आरक्षण कम करने के लिए प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट

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नागरिक बन्धुओ,
हम दलितों की सहमती से आरक्षण को कम करने का कानूनी ड्राफ्ट प्रस्तावित कर रहे है। हमने इस समस्या के समाधान के लिए अन्य कानूनी ड्राफ्ट भी प्रस्तावित किये है, जिनकी जानकारी के लिए आप किसी भी राईट टू रिकाल कार्यकर्ता से संपर्क कर सकते है। यह स्तम्भ हमारे मुख्य प्रस्ताव के बारे में है । यदि आपको इस प्रस्तुत ड्राफ्ट के स्पष्टीकरण से सम्बंधित किसी भी प्रकार की सहायता की आवश्यकता महसूस होती है, तो कृपया अपने शहर में स्थित किसी भी रिकालिस्ट या राईट टू रिकाल ग्रुप के कार्यकर्ता से संपर्क करें । वे आपको इस ड्राफ्ट को समझने में सहयोग करेंगे । आप संपर्क करने के लिए उन्हें राईट टू रिकाल ग्रुप के फेसबुक समुदाय पर खोज सकते है । आप उन्हें फोन कर सकते है, उनसे मिल सकते है या फेसबुक समुदाय पर उनसे संवाद कर सकते है । यदि आप इस प्रस्तावित ड्राफ्ट का समर्थन करते है तो अपने क्षेत्र के सांसद को SMS द्वारा यह आदेश करें कि इस कानूनी ड्राफ्ट को गेजेट में प्रकाशित किया जाए ।

Right to Recall (20)
======सांसद को भेजे जाने वाले SMS आदेश का ड्राफ्ट का प्रारम्भ======
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Hon MP, I order you to print the law draft mentioned in http://tinyurl.com/AarakshanGhatao
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=====SMS ड्राफ्ट की समाप्ति=====
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सांसद के लिए सूचना
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सांसद महोदय, यदि आपको SMS द्वारा इस क़ानून को गेजेट में प्रकाशित करने के लिए सन्देश प्राप्त होता है तो, इसे सन्देश भेजने वाले मतदाता का आदेश माना जाए न कि इस स्तम्भ के लेखक का ।
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========कानूनी ड्राफ्ट का प्रारम्भ=====
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(1) [प्रधानमन्त्री के लिए निर्देश]
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प्रधानमन्त्री आरक्षित वर्ग के नागरिको के लिए ‘आर्थिक विकल्प’ चुनने की प्रक्रिया के संचालन तथा प्रबंधन के लिए एक सचिव की नियुक्ति करेंगे।
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(2) [तहसीलदार तथा अजा/अजजा/अन्य पिछड़ा वर्ग के नागरिको के लिए निर्देश]
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(2.1) SC/ST/OBC वर्ग का कोई भी नागरिक तहसीलदार कार्यालय में उपस्थित होकर, तीन रू शुल्क का भुगतान कर ‘आर्थिक विकल्प’ के लिए खुद को पंजीकृत करवा सकेगा । यदि प्रार्थी कि आयु 18 वर्ष से कम है तो ‘आर्थिक विकल्प’ चुनने का निर्णय उसकी माता करेगी । यदि किसी व्यक्ति ने आरक्षण का लाभ लेकर नौकरी या शिक्षा प्राप्त की है, तो वह आर्थिक विकल्प चुनने का पात्र नही होगा । कोई व्यक्ति किसी भी दिन अपने आर्थिक विकल्प की पात्रता को बिना कोई शुल्क दिए रद्द कर सकेगा ।
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(2.2) यदि कोई व्यक्ति आर्थिक विकल्प चुनता है, तो वह 100 रू तत्काल तथा हर महीने के अंत में 50 रू प्राप्त करेगा, जब तक कि वह अपने आर्थिक विकल्प के दर्जे को रद्द नहीं कर देता। इस राशि को मुद्रा स्फीति के अनुसार समय समय पर समायोजित किया जाता रहेगा। रूपये का भुगतान हर चार महीने में किया जाएगा ।
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(2.3) यदि व्यक्ति ने अपने आर्थिक विकल्प को रद्द कर दिया है तो वह आरक्षण का लाभ लेने के लिए फिर से आवेदन कर सकेगा । किन्तु यदि उसने आरक्षण का लाभ लिया है तो उसका नाम आर्थिक विकल्प सूची से हटा दिया जाएगा ।
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(3) [प्रधानमंत्री के लिए निर्देश]
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चुने हुए आर्थिक विकल्पों के लिए भुगतान की व्यवस्था हेतु आवश्यक धन संपत्ति कर से अर्जित किया जाएगा, अन्य किसी स्त्रोत से नहीं ।
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(4) [मुख्यमंत्री के लिए निर्देश]
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राज्य सरकारों या उनकी इकाइयों के अधीन ऐसी नियुक्तियों/परीक्षाओं के लिए, जिनमे चयन का आधार लिखित परीक्षा या/और शारीरिक दक्षता परीक्षा या/और अन्य कोई वस्तुनिष्ठ परीक्षा है, के लिए SC/ST/OBC वर्ग के आरक्षित कोटे के प्रतिशत का निर्धारण करने के लिए, SC/ST/OBC वर्ग के नागरिको द्वारा चुने गए आर्थिक विकल्पों के प्रतिशत को SC/ST/OBC वर्ग के कोटे की अधिकतम सीमा में से घटा दिया जाएगा । किन्तु घटायी गयी यह सीमा आरक्षित कोटे के लिए तय अधिकतम सीमा के एक चौथाई से कम नही होगी ।
