आप (एक आम नागरिक) रोक सकते हैं गौ-हत्या ! करना होगा ये काम

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गो-हत्या के बढ़ते चले जाने का कारण है सबूतों का आसानी से दबाया जाना और भ्रष्ट, रिश्वत लिए जज, सरकारी वकील और पुलिस द्वारा उचित कदम नहीं उठाना | इसलिए, दोषी को सज़ा नहीं होती और गो-हत्या चलती रहती है |

नागरिक केवल 3 SMS करके अपना वोटर आई.डी. इन्टरनेट समर्थन दर्ज करके गो-रक्षा कानून ला सकते हैं

08141277555 पर अपने मोबाइल इन्बोक्स से कृपया तीन एस.एम.एस. भेजें –

  • पहला एस.एम.एस. इस प्रकार रहेगा (मतलब दो स्टार सिम्बल के बीच में अपना वोटर आई.डी. नंबर डाल कर एस.एम.एस. करें)
    *आपकी-वोटर-आई.डी.-संख्या*
  • दूसरे एस.एम.एस. में केवल चार अंक रहेंगे जो टी.सी.पी. का समर्थन कोड है – 0011
  • तीसरे एस.एम्.एस. में केवल चार अंक रहेंगे जो गो-हत्या विरोधी कानूनों का समर्थन कोड है – 0141

आपका समर्थन इस लिंक पर आएगा – www.smstoneta.com/tcp
यदि किसी एक क्षेत्र में भी पर्याप्त संख्या में ये इन्टरनेट वोटर आई.डी. नंबर समर्थन प्राप्त हो गया, तो ये कानून उस क्षेत्र में आ जायेंगे और गो-हत्या कम हो जायेगी |

नोट – यदि किसी करणवश आपके पास वोटर आई.डी. नहीं है, तो आप पहला एस.एम.एस इस प्रकार से भेजें –
*abc1234567*
दूसरा और तीसरा एस.एम.एस उसी प्रकार से रहेंगे जैसे ऊपर बताया गया है | फिर, आपका समर्थन अपंजीकृत पेज पर आएगा (smstoneta.com/hindi/unregister-sms-opinion.php)


क्यों गो-हत्या कानून होने के बावजूद गो-हत्या आज भी चल रही है और उपाय ?

आज कुछ राज्यों में गो-हत्या विरोधी कानून हैं जिसमें गो-हत्या का दोषी पाए जाने पर 10 साल तक की कारावास की सजा भी है | लेकिन ये भ्रान्ति है कि इन कानूनों से गो-हत्या कम हो गयी है | कानून तो तभी काम करेगा जब तस्कर या अपराधी को सजा होगी और सजा तभी होगी जब सबूत के दम पर अपराध सिद्ध होगा | लेकिन आज सबूत आसानी से दबाए जा सकते हैं और इसीलिए दोषी को सजा नहीं होती और गो-हत्या चलती रहती है |

मान लीजिए, किसी क्षेत्र में गो-हत्या आदि कोई अपराध हुआ है और नागरिक उसकी एफ.आई.आर. लिखवाता है या गवाही/सबूत देता है और नागरिक को एफ.आई.आर. की कॉपी मिलती है तो उसे कोई भ्रष्ट पुलिस अफसर अपराधियों के साथ सांठ-गाँठ करके आसानी से दबा सकते हैं | क्योंकि नागरिक अपनी दर्ज एफ.आई.आर. या अर्जी जमा करने के बाद देख नहीं सकते और सबूत एक ही दफ्तर तक सीमित हैं | और आज के सिस्टम में गवाहों को गलत तत्व आसानी से डरा-धमका सकते हैं ; यहाँ तक गवाहों को जान से भी मार दिया जाता है | क्योंकि गुंडों को मालूम है कि अधिक लोगों को तथ्य की जानकारी नहीं है और गवाह दबाने/मारने से सबूत समाप्त हो जायेंगे |

