मिटटी के बर्तन में खाना बनाने के फायदे, TVS ग्रुप के मालिक भी मिटटी के बर्तन में बना खाना खाते है

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नमस्कार दोस्तों, आपका हमारी वेबसाइट में एक बार फिर से स्वागत है. आज हम आपके लिए राजीव दिक्सित जी द्वारा बतया गया एक और उपयोग लाये है जिसका नाम है मिट्टी. तो दोस्तों अज हम आपको बतायेंगे की मिट्टी के बर्तनों के साधारण मनुष्य के लिए क्या क्या फायदे हो सकते है. क्या आप जानते हैं कि मिट्टी सारे माइक्रो न्यूट्रिएंट्स की मां है और दुनिया के सारे माइक्रो न्यूट्रिएंट्स मिट्टी से ही मिलते हैं. अगर आपको मगनिसियम चाहिए, कैल्शियम चाहिए, सुल्फोर चाहिए या फस्फोरोस आदि जैसे धातु चाहिए तो ये सभी आपको केवल मिट्टी से ही प्राप्त होंगे.

मिट्टी सूरज के धुप में लाखो सालों से तपती आ रही है. शायद इतनी तपस्या तो किसी महात्मा ने नही की होगी, जितनी ये मिट्टी अकेली करती आ रही है. पहले जमाने में लोग पानी की स्टोरेज के लिए मिट्टी के घडो का उपयोग करते थे. जबकि आजकल घड़ों की जगह रेफ्रीजिरेटर ने लेली है. एक समय था जब लोग मिट्टी के दीयों से घर में रौशनी करते थे, और अब दीयों की जगह चाइना के लैम्प्स और बल्ब ने लेली है. हम सोचते है की हम मॉडर्न बनते जा रहे हैं. जबकि हम धीरे धीरे मूर्खो की श्रेणी में दाखिल होते जा रहे हैं.

राजीव जी ने बताया कि कुछ समय पहले वह जब पंजाब गये थे तो वह उनको कुछ कुम्हार मिले थे. उन कुम्हारों से जब राजीव जी ने पुचा की वह अपनी रोज़ी-रोटी कैसे चला रहे है? तो उन्होंने जवाब दिया की गरीबी उनकी जान ले रही है. तब राजीव जी ने बताया की अगर आपके ये घड़े और दीये फिर से बिकने लगे तो क्या होगा? तो कुम्हारों का उत्तर था की इससे बड़ी ख़ुशी की बात भला उनके लिए क्या हो सकती है. तब उन्होंने बताया की वह खुद फ्री में उनके बर्तनों का विगयापन किया करेंगे.

आजकल बहुत सारे बच्चे सीजर से पैदा हो रहें है. कारण ये है की उनकी माताओं को आयरन और कैल्शियम की कमी रहती है. और बिना आयरन और कैल्शियम के कोई भी बच्चा बिना सीजर के पैदा नही हो सकता. गर्भावस्था के समय हीमोग्लोबिन 8,9,7 के आस-पास हो जाता है. इतनी कमी खाने में आयरनन मिल पाने से और कैल्शियम न मिल पाने से हो जाती है. जिससे शरीर में पोषक तत्वों की कमी हो जाती है. तो उसको कुछ बैलेंस करना है तो वह केवल  मिट्टी ही कर सकती है. अगर इस कमी को दूर नही किया गया तो माता शिशु के जन्म के बाद पीठ दर्द, सर दर्द आदि जैसे रोगों से हमेशा पीडत रहेगी. जिसका इलाज़ कोई भी डॉक्टर नही क्र पायेगा.

आपसे हम ये कहना चाहते हैं कि अगर आप 24 बर्तन भी खरीद लें तो इससे एक कुम्हार की ज़िन्दगी में सुधर आजायेगा और आपके घर का बजट कम हो जाएगा और आपके भोजन की क्वालिटी अच्छी हो जाएगी. हमने एक दिन हिसाब निकाला कि भारत में 15000000 कुम्हार है और 200000000 परिवार हैं. इस देश में अगर हर परिवार 2,2 हांडिया खरीद ले 1,1 तवा खरीद ले, तो ये समझ लीजिये कि एक करोड़ 50 लाख कुम्हारों की जिंदगी हमेशा के लिए खुशहाल हो जाएगी.

