ऑस्टियोपोरोसिस यानी हड्डियों का कमजोर होना, और टूटना ये समस्या पुरुषो से ज्यादा महिलाओं में होती है

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ऑस्टियोपोरोसिस हड्डियों में होने वाली समस्या है, जिसमें हड्डियों का बीएमडी (Bone Mineral Density) लेवल कम हो जाता है, जिससे हड्डियों के टूटने का खतरा बढ़ जाता है. ऑस्टियोपोरोसिस में हड्डियां पतली या खोखली होकर कमजोर हो जाती हैं. हड्डी में दर्द अब बड़ी समस्या बनता जा रहा है. बदलते लाइफ स्टाइल और खानपान में लापरवाही के कारण कमजोर हो रही हड्डियां एक समय के बाद परेशानी पैदा करने लगती हैं. कई लोगों में यह समस्या हड्डियों में फ्रैक्चर तक पहुंच जाती है, जिसे ओस्टियोपोरोसिस कहा जाता है. जानिये आप कैसे बच सकते हैं इस समस्या से.

क्या है ओस्टियोपोरोसिस : एक प्रकार की बीमारी है, जिसमें हड्डियां काफी कमजोर हो जाती हैं और उनमें फ्रैक्चर आना शुरू हो जाता है. इसमें हड्डियों में सिकुड़न और अस्थिमजा्जा की मात्र में कमी आ जाती है. यही वजह है कि हड्डियां काफी कमजोर हो जाती हैं और उनमें फ्रैक्चर की समस्या बढ़ जाती है. गौर करने वाली बात है कि इस बीमारी का प्रभाव हिप(नितंब), रीढ़ की हड्डी और कलाई की हड्डियों पर सबसे ज्यादा होता है.

जीवन को करता है प्रभावित : हड्डियों में दर्द की शिकायत. शारीरिक तौर पर सक्रियता में कमी आने लगती है, जिससे मरीज डिप्रेशन में भी आ जाता है. काम करने की क्षमता में आती है गिरावट. देखभाल करने वाले की परेशानी बढ़ जाती है. शारीरिक-मनोवैज्ञानिक क्षमता में कमी आती है.

क्या हैं लक्षण : अचानक से बैक पेन, बैक पेन में आगे-पीछे मुड़ने में तकलीफ, हड्डियों में हमेशा दर्द रहता हो, शरीर के वजन में कमी आना, लंबाई में कमी आ जाना.

क्या है वजहें : शरीर में विटामिन डी और कैल्शियम की कमी से हड्डियां कमजोर हो जाती है और इसी वजह से हड्डियों में फ्रैक्चर होते हैं. इसलिए भोजन में पर्याप्त मात्र में विटामिन डी और कैल्शियम की मौजूदगी जरूरी है. कम एक्सरसाइज करना और अधिक दिनों तक बेड रेस्ट करने से भी ओस्टियोपोरोसिस हो सकता है. अधिक अल्कोहल का सेवन करना और सिगरेट अधिक पीना हड्डियों में फ्रैक्चर की आशंका बढ़ा देता है. धूप से दूर रहने से भी विटामिन डी की कमी हो सकती है.

क्या है इलाज : विटामिन डी और कैल्शियम युक्त खाना खाएं. डॉक्टरों की बताई गई बोनफ्रैंडली एक्सरसाइज नियमित रूप से करें. वर्टिकल फ्रैक्चर में पीठ की मांसपेशियों को मजबूत करने वाली एक्सरसाइज करें. फिजियोथेरेपी में जो मरीज मेडिकल थेरेपी से बचना चाहते हैं, वो बैलून केफोप्लास्टी जैसी विधि अपना सकते हैं. लेकिन इसमें यह ध्यान रखें कि खासकर स्पाइनल डिसऑर्डर होने पर न्यूरो या स्पाइन के डॉक्टर से ही मिलें.

खास बातें : ओस्टियोपोरोसिस की बीमारी पुरुषों की तुलना में महिलाओं में अधिक होती है. बढ़ती उम्र के साथ रोग की आशंका बढ़ती है. कम लंबी और पतली-दुबली महिलाओं में हड्डियों में फ्रैक्चर होने का खतरा अधिक होता है. परिवार के किसी सदस्य में अगर यह समस्या रही है तो अन्य सदस्यों में भी ओस्टियोपोरोसिस होने की आशंका रहती है. कुछ दवाइयां ओस्टियोपोरोसिस को बढ़ा देती हैं, इसलिए डॉक्टरी सलाह के बिना कोई दवा न खाएं.

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