अब चुटकियों में ठीक हाेंगे पैरों के छाले, अपनाएं ये असरदार टिप्स

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नए जूतों को पहनने से कई बार पेरों में छालों की समस्या हो जाती है, जिसका दर्द कुछ लोगों के लिए असहनीय हो जाता है। आपको पता होना चाहिए कि यह छाले अक्सर तब होते हैं जब त्वचा रगड़, धूप और धूल-मिट्टी का सामना करती है। यदि आपके साथ भी ऐसा है तो आज हम आपको कुछ टिप्स बताने जा रहे हैं, जो आपके छालों की समस्या को झटपट दूर कर देंगे।

1- छालों को जानें – आपको पता होना चाहिए कि छाले अक्सर तब विकसित होते हैं जब त्वचा रगड़, धूप, मिट्टी और धूल का सामना करती है. ऐसे कारक तब मौजूद होते हैं जब आप हाइकिंग, जिमनास्टिक या स्केटिंग कर रहे हैं, ख़ासकर अनुचित जूते अथवा मोजों के साथ. ये लगातार बहुत ज़्यादा समय के लिए, नये जूते पहनने के कारण उभरते हैं, इसलिए जूते सख़्त और कष्टदायी बन जाते हैं. आपकी मुलायम कोमल त्वचा की तुलना में, इसका कोई मेल नहीं है.

2- इन उपायों का पालन छालों से बचने और उन्हें बढ़ने से रोकने के लिए करें –

  • अगर हो सके तो अपने नये जूतों का इस्तेमाल करने से पहले उन्हें पहन के चलने का अभ्यास करें ताकि आपके जूतों को आपके पैरों के नाप के अनुरूप होने का मौका मिले, और आपके पैर को ग़लत तरीके से घिसे जाने के अनुकूल होने का एक मौका मिले.
  • ऐसे हाइकिंग बूट या असुविधाजनक जूतों को निकाल दें जिनके कारण पैरों में गरम निशान बनते हैं, जल्द ही ये निशान छाले में बदल जाता है.
  • कोशिश करें कि आपके पैर शिथिल हो जाएँ और अच्छे से सूख जाएँ.
  • अगर आप आमतौर पर चलते रहते हैं तो ऐसे स्थान को, जो कि बाद में छाला बन सकता है, मोलस्किन (moleskin) या ज़िंक ऑक्साइड टेप या पट्टी-या फिर किसी भी ऐसी चीज़ से ढक देना चाहिए जो उस पर गर्मी और रगड़ को कम कर सके.

3- पैर में बने छाले का उपचार :- 

छाले के आस पास के स्थान को गरम पानी और साबुन से साफ करें. एंटी-बॅक्टीरियल लेप को मिलाने पर विचार करें.

छाले को फोड़ें या ना फोड़ें. आपको तय करना है कि आप छाले को खुद ठीक होने देना चाहते हैं या उसका पानी निकाल देना चाहते हैं. आमतौर पर, अगर छाला चलने में दर्द नहीं कर रहा है, तो उसे अपने आप ठीक होने देना चाहिए.

अगर आपको लगता है कि छाला ठीक नहीं हो सकता, तो उसका पानी निकाल देना ही बेहतर है. सबसे पहले सुई को गरम पानी या अल्कोहॉल में कीटाणुरहित बनायें, या फिर पहले से कीटाणुरहित हाइपोडर्मिक चिकित्सा सुई का इस्तेमाल करें.

बुलबुले को फोड़ दें. सुई को ध्यान से छाले के तले और बगल में घुसायें. पानी को बाहर आने दें.

छाले को ढकने वाली खाल को ना हटायें, इससे से संक्रमण हो सकता है.

छाले वाले स्थान को कीटाणुरहित बनायें. छाले वाले स्थान पर थोड़ा सा पोविडोन-आइयोडिन एंटीसेपटिक लगायें. इससे थोड़ी जलन होगी, ख़ासतौर से अगर ठंडा स्प्रे लगाया जाए, लेकिन इससे ये सुनिश्चित हो जाएगा कि अब जब वो जगह खुल चुकी है उसमें संक्रमण नहीं होगा.

छाले वाली जगह को ढंक दें. महीन धागे वाली पट्टी, प्लास्टर, मोलस्किन या दूसरे किसी बचाव का इस्तेमाल करें. कोशिश करें कि जहाँ हो सके आप कम चिपकने वाली या बिल्कुल न चिपकने वाली मरहम पट्टी का इस्तेमाल करें, इससे बिना अंदर की खाल को छेड़े, पट्टी को बदलने में आसानी होगी.

छाले को ठीक होने दें. किसी भी तरह की पट्टी को हटा दें, और ये ध्यान में रखें कि घाव वाले अंग को जितना हो सके खुला छोड़ दिया जाए.

चोट पर दबाव ना डालें. अगर आप उन्ही कार्यों को करना चाहते हैं जिसके कारण छाला हुआ था, तो पहले थोड़ी मात्रा में आयोडीन एंटीसेपटिक लगायें, न चिपकने वाली मरहम पट्टी से उस जगह को बंद कर दें और उसे मज़बूत टेप से चिपका दें जैसे कि ज़िंक ऑक्साइड. ऐसा करने से संक्रमण नहीं होगा, और उस जगह को भविष्य में फिर से रगड़ने से बचाव मिलेगा.

