भूमि अधिग्रहण का प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट

1915

भारत के सभी नागरिको से एक निवेदन ,
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हमारा यह दावा है कि हमारे द्वारा प्रस्तावित भूमि अधिग्रहण का कानूनी ड्राफ्ट (LALD-Land Acquisition Law Draft) अन्य सभी राजनेतिक दलों और सरकार द्वारा प्रस्तावित किये गए भूमि अधिग्रहण कानूनों से सबसे कम बुरा है । यदि आपको इस प्रस्तुत ड्राफ्ट के स्पष्टीकरण से सम्बंधित किसी भी प्रकार की सहायता की आवश्यकता महसूस होती है, तो कृपया अपने शहर में स्थित किसी भी रिकालिस्ट या राईट टू रिकाल ग्रुप के कार्यकर्ता से संपर्क करें । वे आपको इस ड्राफ्ट को समझने में सहयोग करेंगे । आप संपर्क करने के लिए उन्हें राईट टू रिकाल ग्रुप के फेसबुक समुदाय पर खोज सकते है । आप उन्हें फोन कर सकते है, उनसे मिल सकते है या फेसबुक समुदाय पर उनसे संवाद कर सकते है । यदि आप इस प्रस्तावित ड्राफ्ट का समर्थन करते है तो अपने क्षेत्र के सांसद को SMS द्वारा यह आदेश करें कि इस कानूनी ड्राफ्ट को गेजेट में प्रकाशित किया जाए ।

Right to Recall (21)
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======सांसद को भेजे जाने वाले SMS आदेश का ड्राफ्ट का प्रारम्भ======
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Hon MP, I order you to print the law draft mentioned in http://tinyurl.com/NewLALD
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=====SMS ड्राफ्ट की समाप्ति=====
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परिचय
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कोई भी भूमि अधिग्रहण क़ानून निम्नलिखित दो कानूनों से सम्बद्ध होकर कार्य करता है । (1) भूखंडो पर कराधान के क़ानून तथा (2) भूमि विक्रय में की गयी धोखाधड़ी तथा विवादों का निस्तारण । और इन सभी कानूनों को सबसे पहले इन दो केन्द्रीय प्रश्नों के उत्तर देने चाहिए — (1) ये क़ानून किस तरह से हमारी सेना को मजबूती प्रदान करेंगे ताकि हमारी सेना दुश्मन देश की सेनाओं को भारत में घुसकर हमारी जमीन का अधिग्रहण करने से रोक सके । (2) ये क़ानून स्थानिक भू माफिया और अपराधियों को भूमि हड़पने से किस प्रकार रोकेंगे ।
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यह अपेक्षित है कि यदि कोई व्यक्ति किसी भूमि अधिग्रहण ड्राफ्ट की समालोचना करता है, तो उसे पहले लिखित में वैकल्पिक ड्राफ्ट प्रस्तुत करना चाहिए ।
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चूंकि इन प्रश्नों के उत्तर व्याख्यात्मक है अत: मैं इन प्रश्नों के उत्तर मेरे अन्य स्तंभों में दूंगा । यह स्तम्भ केवल प्रस्तावित भूमि अधिग्रहण के कानूनी ड्राफ्ट के बारे में है ।
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पाठको से मेरा आग्रह है कि इस ड्राफ्ट के सन्दर्भ में हमारे द्वारा प्रस्तावित निम्न कानूनी ड्राफ्ट्स का भी अध्ययन करें ।
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अ) राईट टू रिकाल मंत्री के लिए कानूनी ड्राफ्ट : http://tinyurl .com/RtrMinister
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ब) जमीनों के क्रय विक्रय में नकद भुगतान को रोकने के लिए कानूनी ड्राफ्ट :http://tinyurl.com/ReduceCashInLandDeals3
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स) संपत्ति कर के लिए प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट : http://tinyurl.com/WealthTaxIndia
