पाइल्स यानि बवासीर, इसमें दर्द के साथ बहुत परेशानी भी होती है, जानिये इसकी हर स्टेज और इलाज

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आजकल का खानपान और रहन-सहन बहुत बदल गया है, जो बहुत घातक सबित भी हो रहा है, जिस कारण बहुत सी बीमारियों ने हमारे शरीर में घर बना लिया है, जिनमे से एक है, पाइल्स यानि बवासीर. बवासीर तब होती है जब गुदा और मलाशय की नसों में किसी कारण बस सूजन और इन्फ्लामेशन होने लगता है. बवासीर में मरीज के गुदा द्वार में मस्से हो जाते हैं जिनमे निरंतर खून बहने और अत्यधिक दर्द होने कारण मरीज काफी कमजोर और दुखी हो जाता है. बवासीर के 2 प्रकार होते हैं बाहर की बवासीर और अन्दर की बवासीर.

बाहर की बवासीर में patient के गुदा द्वार के आसपास मस्से होते हैं जिनमे दर्द तो नहीं होता लेकिन खुजली होती है. उन मस्सों को अधिक खुजलाने की वजह से उनमें से खून भी आने लगता है. अन्दर की बवासीर में गुदा के अन्दर मस्से होते हैं, और मल करते समय जोर लगाने पर रोगी को बेहद तेज दर्द होता है और खून भी बाहर आने लगता है. पाइल्स आमतौर पर पेट की खराबी, कब्ज या ज्यादा बैठे रहने की वजह से होते हैं. इसकी चार स्टेज होती हैं. पहली या दूसरी स्टेज पर अगर ध्यान दे दिया जाए तो इसे सीरियस प्रॉब्लम होने से बचाया जा सकता है.

ये हैं पाइल्स की 4 स्टेज :-
स्टेज 1 : यह शुरुआती स्टेज होती है. इसमें कोई खास लक्षण दिखाई नहीं देते. कई बार मरीज को पता भी नहीं चलता कि उसे पाइल्स की प्रॉब्लम है. मरीज को कोई खास दर्द महसूस नहीं होता. बस हल्की सी खुजली महसूस होती है. जोर लगाने पर कई बार हल्का खून आ जाता है. इसमें पाइल्स एनस के अंदर ही होते हैं.
स्टेज 2 : दूसरी स्टेज में टॉयलेट करते वक्त मस्से बाहर की ओर आने लगते हैं. पहली स्टेज के मुकाबले इसमें थोड़ा ज्यादा दर्द महसूस होता है और जोर लगाने पर खून भी आने लगता है.

स्टेज 3 : यह स्टेज थोड़ी सीरियस हो जाती है क्योंकि इसमें मस्से एनस के बाहर की तरफ रहते हैं. इस स्टेज में मरीज को बहुत तेज दर्द महसूस होता है. दस्त के साथ खून भी ज्यादा आता है.
स्टेज 4 : यह स्टेज 3 की और ज्यादा एडवांस और सीरियस स्थिति होती है. इसमें मस्से एनस के बाहर की ओर लटक जाते हैं. बहुत ज्यादा दर्द होता है और खून भी निकलता रहता है. इन्फेक्शन फैलने के चांस बढ़ जाते हैं. बवासीर को मेडिकल में piles या hemorrhoids कहा जाता है. यह बीमारी ज्यादातर 45 से 65 के बीच की उम्र के लोगों को होती हैं.

बर्फ : बवासीर में बर्फ का इस्तेमाल करना सबसे आसान और फायदेमंद होता तरीका होता है. यह गुदा में ब्लड वेसल्स को सिकोड़ देता है, सूजन को कम करता है और दर्द में तुरंत आराम प्रदान करता है. एक साफ कपड़े में बर्फ के टुकड़ों को बांध लें और अपने गुदा के मस्सों पर 10-15 मिनट के लिए रखें. इसे दिन में कई बार करें जब तक कि बवासीर पूरी तरह से ठीक न हो जाये. आप बर्फ को बिना कपड़े के सीधे भी लगा सकते हैं.

