कपास की खेती में नई क्रांति लाएगी बैटरी से चलने वाली कपास चुनने की मशीन

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तीन आदमियों का काम अकेले व पूरी सफाई से करने वाली बेटरी चलित कपास चुनने की मशीन कृषि मेले में आकर्षण का केन्द्र बिन्दु बनी हुई है। कृषि विभाग के स्टाल पर एमपी एग्रो द्वारा प्रदर्शित इस मशीन को कपास लगाने वाले कृषक देखकर उसकी कार्यप्रणाली को समझ रहे है। जिला मुख्यालय के मण्डी प्रांगण में शुक्रवार से प्रारंभ हुये कृषि मेले में शनिवार को भी कपास चुनने की मशीन ने कृषकों का ध्यान अपनी तरफ आकर्षित किया है। कृषि विभाग के स्टाल पर प्रदर्शित इस मशीन की वास्तविक कीमत 6318 रूपये है, जबकि किसानों को यह मशीन शासन द्वारा 75 प्रतिशत अनुदान पर अर्थात मात्र 1580 रूपये पर उपलब्ध कराई जा रही है।

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इसी प्रकार मेले के दौरान कृषकों द्वारा यह बताने पर कि कृषि विभाग द्वारा 90 प्रतिशत अनुदान पर दिये गये शंकर मक्के के बीज ने उनके खेतों में रिकार्ड तोड़ उत्पादन दिया है। किसानों की इस प्रशंसा के बाद मेले परिसर में उन्नत खेती के लिये शंकर बीज उत्पादन करने वाली कम्पनियों के स्टालों पर किसानों का भारी हुजुम देखने को मिल रहा है। सभी किसान विभिन्न कम्पनियों के शंकर मक्के से उत्पादित भुट्टे का आकार-प्रकार-वजन परख कर अगले वर्ष अपने खेत में कौन सी कम्पनी का मक्का लगायेंगे यह मन बनाने में लगे है।  और इस कार्य में उनकी मदद कृषि मेले में आये वैज्ञानिक उनके प्रश्नो का समाधान कर, कर रहे है।

मेले के द्वितीय दिवस इन्दौर कृषि कालेज से आये वैज्ञानिक डॉ. भारज व डॉ. ताम्बे ने किसानों को जैविक खेती से होने वाले लाभ, गर्मी के दौरान खाली पड़े खेतों में गहरी जुताई से किस प्रकार कामलिया कीट व दीपक का नियंत्रण होता है उसके बारे में विस्तार से बताया।

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