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उपरोक्त वर्णित तीनो क़ानून भूमि अधिग्रहण की आवश्यकता में कमी लायेंगे, साथ ही भूमि के वास्तविक मूल्य निर्धारण को भी तय करेंगे जो कि भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में अक्सर सामने आने वाली एक मुख्य समस्या है ।
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(अ) यह क़ानून राजस्व मंत्री पर भूमि स्वामित्व के सभी विवरण और अभिलेख इंटरनेट पर रखने के लिए दबाव बनाएगा । इससे कार्यकर्ताओं और नागरिको को यह स्पष्ट रूप से जानकारी रहेगी कि किसी क्षेत्र विशेष में किसी भूमि अधिग्रहण के समर्थन या विरोध के पीछे क्या कोई कपटपूर्ण कारण मौजूद है या नहीं ।
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(ब) यह क़ानून भूमि में काले धन/नकद व्यवहार में कमी लाएगा तथा भूमि के वास्तविक बाजार मूल्य को खुले रूप से स्थापित कर देगा । इससे भूमि अधिग्रहण के बदले में दी जाने वाले मुआवजे की राशि का निर्धारण आसानी से हो सकेगा ।
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(स) यह क़ानून भूमि, निर्माण, स्वर्ण, शेयर, बांड और नकद कोष पर संपत्ति कर लागू करेगा । संपत्ति कर भूमि की कीमत का 1% सालाना की दर से देय होगा जिसमे से वेल्थ टेक्स क्रेडिट, आयकर तथा चुकाए गए अन्य करो को घटा दिया जाएगा । संपत्ति कर के लागू होने से जमीन की कीमतों में भारी कमी आएगी और भू संसाधन का समान वितरण होगा । यह क़ानून बलात भूमि अधिग्रहण की आवश्यकता में भारी कमी ले आएगा ।
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ये सभी क़ानून मिलकर जमीन की कीमतों में भारी कमी ले आयेंगे जिससे निर्माण इकाइयां और हथियारों के उत्पादन के लिए कारखाने लगाना आसान हो जाएगा और हमारी सेना मजबूत होगी ।
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सांसदों के लिए सूचना,
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यदि आप SMS द्वारा इस लिंक में दर्ज क़ानून को गेजेट में प्रकाशित करने का आदेश प्राप्त करते है, तो यह आपके मतदाता द्वारा दिया गया आदेश है न कि इस स्तम्भ के लेखक द्वारा ।
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=====कानूनी ड्राफ्ट का प्रारम्भ=====
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सेक्शन -1. सामान्य परिभाषाएं
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(1.1) इस ड्राफ्ट में प्रयुक्त नागरिक शब्द से आशय भारत का पंजीकृत मतदाता है ।
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(1.2) इस ड्राफ्ट में प्रयुक्त शब्द भूखंड में सभी प्रकार की भूमि, भूखंड, कृषि भूखंड, अकृषि भूखंड, आवासीय भूखंड, फ्लेट्स, अपार्टमेंट्स, बंगले, गोदाम, इमारते, कार्यालय, औद्योगिक शेड्स, सभी प्रकार के निर्माण तथा भूखंड या निर्माण पर प्राप्त स्वामित्व शामिल है ।
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(1.3) सन्क्षिप्तिकृत संकेत
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NLAO – राष्ट्रीय भूमि अधिग्रहण अधिकारी
SLAO – राज्य भूमि अधिग्रहण अधिकारी
DLAO – जिला भूमि अधिग्रहण अधिकारी
NJA – राष्ट्रीय जूरी प्रशासक
SJA – राज्य जूरी प्रशासक
DJA – जिला जूरी प्रशासक
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सेक्शन -2 : मुख्य अधिकारी तथा उनके स्टाफ, कार्यालय ।
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भूमि अधिग्रहण की व्यवस्था के संचालन के लिए प्रधानमन्त्री राष्ट्रीय भूमि अधिग्रहण अधिकारी (NLAO) पद नाम से एक अधिकारी की नियुक्ति करेंगे, जिसे भारत के नागरिक इस अधिनियम में वर्णित RTR-NLAO सेक्शन में दर्ज प्रावधानों के अनुसार बदल सकेंगे ।