जब राजीव जी जलधर गये थे तो वहां उन्होंने तीन तरह के तवे देखे जिसमे एक था काली मिट्टी का तवा, दूजा था लाल मिट्टी का तवा और पीली मिट्टी का तवा. जब उन्होंने कुम्हारों से तीनो में फर्क पुछा तो उन्होंने बताया की काली मिट्टी का तवा मक्की की रोटी के लिए अच्छा रहता है, जबकि लाल मिट्टी का तवा गेंहू की मिट्टी के लिए अच्छा रहता है और पीली मिट्टी का तवा बाजरे की रोटी के लिए अच्छा रहता है.तो दोस्तों हमसे ज्यादा समझदार तो हमारे देश के कुम्हार है जो बिना पढ़े लिखे भी मिट्टी के महत्व को खूब अच्छे से समझते हैं.

हमारी यह इच्छा है करोड़ों लोगों को रोजगार मिले और आपके किचन का थोड़ा रंग रूप बदल सकें. एक छोटी सी बात शेयर करना चाहते है कि थोड़े दिन पहले राजीव जी जब  मद्रास गये थे. तो मद्रास में बहुत बड़ा ग्रुप है. जिसका नाम है TVS, जो मोटरसाइकिल बनाती है. जैसे Hero Honda हमारे उत्तर भारत का बड़ा ग्रुप है, वैसे ही दक्षिण भारत का TVS ग्रुप है. उनके साल भर का टर्नओवर दो से ढाई लाख करोड़ का रहता है. तो उनके घर के किसी सदस्य ने राजीव जी की कोई CD सुनी. सीडी सुनने के बाद उन्होंने राजीव जी को डिनर पर इनवाइट किया. तो जब राजीव जी उनके घर डिनर के डिनर के लिए गये  तो वह वहां का माहोल देख कर एकदम हैरान रह गये. उनके रसोई में सारे बर्तन मिट्टी के थे. घड़ा, तवा मिट्टी, हांड़ी, आटा गुथने के लिए जो थाली होती है ना परात वह सब कुछ मिट्टी के थे. राजीव जी ने उनके घर की मालकिन से पूछा कि “ ढाई लाख करोड़ का एंपायर आप संभालती हैं. पति-पत्नी दोनों मिलकर काम करते हैं, इतना बड़ा एंपायर संभालती है. मिट्टी के बर्तन में दाल पकाने का समय कब मिलता है?”

उनका जो उत्तर था उसे सुनकर राजीव जी दंग रह गये. उन्होंने कहा, “ मिस्टर दीक्षित दुनिया में हेल्थ से ज्यादा महत्वपूर्ण कुछ नहीं होता. अगर दुनिया में हम अपनी हेल्थ मेंटेन नहीं कर सकते तो यह ढाई लाख करोड़ किसी काम की नहीं है. अगर हम बीमार पड़ते हैं डॉक्टरों के पास जाते हैं हजारों करोड़ इधर-उधर कम आते हैं तो वह किसी काम का नहीं है. और अगर मिट्टी के बर्तनों का इस्तेमाल करके हमारी हेल्थ सुरक्षित है और हमको सालों-साल डॉक्टर के पास जाना नहीं पड़ता, दवा खानी नहीं पड़ती है तो इससे अच्छा क्या सौदा है?”

ये सुनकर राजीव जी बोले कि इतना समय कैसे निकालते हैं तो उन्होंने कहा कि “मैनेज करती हूं. इधर दाल चढ़ा दिया उधर सब्जी चढ़ा दिया. मुझे दूसरे काम में फाइल साइन करनी है वह सब मैनेज करती हूं तो मैनेजमेंट का हे यह सारा किस्सा है.” तब उन्हें समझ में आया कि हम यह बहानेबाजी कि हमारे पास समय नहीं है. दुनिया में हर काम हो सकता है अगर सच्चे दिल से हम करने की ठान लें तो.

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