एलोवेरा : बवासीर के इलाज में एलोवेरा प्रकृति की सबसे कारगर सामग्रियों में से एक है. एलोवेरा में एंटी-इन्फ्लामेट्री और चिकित्सकीय गुण होते हैं, जो बवासीर की जलन, दर्द और खुजली को कम करने में मदद करते हैं. एलोवेरा को अन्दर और बाहर, दोनों प्रकार की बवासीर में इस्तेमाल किया जा सकता है. बाहर की बवासीर होने पर एलोवेरा जेल को अपने गुदा में लगायें और धीरे-धीरे मालिश करें. इससे दर्द और जलन में राहत मिलेगी. अन्दर की बवासीर होने पर एलोवेरा की पत्तियों को स्ट्रिप्स में काटें. अब इन्हें ठंडा होने के लिए फ्रिज में रख दें. अब इन ठंडी एलोवेरा की स्ट्रिप्स को अभावित क्षेत्र में लगायें.

नींबू का रस : नींबू के रस में रक्त कोशिकायों की दीवारों को मजबूत बनाने वाले पदार्थ पाए जाते हैं जिससे बवासीर को बढ़ने से रोकने में मदद मिलती है. एक रुई के टुकड़े को ताजा नींबू के रस से भिगो लें और मस्सों पर लगायें. शुरुआत में इससे हल्की-हल्की जलन महसूस होगी लेकिन बाद में दर्द से काफी आराम मिलेगा. एक कप दूध में आधा नींबू निचोड़ कर सेवन करें. ऐसा हर तीन घंटे में करें. रोज डेढ़-डेढ़ चम्मच नींबू, अदरक और  पुदीना के रस को दो चम्मच शहद में मिलाकर सेवन करें.

बादाम का तेल (Almond Oil) : बादाम के तेल में ठंडक प्रदान करने वाले और डीप टिश्यू अवशोषण के गुण होते हैं, जो बाहर की बवासीर में आराम प्रदान करने में काफी मदद करते हैं. रुई के टुकड़े को बादाम के तेल में भिगोकर प्रभाविउट क्षेत्र में लगायें. यह ऊतकों को नमी प्रदान करता है, इन्फ्लामेशन को कम करता है और दर्द व जलन को ठीक करता है. इसको दिन में तीन-चार बार इस्तेमाल करें.

जैतून का तेल (Olive Oil) : जैतून के तेल में एंटी-इन्फ्लामेट्री और एंटी-ऑक्सीडेंट प्रॉपर्टीज होती हैं और अक्सर इसका इस्तेमाल बाहरी बवासीर के इलाज में किया जाता है. यह रक्त कोशिकाओं के लचीलेपन (इलास्टिसिटी) को बढ़ाने में मदद करता है जिससे उनको सिकुड़ने में मदद मिलती है और सूजन कम हो जाती है. इसमें मोनो-सैचुरेटेड फैट्स भी होते हैं जो उत्सर्जन तंत्र (excretory system) की कार्यक्षमता को बढ़ाते हैं. एक चम्मच जैतून के तेल का सेवन करें. बेर के पेड़ की पत्तियों को पीसकर उसका जूस निकाल लें और इसमें बराबर मात्रा में जैतून का तेल मिला लें. अब इस मिश्रण को अपने मस्सों पर लगायें. इससे आपको सूजन और दर्द में राहत मिलेगी.

साबुत अनाज : यदि आपको बवासीर है तो आज से नियमित साबुत अनाज का सेवन करना शुरू कर दें. साबुत अनाज से बने प्रोडक्ट्स में भरपूर मात्रा में फाइबर होता है, जो बवासीर के लक्षणों और ब्लीडिंग को ठीक करने में काफी कारगर होता है. यह न्यूट्रिएंट जठरांत्र प्रणाली (gastrointestinal system) को साफ करता है, कब्ज को रोकता है और पेट को ठीक से काम करने में मदद करता है. फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ मल को नरम बनाते हैं जिससे मल त्यागने के दौरान दबाव कम होता है. साबुत अनाज के सबसे अच्छे प्रोडक्ट्स हैं जई (oats), जौ (barley), मक्का (maize), भूरा चावल (brown rice), बाजरा (millet) और मोथी (buckwheat).

सेब का सिरका (एप्पल साइडर : सिरका में भी बंधनकारी गुण (astringent properties) होते हैं जो सूजी हुई रक्त वाहिकाओं को सिकोड़ने में मदद करते हैं और सूजन और जलन में आराम प्रदान करते हैं. यह बाहरी और अंदर, दोनों प्रकार की बवासीर में फायदेमंद होता है. अच्छे रिजल्ट्स पाने के लिए बिना फिल्टर किये हुए और बिना जमाये हुई एप्पल साइडर विनेगर का ही इस्तेमाल करें.

