खरगोश पालने के शौक से लखपति बन गया ये शख्स, इनकम इतनी जितना इन्होने भी नहीं सोचा था

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जींद के संजय कुमार देशभर के पेट शॉप्स में रैबिट सप्लाई करते हैं। उनके इस प्रोफेशन की कामयाब कहानी के पीछे बड़ी दिलचस्प कहानी है। संजय को बचपन से रैबिट पालने का शौक था और घरवाले इससे नाराज थे। बावजूद इसके उन्होंने अपने शौक को जिंदा रखने के लिए इंटरनेट से जानकारी जुटाने के बाद ट्रेनिंग ली और 9 साल में शौक इतना बड़ा प्रोफेशन बन गया। अपने रैबिट फार्म से संजय कुमार लगभग 10 लाख सालाना कमा रहे हैं।

घरवालों ने कर दिया था पैसे देने से इनकार…

– शहर के रोहतक रोड बाईपास पर आधा एकड़ जमीन पर बना उनका रैबिट फार्म प्रदेश में सबसे बड़ा रैबिट फार्म है। इन दिनों इस फार्म में 6 नस्लों के 500 से ज्यादा खरगोश हैं।
– संजय कुमार बताते हैं कि वर्ष 2008 में सिर्फ 100 खरगोश से व्यवसाय शुरू किया था। इसके बाद धीरे-धीरे खरगोशों की संख्या बढ़ाई।
– दूर-दूर से लोग उनसे रैबिट फार्मिंग के बारे में जानकारी लेने के लिए आते हैं। रैबिट फार्मिंग के इस कारोबार से संजय कुमार को आय भी अच्छी-खासी प्राप्त हो रही है।
– संजय की मानें तो उनके यहां से हर महीने हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार समेत दूसरी यूनिवर्सिटी में रिसर्च के लिए खरगोश भेजे जाते हैं। वहीं, देश-विदेश के खरगोश पालने का शौक रखने वाले लोग भी यहीं से लेकर जाते हैं।
– देशभर की पेट शॉप में उनके फार्म से खरगोश की सप्लाई होती है। साथ ही, अपने व्यवसाय के सिद्धांत के बारे में संजय बताते हैं कि वह मीट के लिए रैबिट की सप्लाई नहीं करते।

पहले इंटरनेट से जानकारी ली, फिर ट्रेनिंग 
– संजय कुमार के मुताबिक, उन्हें बचपन में ही खरगोश पालने का शौक था, लेकिन घरवाले इससे सख्त नाराज थे। बावजूद इसके उन्होंने जिद पाल ली कि वह एक दिन प्रदेश का सबसे बड़ा रैबिट फार्म बनाएंगे। एक-दो बार ऐसा भी हुआ, जब घरवालों ने खरगोश खरीदने के लिए उसे पैसे नहीं दिए तो चोरी-छुपे पैसे निकालकर खरगोश खरीद लाए।
– फिर मैट्रिक करने के बाद संजय ने कुछ दिन गुड़गांव में ठेकेदारी की। इसी दौरान उन्होंने गूगल पर रैबिट फार्मिंग की जानकारी ली। इसके बाद वह राजस्थान के अविकानगर में भारत सरकार के ट्रेनिंग सेंटर से एक सप्ताह की ट्रेनिंग लेकर आए। शुरुआत में कर्नाटक से 100 रैबिट अपने फार्म पर रखे।

रैबिट फार्मिंग में देखभाल जरूरी, खर्च काफी कम 
– रैबिट फार्मिंग शुरू करने के इच्छुक किसानों के लिए संजय कुमार का कहना है कि शुरुआत में शेड तैयार करने, खरगोश खरीदने पर पैसा खर्च होता है, लेकिन उसके बाद खर्च काफी कम है।
– पोल्ट्री व्यवसाय से काफी कम खर्च व कम जोखिम का यह कारोबार है। रैबिट फार्म से न कोई बदबू आती और न ही किसी प्रकार कोई और पॉल्यूशन होता है। बस रैबिट की देखभाल पर ध्यान देना काफी जरूरी है। एक खरगोश के लिए दिनभर में एक मुट्ठी फीड, एक मुट्ठी चारा और दो-तीन कटोरी पानी पीता है।
– चार महीने में खरगोश दो किलो वजन से ज्यादा का हो जाता है और फिर 350 से लेकर 500 रुपए तक में बिक जाता है। रैबिट फार्मिंग के लिए सरकार द्वारा 25 से 30 प्रतिशत सब्सिडी दी जाती है।