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(2.2). [ NLAO, प्रधानमन्त्री, सांसद तथा नागरिको के लिए निर्देश ]
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NLAO गाइड लाइन जारी करेगा तथा पूरे देश में अपने कार्यालयों के संचालन के लिये आवश्यक कोष का ब्यौरा प्रस्तुत करेगा । ऐसी गाइड लाइन्स तब से प्रभावी होगी जबकि प्रधानमन्त्री इन्हें राजपत्र में प्रकाशित कर देते है, या सांसद इस प्रस्ताव को संसद में पारित कर देते है, या इसी अधिनियम में वर्णित टी सी पी सेक्शन में दर्ज प्रावधानों का प्रयोग करके भारत के नागरिक इन्हें अनुमोदित कर देते है ।NLAO प्रत्येक राज्य में एक SJA तथा प्रत्येक जिले में एक DJA की नियुक्ति करेगा ।
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(2.3). [ मुख्यमंत्री के लिए निर्देश ]
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मुख्यमंत्री अपने राज्य में राज्य भूमि अधिग्रहण अधिकारी (SLAO), तथा जिलो में जिला भूमि अधिग्रहण अधिकारी (DLAO) की नियुक्ति कर सकते है या नही भी कर सकते है । ये दोनों अधिकारी मुख्यमंत्री द्वारा गेजेट में प्रकाशित निर्देशों के अनुसार कार्य करेंगे ।
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सेक्शन -3 : भूमि अधिग्रहण के लिए बनाए जाने वाले नियमों के लिए दिशा निर्देश
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(3.1) इस भूमि अधिग्रहण क़ानून में संसद आवश्यक संशोधन कर सकती है तथा नये नियम बना सकती है । प्रधानमन्त्री भी आवश्यक दिशा निर्देशों को लागू करने के लिए राजपत्र अधिसूचना जारी कर सकते है ।
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(3.2) NLAO भूमि अधिग्रहण के लिए आवश्यक सर्कुलर जारी कर सकता है ।
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(3.3) जब NLAO कोई सर्कुलर जारी करेगा तो इस सर्कुलर को सभी जिलो के DJA=जिला जूरी प्रशासक को भेजेगा । DJA रेंडमली जिले के 12 नागरिको की जूरी बुलाएगा तथा NLAO द्वारा नियुक्त अधिकारी इस सर्कुलर की व्याख्या करेगा । जूरी मंडल किसी भी नागरिक को इस सर्कुलर पर अपना दृष्टिकोण प्रकट करने के लिए बुला सकेंगे । यदि पूरे देश के जूरी मंडलों का बहुमत इस सर्कुलर का विरोध करता है तो NLAO इस सर्कुलर को रद्द कर सकता है या इस्तीफा दे सकता है या उसे ऐसा करने की आवश्यकता नही है । इस सम्बन्ध में NLAO का निर्णय अंतिम होगा ।
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(3.4) नागरिक इस अधिनियम में वर्णित टी सी पी के प्रावधानों का प्रयोग करके कोई सर्कुलर जारी कर सकेंगे ।
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सेक्शन-4 : भूमि अधिग्रहण के लिए किसी प्रस्ताव को NLAO, SLAO या DLAO को प्रेषित करना ।
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(4.1) केंद्र या राज्य सरकार का कोई मंत्री अथवा कोई भी नागरिक भूमि अधिग्रहण के लिए प्रस्ताव NLAO, SLAO या DLAO को प्रेषित कर सकेगा । प्रस्ताव प्रस्तुत करने के लिए मंत्रियो द्वारा कोई शुल्क देय नही होगा, जबकि नागरिक को इसके लिए 200 रू तथा प्रति पृष्ठ 20 रूपये की दर से भुगतान करना होगा । NLAO, SLAO या DLAO इस प्रस्ताव को प्रधानमन्त्री या मुख्यमंत्री की वेबसाईट पर रखेंगे ।
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(4.2) भूमि अधिग्रहण के ऐसे किसी प्रस्ताव में भूखंड की स्थिति, स्वामियों के नाम, उनकी पहचान संख्या, अधिग्रहण का उद्देश्य, क्षतिपूर्ति के लिए प्रत्येक भू स्वामी को की गयी पेशकश राशि का ब्यौरा तथा अन्य आवश्यक विवरण प्रस्तुत किये जा सकेंगे । NLAO, SLAO तथा DLAO बिना किसी पूछताछ के प्रस्तावों को स्वीकार करेंगे और इन्हें प्रधानमन्त्री की वेबसाईट पर दर्ज करेंगे । प्रस्ताव दर्ज करने के बाद NLAO/SLAO/DLAO इस सम्बन्ध में प्रस्तावक से कोई ब्यौरा मांग भी सकते है या नही भी मांग सकते है ।
