूजन को पचाने वाली एवं सिर दर्द को ठीक करने वाली होती है। तुलसी के पत्ते बेहोशी में सुंघाने से बेहोशी दूर होती है। इसके पत्ते चबाने से मुंह की दुर्गंध दूर होती है। तुलसी के सेवन से सूखी खांसी दूर होती है और वीर्य गाढ़ा होता है। इसके बीज दस्त में आंव व खून आना बंद करता है।

वैज्ञानिकों के अनुसार : वैज्ञानिकों द्वारा तुलसी का रासायनिक विश्लेषण करने पर पता चलता है कि इसके बीजों में हरे व पीले रंग का एक स्थिर तेल 17.8 प्रतिशत की मात्रा में होता है। इसके अतिरिक्त बीजों से निकलने वाले स्थिर तेल में कुछ सीटोस्टेराल, स्टीयरिक, लिनोलक, पामिटिक, लिनोलेनिक और ओलिक वसा अम्ल भी होते हैं। इसमें ग्लाइकोसाइड, टैनिन, सेवानिन और एल्केलाइड़स भी होते हैं।

तुलसी के पत्ते व मंजरी से लौंग के समान गंधवाले पीले व हरे रंग के उड़नशील तेल 0.1 से 0.3 प्रतिशत की मात्रा में पाए जाते हैं। इसमें यूजीनाल 71 प्रतिशत, यूजीनाल मिथाइल ईथर 20 प्रतिशत तथा कार्वाकोल 3 प्रतिशत होता है। इसके पत्तों में थोड़ी मात्रा में `केरोटीन` और विटामिन `सी` भी होती है।

ज्यादा डिटेल्स में जानने के लिए निचे दी गयी विडियो देखें >>

हिंदू धर्म में तुलसी को अत्यधिक महत्व दिया गया है। तुलसी की पुजा सभी घरों में की जाती है और इसी लिए तुलसी घर-घर में लगाई जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जिस घर में तुलसी के पौधे होते हैं वहां मच्छर, सांप, बिच्छू व हानिकारक कीड़े आदि नहीं उत्पन्न होते।

तुलसी की पत्तियां हाथ जोड़कर या मन में तुलसी के प्रति सम्मान और श्रद्धा रखते हुए जितनी आवश्यकता हो उतनी ही तोड़नी चाहिए। इसकी पत्तियां तोड़ते समय ध्यान रखें कि मंजरी के आसपास की पत्तियां तोड़ने से पौधा और जल्दी बढ़ता है। अत: मंजरी के पास की पत्तियां ही तोड़ना चाहिए। पूर्णिमा, अमावस्या, संक्रान्तिकाल, कार्तिक, द्वादशी, रविवार, शाम के समय, रात एवं दिन के बारह बजे के आसपास तुलसी की पत्तियां नहीं तोड़नी चाहिए। तेल की मालिश कराने के बाद बिना नहाए, स्त्रियों के मासिक धर्म के समय अथवा किसी प्रकार की अन्य अशुद्धता के समय तुलसी के पौधे को नहीं छूना चाहिए क्योंकि इससे पौधे जल्दी सूख जाते हैं। यदि पत्तों में छेद दिखाई देने लगे तो कंडे (छाणे) की राख ऊपर छिड़क देने से उत्तम फल मिलता है।

हानिकारक प्रभाव (Harmful effects)

चरक संहिता के अनुसार तुलसी के साथ दूध का प्रयोग नहीं करना चाहिए क्योंकि इससे कुष्ठ रोग होने की संभावना रहती है। कार्तिक के महीने में तुलसी के पत्ते पान के साथ सेवन करने से शारीरिक कष्ट हो सकता है। तुलसी का अधिक मात्रा में सेवन करना मस्तिष्क के लिए हानिकारक होता है।