शायद आप यह नहीं जानते होंगे कि कच्चा दूध स्वास्थ्य के लिए फायदे से कई गुना हानिकारक भी है

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दूध सेहत के लिए बड़ा ही गुणकारी होता है. शायद आप यह नहीं जानते होंगे कि कच्चा दूध स्वास्थ्य के लिए फायदे से कई गुना हानिकारक भी है. एक नए शोध में यह बात सामने आई है कि पाश्चुरीकृत दूध की तुलना में कच्चा दूध पीने से खाद्य जनित बीमारियों के होने का खतरा 100 गुना तक बढ़ सकता है. सीएलएफ रिपोर्ट के अनुसार पाश्चुरीकृत दूध पीने की तुलना में कच्चा दूध घातक है. दूध से बने खाद्य पदार्थों को भले ही स्वास्थ्य के लिए बेहतर माना जाता हो लेकिन यदि यह कच्चा हुआ तो यह आपके लिए खतरनाक साबित हो सकता है.

वैज्ञानिकों के मुताबिक कच्चे दूध से बने खाद्य पदार्थों के सेवन से मनुष्य में ना केवल संक्रमण की वजह से उल्टी, दस्त व बुखार होता है बल्कि जूनोसिस बीमारियों की चपेट में भी आ जाता है. इतना ही नहीं बुसेल्लोसिस या टीबी भी हो सकती है और गर्भवती महिलाओं के लिए गर्भपात का खतरा भी होता है.उबला दूध होता है स्वास्थवर्धकजॉन हॉपकिंस विश्वविद्यालय के सेंटर फॉर ए लिवेबल फ्यूचर (सीएलएफ) के अनुसार उबला दूध पीने की तुलना में कच्चा दूध पीने से खाद्य जनित बीमारी होने का खतरा खासा बढ़ जाता है. शोधकर्ताओं के मुताबिक, हाल के दिनों में कच्चा दूध पीना अधिक लोकप्रिय हो गया है. लेकिन कच्चे दूध की तुलना में पाश्चुरीकृत दूध अधिक स्वास्थवर्धक, साफ, स्वादिष्ट और शरीर में लैक्टोस की क्षमता को घटाने वाला होता है.

जांच में यह तथ्य आए सामनेअध्ययन में पाया गया कि कच्चे दूध में पाया जाने वाले माइक्रोबियल में एशचेरीचिया कोली ओ 157-एच 7 के साथ संक्रमणकारी सालमोनेला, कैंपीलोबेक्टर और लिस्टेरिया पाया जाता है. ये जीवाणु मनुष्यों में, विशेष रूप से बच्चों, गर्भवती महिलाओं और व्यस्कों में खाद्यजनित बीमारियों का कारण बनते हैं. क्या है जूनोसिसरोगग्रस्त पशुओं व मनुष्यों से स्वस्थ पशुओं व मनुष्यों में फैलने वाले संचारी रोगों को अंग्रेजी में जूनोसिस कहते हैं. इसे पशु-जनित व पशुजन्य रोग भी कहते हैं. ऐसा माना जाता है कि पाश्चुरीकृत दूध की तुलना में कच्चे दूध में अधिक प्राकृतिक एंटीबॉडी, प्रोटीन और जीवाणु होते हैं.

उबला दूध होता है स्वास्थवर्धक जॉन हॉपकिंस विश्वविद्यालय के सेंटर फॉर ए लिवेबल फ्यूचर (सीएलएफ) के अनुसार उबला दूध पीने की तुलना में कच्चा दूध पीने से खाद्य जनित बीमारी होने का खतरा खासा बढ़ जाता है. शोधकर्ताओं के मुताबिक, हाल के दिनों में कच्चा दूध पीना अधिक लोकप्रिय हो गया है. लेकिन कच्चे दूध की तुलना में पाश्चुरीकृत दूध अधिक स्वास्थवर्धक, साफ, स्वादिष्ट और शरीर में लैक्टोस की क्षमता को घटाने वाला होता है. जांच में यह तथ्य आए सामने अध्ययन में पाया गया कि कच्चे दूध में पाया जाने वाले माइक्रोबियल में एशचेरीचिया कोली ओ 157-एच 7 के साथ संक्रमणकारी सालमोनेला, कैंपीलोबेक्टर और लिस्टेरिया पाया जाता है. ये जीवाणु मनुष्यों में, विशेष रूप से बच्चों, गर्भवती महिलाओं और व्यस्कों में खाद्यजनित बीमारियों का कारण बनते हैं.
क्या है जूनोसिस रोगग्रस्त पशुओं व मनुष्यों से स्वस्थ पशुओं व मनुष्यों में फैलने वाले संचारी रोगों को अंग्रेजी में जूनोसिस कहते हैं. इसे पशु-जनित व पशुजन्य रोग भी कहते हैं. ऐसा माना जाता है कि पाश्चुरीकृत दूध की तुलना में कच्चे दूध में अधिक प्राकृतिक एंटीबॉडी, प्रोटीन और जीवाणु होते हैं.

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