बाहर की बवासीर होने पर, एक रुई के टुकड़े को सेब के सिरका से भिगोयें और मस्सों पर रख दें. शुरुआत में इससे थोड़ा चुभन का अनुभव हो सकता है, लेकिन बाद में आपको जलन और खुजली में काफी राहत मिलेगी.
अन्दर की बवासीर होने पर, एक गिलास पानी में एक चम्मच सेब का सिरका मिलाकर सेवन करें. इसका सेवन रोज दो बार करें. स्वाद बढ़ाने के लिए आप इसमें शहद भी मिला सकते हैं.
पानी : बवासीर होने पर आप अपने पानी के सेवन की मात्रा को बढ़ा दें. रोज कम से कम 8-10 गिलास पानी पीने की कोशिश करें.
पर्याप्त मात्रा में पानी पीने से इंटरनल सिस्टम साफ होता है और बॉडी हाइड्रेट रहती है. यह मल को भी नरम बनता है जिससे दबाव कम होता है.

बवासीर के अन्य आयुर्वेदिक घरेलु उपचार : 2 लीटर छाछ में थोड़ी सी अजवाइन और जीरा मिलकर पी जाएँ, इसके नियमित सेवन से बवासीर धीरे धीरे ख़त्म हो जाती है, गुड को जिमीकंद के साथ मिलकर नियमित सेवन करें. इसके सेवन से भी बवासीर पर नियंत्रण रखा जा सकता है, मल, मूत्र और gas आने पर उसको ज्यादा समय तक पेट में रोककर न रखें. इससे भी बवासीर होता है, आयुर्वेदिक के अनुसार तिल (sesame) के लड्डू को खाने से भी बवासीर ख़त्म होता है, तरल खाद्य पदार्थों का सेवन अधिक करें जैसे सूप, नारियल पानी (coconut water), पानी, लस्सी, छाछ आदि. इनके अधिक सेवन से मल तरल हो जाता है और मल त्यागते समय तकलीफ नहीं होती, दूध को उबालकर उसमे पके केले को मसलकर डाल दें और घोल तैयार कर लें.

इसको दिन में 2 से 3 बार सेवन करें, चुकंदर का रस (beetroot juice), पालक का रस (spinach juice) और गाजर का रस (carrot juice) को रोज पियें, रोजाना बवासीर वाली जगह पर नीम का तेल लगायें, कभी फायदा होगा, शलजम, मेथी, करेला, गाजर, प्याज और अदरक का नियमित सेवन करें, लगातार 3 महीने तक रोज सुबह जामुन का सेवन करें, लाभ मिलेगा, मूली के नियमित से भी बवासीर रोग ख़त्म होता है, पुदीना, अदरक, निम्बू का रस और शहद को पानी में मिलकर रोज सेवन करें.

बवासीर से बचे रहने के उपाय : आम, पपीता और अंगूर का नियमित सेवन करने से बवासीर नहीं होता, तनाव (stress) से दूर रहें और हमेशा खुश रहें, आलू और बैंगन का कम सेवन करें, Burger, समोसा, pizza, चाट-पकौड़े आदि fast foods का सेवन न करें, तले भुने मसालेदार खाद्य पदार्थों से भी दूर रहें, धुम्रपान, शराब आदि नशीले पदार्थों से दूर रहें, जो लोग अधिक समय तक लगातार एक ही जगह पर बैठे रहते हैं उनको बवासीर होने की सम्भावना काफी बढ़ जाती है. इसलिए बीच-बीच में टहलें और हल्का व्यायाम करें, कब्ज (constipation) को पैदा करने वाले किसी भी खाद्य पदार्थ से दूर रहें, Doctors के मुताबित अत्यधिक उपवास करने से भी बवासीर हो सकता है. उपवास के दौरान आलू की खिचड़ी का अधिक बवासीर का कारन बन सकता है. इसलिए उपवास कम करें और इसके दौरान बीच-बीच में juice, छाछ, सूप आदि का सेवन करते रहें, रात को जल्दी सोयें और सुबह जल्दी उठें. यदि आपकी बवासीर काफी लम्बे समय से है, उसमें अत्यधिक रक्त निकलता है और ऊपर दिए गए उपचारों को अपनाने के बाद भी फायदा नहीं हो रहा है तो तुरंत डॉक्टर को संपर्क करें.

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