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(4.3) प्रधानमन्त्री, मुख्यमंत्री, NLAO, SLAO, DLAO अधिग्रहण के किसी प्रस्ताव के अध्ययन के लिए एक या अधिक अधिकारियों की नियुक्ति कर सकते है । यह अधिकारी इस सम्बन्ध में अपना प्रतिवेदन दर्ज करा भी सकते है या नही भी करा सकते है । इन अधिकारियों पर अपना अध्ययन प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के लिए समय सीमा की कोई बाध्यता नही होगी ।
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(4.4) कोई भी नागरिक किसी अधिग्रहण प्रस्ताव के सम्बन्ध में कोई एतराज या सुझाव प्रति पृष्ठ 20 रू की दर से प्रेषित कर सकेगा ।यदि प्रस्तावक उस भूमि का स्वामी है या उसमे निवास करता है, जिस भूमि का अधिग्रहण प्रस्तावित है, तो ऐसे नागरिक को प्रस्ताव प्रेषित करने हेतु प्राथमिक 3 पृष्ठों तक कोई शुल्क नही चुकाना होगा किन्तु 3 से अधिक पृष्ठ होने पर प्रति पृष्ठ 10 रूपये का भुगतान करना होगा ।
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(4.5) कोई भी नागरिक पटवारी कार्यालय में 3 रू शुल्क जमा करा कर किसी भूमि अधिग्रहण प्रस्ताव पर हाँ/ना दर्ज करा सकेगा । यदि नागरिक अपनी हाँ को रद्द करवाता है तो पटवारी बिना कोई शुल्क लिए हाँ को रद्द कर देगा । अधिग्रहण की जाने वाली भूमि के स्वामियों को हाँ दर्ज कराने के लिए कोई भुगतान नही करना होगा । प्रधानमन्त्री, मुख्यमंत्री, NLAO, SLAO और DLAO हाँ/ना दर्ज करने के लिए SMS की प्रक्रिया बना सकेंगे । (स्पष्टीकरण के लिए इसी ड्राफ्ट में वर्णित टी सी पी के प्रावधान देखें)
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सेक्शन-5 : भूखंडो के अधिग्रहण लिए कीमतों की घोषणा करना तथा घोषित अधिग्रहण कीमतों के आधार पर संपत्ति कर की सीमा का निर्धारण ।
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(5.1) किसी भूखंड/निर्माण का स्वामी अपने स्वामित्व वाले भूखंड/निर्माण के अधिग्रहण की कीमत की घोषणा अपने संपत्ति कर प्रतिवेदन में कर सकता है या उसे ऐसा करने की जरुरत नही है । यदि भू स्वामी के स्वामित्व वाली भूमि में भू स्वामी के घनिष्ठ पारिवारिक सदस्य प्रति सदस्य 25 वर्ग मीटर के हिसाब से अकृषि भूमि धारण करते है तथा भू स्वामी के स्वामित्व में दो आवासीय इकाइयां है, या भू स्वामी के घनिष्ठ पारिवारिक सदस्य प्रति सदस्य 50 वर्ग मीटर के हिसाब से अकृषि भूमि धारण करते है, तो भू स्वामी को संपत्ति कर प्रतिवेदन में भूमि का अधिग्रहण मूल्य घोषित करना अनिवार्य होगा । उपरोक्त परिस्थितियों में यदि अधिग्रहण मूल्य घोषित नही किया जाता है तो प्रवृत सर्कल रेट को ही अमुक भूमि का अधिग्रहण मूल्य माना जाएगा । प्रधानमन्त्री राजपत्र में ऐसी अधिसूचना जारी कर सकते है कि संपत्ति कर की गणना घोषित अधिग्रहण मूल्य और सर्कल मूल्य में से उस मूल्य पर की जायेगी जिसका मूल्य अधिक हो ।
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(5.2) भू स्वामी अपने भूखंड को अनुच्छेद (5.1) में वर्णित सीमा से कम आकार पर चिन्हीत कर सकेगा, तथा अमुक भूखंड पर कर की दर उस मूल्य के अनुसार लागू होगी जो स्व घोषित अधिग्रहण मूल्य और सर्कल मूल्य में से कम हो ।