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स्पष्टीकरण-1 : मान लीजिये कि किसी राज्य में ST वर्ग की जनसँख्या 1 करोड़ तथा इस वर्ग के लिए आरक्षित कोटे की अधिकतम सीमा 14% है । यदि इस राज्य के 1 करोड़ ST वर्ग के नागरिको में से 45 लाख नागरिक आर्थिक विकल्प चुनते है, तो अमुक राज्य के लिए ST वर्ग के लिए लागू आरक्षित कोटा (14 -14×0.45 = 7.7%) 7.7 प्रतिशत होगा । किन्तु यदि 1 करोड़ में से 90 लाख नागरिक आर्थिक विकल्प चुनते है, तब भी आरक्षित कोटा अधिकतम सीमा (14%) का एक चौथाई (14÷4=3.5%) यानी 3.5 प्रतिशत बना रहेगा ।
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स्पष्टीकरण-2 : अनुच्छेद (4) उन पदों की चयन प्रक्रिया पर लागू नही होगा जिन पदों पर नियुक्ति के लिए साक्षात्कार और/या अन्य किसी व्यक्तिनिष्ठ मूल्यांकन को आधार बनाया गया हो ।
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(5) [प्रधानमन्त्री के लिए निर्देश]
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केंद्र सरकार या उनकी इकाइयों के अधीन ऐसी नियुक्तियों/परीक्षाओं के लिए, जिनमे चयन का आधार लिखित परीक्षा या/और शारीरिक दक्षता परीक्षा या/और अन्य कोई वस्तुनिष्ठ परीक्षा है, के लिए SC/ST/OBC वर्ग के आरक्षित कोटे के प्रतिशत का निर्धारण करने के लिए, SC/ST/OBC वर्ग के नागरिको द्वारा चुने गए आर्थिक विकल्पों के प्रतिशत को SC/ST/OBC वर्ग के कोटे की अधिकतम सीमा में से घटा दिया जाएगा । किन्तु घटायी गयी यह सीमा आरक्षित कोटे के लिए तय अधिकतम सीमा के एक चौथाई से कम नही होगी ।
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टी सी पी – जनता की आवाज के प्रावधान :
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(टी सी पी.1) [जिला कलेक्टर के लिए निर्देश]
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यदि कोई नागरिक मतदाता इस क़ानून में कोई संशोधन करना चाहता है तो वह कलेक्टर कार्यालय में उपस्थित होकर शपथपत्र प्रस्तुत कर सकेगा । कलेक्टर 20 रू प्रति पृष्ठ की दर से शुल्क लेकर इसे प्रधानमन्त्री की वेबसाईट पर स्कैन करके दर्ज करेगा और बदले में छपी हुयी रसीद देगा ।
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(टी सी पी.2) [पटवारी/तलाटी के लिए निर्देश]
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यदि कोई मतदाता इस अधिनियम के किसी सेक्शन, अनुच्छेद या धारा में संशोधन चाहता है या टी सी पी की धारा एक के तहत दर्ज किये गए किसी शपथपत्र पर अपनी हाँ या ना दर्ज कराता है, तो पटवारी 3 रू लेकर उसे दर्ज करेगा तथा मतदाता की हाँ/ना को उसकी मतदाता पहचान संख्या के साथ प्रधानमन्त्री की वेबसाईट पर डाल देगा ।
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(टी सी पी.3) [प्रधानमन्त्री के लिए निर्देश]
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यदि किसी शपथपत्र पर कुल मतदाताओं के 51% मतदाता हाँ दर्ज कर देते है, तो प्रधानमन्त्री ऐसे शपथपत्र पर कार्यवाही कर सकते है, या इस्तीफा दे सकते या उन्हें ऐसा करने की जरुरत नही है । प्रधानमन्त्री का फैसला अंतिम होगा ।
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=========कानूनी ड्राफ्ट की समाप्ति=======
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पाठको के लिए स्पष्टीकरण :
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दलित क्यों इस क़ानून का समर्थन करेंगे ?
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क्योंकि 80% से अधिक दलित गरीब है और 12 वी कक्षा पास भी नहीं है, अत: उनके लिए आरक्षण की कोई उपयोगिता नही है । एक 5 सदस्यीय परिवार यदि आर्थिक विकल्प चुनता है तो उसे बिना किसी हानि के 3000 रू का लाभ प्राप्त होगा। इस तरह ज्यादा से ज्यादा दलित आर्थिक विकल्प चुनेंगे, और उसी अनुपात में आरक्षित सीटों में कमी हो जायेगी । जब कोई दलित आरक्षण का लाभ लेना चाहेगा, तो आर्थिक विकल्प को त्याग कर फिर से आरक्षण के लिए आवेदन कर सकेगा । इस तरह व्यावहारिक रूप से आरक्षित कोटे में दलितों की सहमती से कमी आ जायेगी ।
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लागत
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भारत में SC/ST/OBC वर्ग के नागरिको की संख्या 80 करोड़ है । यदि इन वर्गो के सभी नागरिक आर्थिक विकल्प चुन लेते है, तब भी यह राशि 50 हजार करोड़ होती है, जो कि भारत की जीडीपी का सिर्फ 1% है । हमारा प्रस्ताव है कि यह राशि सिर्फ वेल्थ टेक्स से ही एकत्र की जानी चाहिए, अन्य किसी स्त्रोत से नही ।
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