लेकिन यदि नागरिकों के पास ये नागरिक-प्रामाणिक विकल्प है कि वे अपनी बात, सबूत या राय का एक-एक शब्द अपनी वोटर आई.डी. नंबर के साथ सार्वजनिक रूप से दर्शा सकते हैं, तो अफसर देखेगा कि सबूत को दबाया नहीं जा सकता है, अब तो लाखों-करोड़ों को प्रमाण प्राप्त हो गए हैं | और गुंडों को भी समझ में आएगा कि गवाह ने अपना बयान सार्वजनिक कर दिया है – इसीलिए अब गवाह को मारने से कोई लाभ नहीं है | इस प्रकार फैसला जल्दी आएगा और दोषी को सज़ा होगी और गो-हत्या कम हो जाएगी और गवाह की भी जान बच जायेगी |

गो-रक्षा के लिए मुख्य प्रस्तावित समाधान

1. पारदर्शी शिकायत-प्रस्ताव प्रणाली –

सबूतों को दबाया नहीं जा सके, इसलिए नागरिक के पास विकल्प हो कि वो अपनी अर्जी वोटर आई.डी. के साथ प्रधानमंत्री वेबसाइट पर स्कैन करवा सके ताकि बिना लॉग-इन के सभी उसे देख सकें | सबूत नहीं दबने के कारण गो-रक्षा होगी | अधिक जानकारी के लिए कृपया rtrg.in/tcpsms.h दखें या righttorecall.info/tcpsms.h.pdf डाउनलोड करके पढ़ें |

2. पुलिस-कमिश्नर और जिला प्रधान जज पर राईट टू रिकॉल –

यदि नागरिकों के पास ऐसी प्रक्रिया हो कि वे सरकारी वकील, जिला प्रधान जज और पुलिस को किसी भी दिन बदल सकें, तो नौकरी जाने के डर से 99% अफसर अपना कार्य सुधार देंगे | फिर, दोषियों को समय पर उचित सज़ा मिलेगी और गो-हत्या कम हो जायेगी | अधिक जानकारी के लिए कृपया www.tinyurl.com/GoRaksha पढ़ें |

3. ज्यूरी द्वारा आरोपित पर पब्लिक में नारको जांच –

ज्यूरी सिस्टम में क्रमरहित तरीके से हर मामले के लिए, अलग-अलग 15 से 1500 नागरिक चुने जाते हैं, जो फैसला करते हैं, जज फैसला नहीं करता | इस सिस्टम में, जज सिस्टम की तुलना में फैसला जल्दी और न्यायपूर्वक आता है जिससे गो-रक्षा में मदद मिलेगी | ज्यूरी निर्णय करेगी कि पब्लिक में नारको आदि कौनसी कार्रवाई की जाये या नहीं | अधिक जानकारी के लिए www.tinyurl.com/GoRaksha पढ़ें |

इस पर्चे को डाउनलोड करके बांटने के लिए कृपया इस लिंक का प्रयोग करें – rtrg.in/tcp-goraksha.pdf

इसका ऑडियो सुनने के लिए कृपया ये लिंक देखें – archive.org/details/praveen-tcp-goraksha

इसके अलावा, कृपया अपने सांसद, विधायक आदि जनसेवक और चुनावी उम्मीदवारों को इन प्रस्तावों को अपनी वेबसाईट या ट्विट्टर पर रखने की मांग करें जिसपर वे मुख्यमंत्री/प्रधानमंत्री को राजपत्र में छापने के लिए कहें |

इस अभियान का एक लाभ ये भी होगा कि हम स्थानीय समस्याओं का समाधान लाने के लिए सांसद, विधायक, पार्षद आदि जनसेवकों को पब्लिक एस.एम.एस सर्वर अपनी साईट पर लागू करने के लिए कह सकते हैं | पब्लिक एस.एम.एस सर्वर का क्या स्वरूप क्या है, उसका लाभ क्या है, जानने के लिए ये लिंक देखें – rtrg.in/public-sms-server

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