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(5.3) यदि भू स्वामी के स्वामित्व वाली कृषि भूमि में उसके घनिष्ठ पारिवारिक सदस्य प्रति सदस्य 2 एकड़ कृषि भूमि धारण करते है, तो भू स्वामी अमुक कृषि भूमि का अधिग्रहण मूल्य घोषित कर सकता है या उसे ऐसा करने की आवश्यकता नही है ।
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(5.4) भू स्वामी अपने कृषि भूखंड को अनुच्छेद (5.3) में वर्णित सीमा से कम आकार पर चिन्हित कर सकेगा, तथा कर की दरें उस मूल्य पर लागू होगी, जो मूल्य घोषित अधिग्रहण मूल्य और सर्कल मूल्य में से कम हो । प्रधानमन्त्री ऐसी अधिसूचना जारी कर सकेगें जिसके अनुसार संपत्ति कर की दरें उस मूल्य पर लागू होगी जो मूल्य स्व घोषित अधिग्रहण मूल्य और सर्कल मूल्य में से अधिक हो ।
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(5.5) इस अधिनियम में वर्णित घनिष्ठ पारिवारिक सदस्यों में व्यक्ति के माता-पिता, जीवन साथी, अविवाहित या विवाहित पुत्र पुत्रियाँ, अविवाहित सहोदर भाई बहन को शामिल किया जाएगा । ससुराल पक्ष के सदस्य, विवाहित सहोदर भाई बहन, उनके बच्चे आदि तथा अन्य कोई भी घनिष्ठ पारिवारिक सदस्य नही माने जायेंगे ।
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(5.6) ज्यूरी मंडल घोषित अधिग्रहण मूल्य को क्षतिपूर्ति राशि के निर्धारण का आधार बना सकते है, या नही बना सकते है । यदि किसी भूखंड का अधिग्रहण मूल्य स्व घोषित नही किया जाता है तो जूरी मंडल क्षतिपूर्ति की राशि के निर्धारण के लिए सर्कल मूल्य से दोगुनी राशि को आधार बना सकेंगे ।
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सेक्शन-6 : अधिग्रहण प्रस्तावों पर रायशुमारी । मंत्रियों, जूरी सदस्यों, अधिकारियों तथा नागरिको के सुझाव ।
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(6.1) प्रधानमन्त्री, मुख्यमंत्री, NLAO तथा SLAO, NJA, SJA या DJA से कह सकते है या नहीं भी कह सकते है कि वे ज्यूरी मंडलों को किसी अधिग्रहण प्रस्ताव पर अपने विचार प्रस्तुत करने को कहे । तब NJA, SJA तथा DJA या इनमें से कोई देश, राज्य या जिले की मतदाता सूची में से रेंडमली 50 से 1500 नागरिको जूरी बुलाएगा तथा अमुक अधिग्रहण प्रस्ताव पर अपने विचार प्रस्तुत करने को कहेगा । ज्यूरी मंडल में न्यूनतम 12 जूरी सदस्य होंगे तथा प्रति एकड़ के हिसाब से एक जूरी सदस्य बढ़ा दिया जाएगा । इस प्रकार गठित जूरी मंडल तथा प्रधानमन्त्री या मुख्यमंत्री द्वारा निर्धारित संख्या में से जिस ज्यूरी मंडल की संख्या अधिक होगी, उस आकार के जूरी मंडल को मान्य माना जाएगा । ऐसी ज्यूरी की अधिकतम सीमा 1500 सदस्यों तक हो सकेगी ।
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(6.2) प्रधानमन्त्री या मुख्यमंत्री ज्यूरी मंडल के समक्ष अपना मत रखने के लिए किसी अधिकारी को नियुक्त कर सकते है या नही भी कर सकते है। व्यक्ति जिसने अधिग्रहण का प्रस्ताव प्रेषित किया है, जूरी मंडल के सामने उपस्थित होकर अपना पक्ष प्रस्तुत कर भी सकता है, नही भी कर सकता है । इसके अतिरिक्त ज्यूरी मंडल भू स्वामियों को तथा अन्य किसी नागरिक को अपना पक्ष रखने के लिए बुला भी सकता है या नही भी बुला सकता है । किन्तु यदि भू स्वामी जूरी मंडल के समक्ष अपना पक्ष रखना चाहे तो जूरी मंडल उसे अपना पक्ष रखने या न रखने देने की अनुमति की घोषणा करेगा । यदि जूरी मंडल भू स्वामी को अपना पक्ष रखने देने की अनुमति की घोषणा करता है, तो जूरी मंडल यह भी घोषणा करेगा कि उसे कितने घंटे तक अपना पक्ष रखने की अनुमति होगी ।
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(6.3) जब जूरी मंडल बहुमत से यह निर्धारित करे कि उन्होंने सभी पक्षों को पर्याप्त रूप से सुन लिया है, तो जूरी मंडल सुनवाई समाप्ति की घोषणा करेगी तथा फैसला देगी । NJA, SJA या DJA फैसले को वेबसाईट पर रखेंगे ।