डक्ट टेप का इस्तेमाल ना करें! डक्ट टेप इंसानी त्वचा पर इस्तेमाल के लिए नहीं होता है और ऐसा करने से छाला फिर से खराब हो सकता या फिर उसके आस पास की जगह पर बुरा असर हो सकता है. सोचिए कि छाले वाली खाल को कसकर पकड़ा गया है और उसे प्लास से छीला जा रहा है. डक्ट टेप आपकी त्वचा के साथ ऐसा ही करेगा.

सफाई बनाए रखें. छाले को रोज़ जाँचें और उसे हमेशा सॉफ रखें, उस पर जब ज़रूरत पड़े आयोडीन एंटीसेपटिक लगायें.

सलाह :- 

कोशिश करें कि आप छाले को ढंकने वाली त्वचा को न निकालें. यह स्वाभाविक रूप से अंदर की अनिर्मित त्वचा की रक्षा करती है. अगर आप अशुद्ध त्वचा को निकलना चाहते हैं तो उसे कीटाणुरहित कैंची या चिकित्सकीय छुरी से निकालें. अशुद्ध त्वचा को न खीचें (ऐसा करने से बहुत ज़्यादा दर्द होगा).

एलो वेरा भी छाले ठीक करने का एक प्रभावी उपाय है. छाले वाली जगह पर तोड़ा सा एलो वेरा घिसें और ये कुछ दिनों या एक हफ्ते में ठीक हो जाएगा.

एक ब्लिस्टेर प्लास्टर खरीद कर उसे छाले पर लगाना भी एक दूसरा उपचार है. ये चिकित्सकीय होता है और ये जल्दी सूख जाता है, जिससे आपको आगे कुछ करने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी, लेकिन ये प्लास्टर कभी कभी बाद के लिए ठीक नहीं होता है और टूट सकता है या फिर अलग हो सकता है, जिसके कारण अगर रगड़ा जाए तो त्वचा को नुकसान हो सकता है.

धागे को छाले में से डालने का उपाय न इस्तेमाल करें. आजकल इसका उपयोग या इसे सिखाया नहीं जाता, क्यूंकी ये प्रभावशाली नहीं होता है और इससे बहुत जल्द संक्रमण फैल सकता है.

कुछ भी गंदा इस्तेमाल न करें. जब आप करेंगे, तो इससे और ज़्यादा संक्रमण फैलेगा.

कुछ समय के लिए चालों पर न चले, वो अभी भी दर्द करेगा क्यूंकी वो ठीक हो रहा है, इसलिए अगर आप खेलना चाहते हैं तो ये स्पष्ट कर लीजिए कि छाला पूरी तरह ठीक हो चुका है. अगर छाला दर्द नहीं कर रहा है लेकिन अभी भी घाव है तो खेलने के बारे में सोचना सही विकल्प नहीं है. आपको चोट लग सकती है या फिर एक और छाला हो सकता है.

चेतावनी :- 

छाले में छेद करने के लिए जो उपकरण इस्तेमाल हो रहा है उसे कीटाणुरहित बनाने के लिए माचिस का इस्तेमाल न करें- आग धातु की परत को ऑक्सीडाइज़ करके उसपे काला, सांवला कण छोड़ देती है जिससे संक्रमण हो सकता है.

अपने घावों को साफ रखें. डेटोल से उसे धोयें या किसी भी कीटाणुनाशक मिश्रण से जो निजी प्रयोग की लिए हो.

अगर पैर के छाले में खून भरा है, तो चोट बहुत ज़्यादा गंभीर है और ये कुछ केशिकाओं पर असर कर सकते हैं. ऐसे चालों का पानी निकालते समय बहुत सावधानी बरतनी पड़ेगी, क्यूंकी ऐसे मामलों में ऊतकों में संक्रमण फैल सकता है.

अगर छाले में से बहुत ज़्यादा पस निकल रहा हो, उससे बदबू आने लगे, या फिर वो लाल हो जाए, तो छाला शायद संक्रमित हो गया है. आपको डॉक्टर के पास जाना चाहिए.

अन्य फायदेमंद टिप्सः-

– छालों की ऊपरी परत की त्वचा को निकाले बिना इस पर एंटीसेप्टिक क्रीम लगाएं।

– सेब का सिरका एक बहुत ही शक्तिशाली एंटीबैक्टीरियल तथा एंटीफंगल घटक होता है। इसलिए सेब से बने सिरके को शुद्ध अरंडी के तेल में अच्छी तरह मिलाकर पेरों पर लगाएं। इससे छालों में काफी आराम मिलेगा।

– छालों को दिन में एक बार 15 मिनट के लिए गर्म पानी में डुबोकर रखें। ऐसा करने पर छालों से धीरे-धीरे द्रव्य बाहर निकलेगा और ये जल्दी ठीक हो जाएंगे।

– दिन में 2-3 बार छालों पर एलोवेरा का गूदा लगाएं, इससे छाले भी ठीक होंगे और स्किन पर किसी तरह का दाग भी नहीं रहेगा।

– थोडा सा दलिया लेकर उसका चूरा बनाकर एक कपडे में बांध लें। अब इसे छालों पर लगाकर कुछ समय के लिए छोड़ दें और बाद में गुनगुने पानी से धो लें।

– छालों में खून आने पर बर्फ का प्रयोग करें। ये रक्त के थक्के को जमाएगा और खून के तुरंत रोकने में मदद करेगा।