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(6.4) हालांकि जूरी मंडल का फैसला प्रधानमन्त्री, मुख्यमंत्री या अन्य किसी अधिकारी पर बाध्यकारी नही होगा, तथापि NLAO फैसले को वेबसाईट पर रखेगा ।
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(6.5) जूरी मंडल के लिए उन नागरिको को शामिल किया जाएगा, जिनकी आयु 30 से 55 वर्ष के मध्य हो, तथा उन्हें पूर्व में किसी अपराध के लिए न तो दोषी ठहराया गया हो, न ही उन पर किसी न्यायलय में कोई मामला विचारधीन हो ।
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(6.6) प्रधानमन्त्री या मुख्यमंत्री किसी भूमि अधिग्रहण प्रस्ताव पर अपना मत प्रेषित कर सकेंगे ।
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(6.7) कोई भी गैर सरकारी संगठन (NGO) किसी अधिग्रहण प्रस्ताव पर खुद के खर्च पर सामाजिक अंकेक्षण करके प्रतिवेदन जिला कलेक्टर को प्रस्तुत कर सकेगा । कलेक्टर इस प्रतिवेदन को 20 रू प्रति पृष्ठ की दर से शुल्क लेकर प्रधानमन्त्री या मुख्यमंत्री की वेबसाईट पर रख देगा ।
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सेक्शन-7 : किसी अधिग्रहण प्रस्ताव पर निर्णयन ।
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(7.1) (अ) यदि किसी अधिग्रहण प्रस्ताव पर देश के कुल मतदाताओं के 50% से अधिक मतदाता ‘हाँ’ दर्ज कर देते है तो NLAO प्रस्ताव के स्वीकृत होने की घोषणा कर देगा । (ब) यदि किसी अधिग्रहण प्रस्ताव पर देश के कुल मतदाताओं के 50% से अधिक मतदाता ‘नहीं’ दर्ज करते है तो NLAO प्रस्ताव के रद्दीकरण की घोषणा करेगा । (स) किन्तु यदि कुल मतदाताओं के 50% से अधिक मतदाता न तो ऐसे किसी प्रस्ताव पर ‘हाँ’ दर्ज करते है, न ही नहीं दर्ज करते है, तो NLAO इस अनुच्छेद का प्रयोग नही करेगा ।
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‘देश के कुल मतदाताओं’ का आशय : देश के कुल मतदाताओं से आशय, भारत देश की मतदाता सूची में पंजीकृत सभी मतदाता है, न कि जिन मतदाताओं ने ‘हां’ या ‘नही’ दर्ज किया है । उदाहरण के लिए, यदि भारत की मतदाता सूची में 84 करोड़ मतदाता पंजीकृत है तो इन कुल मतदाताओं के 50% (42 करोड़) मतदाताओं द्वारा किसी प्रस्ताव पर ‘हाँ’ या ‘नहीं’ दर्ज किया जाना चाहिए । यदि 41 करोड़ मतदाता किसी प्रस्ताव पर ‘हां’ या ‘नहीं’ दर्ज करते है तो अनुच्छेद (7.1) लागू नही होगा ।
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(7.2) (अ) यदि अनुच्छेद (7.1) के अनुसार अधिग्रहण प्रस्ताव स्वीकार हो जाता है, तो अनुच्छेद (7.2) लागू नही होगा । (ब) यदि किसी राज्य के कुल मतदाताओं के 50% से अधिक मतदाता अधिग्रहण प्रस्ताव पर ‘हाँ’ दर्ज कर देते है तो, NLAO अमुक राज्य के लिए प्रस्ताव स्वीकृत होने की घोषणा करेगा। (स) यदि अमुक राज्य के कुल मतदाताओं के 50% से अधिक मतदाता किसी अधिग्रहण प्रस्ताव पर ‘नहीं’ दर्ज कर देते है तो NLAO अमुक राज्य के लिए प्रस्ताव के अस्वीकृत होने की घोषणा करेगा ।(द) किन्तु यदि कुल मतदाताओं के 50% से अधिक मतदाता किसी प्रस्ताव पर ‘हाँ’ या ‘नही’ दर्ज नहीं करते है तो यह अनुच्छेद लागू नही होगा ।(य) किसी प्रस्ताव पर राज्यों के मतदाताओं द्वारा दर्ज कराई गयी ‘हाँ’ या ‘नहीं’ निष्प्रभावी हो जायेगी, यदि देश के कुल मतदाताओ के 50% से अधिक मतदाता किसी प्रस्ताव पर ‘हाँ’ या ‘नहीं’ दर्ज कर देते है । अनुच्छेद (7.1) अनुच्छेद (7.2) को अप्रभावी कर सकेगा ।
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(7.3) (अ) यदि किसी अधिग्रहण प्रस्ताव का फैसला अनुच्छेद (7.1) या (7.2) द्वारा हो जाता है तो अनुच्छेद (7.3) लागू नही होगा । (ब) यदि किसी जिले के कुल मतदाताओं के 50% से अधिक मतदाता किसी भूखंड के अधिग्रहण प्रस्ताव पर ‘हाँ’ दर्ज कर देते है तो NLAO अमुक जिले द्वारा प्रस्ताव स्वीकृत होने की घोषणा करेगा । (स) यदि किसी भूखंड के अधिग्रहण प्रस्ताव के लिए किसी जिले के कुल मतदाताओं के 50% से अधिक मतदाता ‘नहीं’ दर्ज कर देते है तो NLAO अमुक जिले के लिए प्रस्ताव अस्वीकृत होने की घोषणा करेगा । (द) यदि किसी भूखंड के अधिग्रहण प्रस्ताव पर किसी जिले के कुल मतदाताओं के 50% से अधिक मतदाता ‘नहीं’ दर्ज कर देते है तो NLAO अमुक जिले के लिए प्रस्ताव के अस्वीकृत होने की घोषणा करेगा । (य) यदि किसी भूखंड अधिग्रहण प्रस्ताव के लिए किसी जिले के कुल मतदाताओं के 50% से अधिक मतदाता ‘हां’ या ‘नही’ दर्जनही करते है तो यह अनुच्छेद लागू नही होगा । (र) यदि किसी अधिग्रहण प्रस्ताव पर किसी जिले के कुल मतदाताओं के 50% से अधिक मतदाता ‘हाँ’ या ‘नही’ दर्ज कर देते है तो भी ऐसा प्रस्ताव अप्रभावी हो जाएगा, यदि किसी राज्य या देश के कुल मतदाताओं के 50% से अधिक मतदाता ऐसे अधिग्रहण प्रस्ताव पर ‘हाँ’ या ‘नहीं’ दर्ज कर देते है । अनुच्छेद (7.1) तथा अनुच्छेद (7.2), अनुच्छेद (7.3) को अप्रभावी कर देगा ।
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(7.4) यदि प्रधानमन्त्री द्वारा अनुमोदित किये गए किसी प्रस्ताव पर देश/राज्य/जिले के कुल मतदाताओं के 50% से अधिक मतदाता 30 दिनों के भीतर ‘हाँ’ या ‘नही’ दर्ज नही करते है, तो NLAO ऐसे प्रस्ताव के स्वीकृत होने की घोषणा करेगा । किन्तु प्रधानमन्त्री द्वारा अनुमोदित ऐसे किसी प्रस्ताव पर देश/राज्य/जिले के कुल मतदाताओ के 50% से अधिक मतदाता ‘नही’ दर्ज कर देते है तो NLAO ऐसे प्रस्ताव को रद्द करने की घोषणा करेगा ।
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(7.5) यदि मुख्यमन्त्री द्वारा अनुमोदित किये गए किसी प्रस्ताव को प्रधानमन्त्री रद्द नही करते है या देश/राज्य/जिले के कुल मतदाताओं के 50% से अधिक मतदाता 30 दिनों के भीतर ‘हाँ’ या ‘नही’ दर्ज नही करते है, तो NLAO ऐसे प्रस्ताव के स्वीकृत होने की घोषणा करेगा । किन्तु मुख्यमन्त्री द्वारा अनुमोदित ऐसे किसी प्रस्ताव पर देश/राज्य/जिले के कुल मतदाताओ के 50% से अधिक मतदाता ‘नही’ दर्ज कर देते है तो NLAO ऐसे प्रस्ताव को रद्द करने की घोषणा करेगा ।
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(7.6) यदि इन पाँचो — देश के कुल मतदाताओं के 50%, राज्य के कुल मतदाताओं के 50%, जिले के कुल मतदाताओं के 50%, प्रधानमन्त्री या मुख्यमंत्री, न तो किसी प्रस्ताव को स्वीकृत करते है, न ही रद्द करते है, तो NLAO प्रस्ताव को रद्द करने की घोषणा करेगा ।
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(7.7) यह अनुच्छेद एक सामान्य निर्देश है । सामान्य वरीयता क्रम में देश के कुल मतदाताओं के 50% मतदाता राज्य के कुल मतदाताओं से ऊपर है, राज्य के कुल मतदाताओं के 50% मतदाता जिले के कुल मतदाताओं से ऊपर है, जिले के कुल मतदाताओ के 50% मतदाता प्रधानमन्त्री से ऊपर है, तथा प्रधानमन्त्री मुख्यमंत्री से ऊपर है ।
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सेक्शन-8 : मुआवजा एवं दावे – न्यायपूर्ण क्षतिपूर्ति के लिए ।
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(8.1) यदि कोई भूमि अधिग्रहण प्रस्ताव स्वीकृत हो जाता है तो, NLAO अमुक अधिग्रहण प्रस्ताव के लिए एक क्षतिपूर्ति अधिकारी की नियुक्ति करेगा ।
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(8.2) क्षतिपूर्ति अधिकारी सत्यापन और प्रमाण के लिए भूमि/संपत्ति के मूल्य तथा भूमि खोने वाले व्यक्तियों के अभिलेख रखेगा ।
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(8.3) किसी व्यक्ति को पहली बार दिए जाने वाले मुआवजे की परिस्थिति में, 2 करोड़ रू मूल्य तक की भूमि के लिए एक मुश्त मुआवजा, अधिग्रहित की जाने वाली भूमि के बाजार मूल्य का तीन गुना होगा, तथा 2 करोड़ के बाद यह मुआवजा दो गुना होगा । यह अनुच्छेद अवैयक्तिक भू स्वामियों और विदेशी भू स्वामियों पर लागू नही होगा । यह अनुच्छेद सिर्फ तभी लागू होगा जबकि भू स्वामी के स्वामित्व में अमुक भूमि पिछले 10 वर्षो से रही है या उसने इसे विरासत से प्राप्त किया है । विरासत से भूमि प्राप्त करने की स्थिति में 10 वर्षो की गणना में उसके स्वामित्व वर्षो को भी शामिल किया जाएगा, जिसने विरासत का हस्तांतरण किया है ।
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(8.4) अवैयक्तिक इकाइयों के लिए मुआवजा बाजार मूल्य से दोगुना होगा ।
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(8.5) ऐसा व्यक्ति जिसकी भूमि अधिगृहित की जा रही है, किन्तु उसकी सालाना आय 1 लाख रू से कम है, तथा संपत्ति 250 वर्ग फुट अकृषि भूमि, 500 वर्ग फुट निर्माण तथा 2 एकड़ कृषि भूमि को शामिल करते हुए 10 लाख रू से कम है, तब ऐसा व्यक्ति अपनी अधिगृहित होने वाली भूमि के एवज में 1000 रू प्रति एकड़ की दर से प्रति माह पेंशन प्राप्त करेगा, जिसकी अधिकतम सीमा 3000 रू प्रति माह तक हो सकेगी । पेंशन राशि का समायोजन मुद्रा स्फीति के अनुसार किया जा सकेगा । कोई सामाजिक कार्यकर्ता ऐसे मामले का मसौदा तैयार कर सकेगा । यदि कोई सामजिक कार्यकर्ता ऐसा करता है तो अमुक सामजिक कार्यकर्ता को 100 रू प्रति माह की दर से प्रोतसाहन राशि तब तक प्राप्त होगी जब तक कि सम्बंधित पेंशन धारक पेंशन प्राप्त करेगा ।
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(8.6) यदि कोई व्यक्ति या इकाई मुआवजे की राशि से संतुष्ट नही है, तो वह मुआवजे की राशि पर पुनर्विचार के लिए जूरी मंडल के सम्मुख अपील दायर कर सकता है । जूरी मंडल में न्यूनतम 12 सदस्य होंगे तथा प्रति एकड़ के हिसाब से एक ज्यूरी सदस्य बढ़ा दिया जाएगा । अधिगृहीत भूमि के मूल्य के लिए सर्कल दरों को आधार मानते हुए, प्रति एक करोड़ मूल्य के हिसाब से जूरी मंडल में एक जूरी सदस्य अतिरिक्त बढ़ाया जाएगा । जूरी मंडल की अधिकतम सीमा 1500 सदस्य होगी । प्रत्येक मुआवजा दावे की सुनवाई के लिए अलग से जूरी मंडल होगा ।
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(8.7) नागरिक इसी अधिनियम में वर्णित टी सी पी प्रावधानों का उपयोग करके मुआवजे की राशि बढ़ा सकेंगे ।
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(8.8) मुआवजे में प्राप्त राशि करमुक्त होगी
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सेक्शन-जूरी ट्रायल : मुआवजा दावों के लिए जूरी मंडल द्वारा सुनवाई ।
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(J.1) [NLAO के लिए निर्देश]
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NLAO प्रत्येक जिले में एक DJA-जिला जूरी प्रशासक, प्रत्येक राज्य में एक SJA-राज्य जूरी प्रशासक, तथा राष्ट्रीय स्तर पर एक NJA-राष्ट्रीय जूरी प्रशासक की नियुक्ति करेगा ।
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(J.2) [ NJA, SJA, DJA, NLAO, NLAO के अधीनस्थ अधिकारी तथा सभी भू स्वामियो के लिए निर्देश]
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(J.2.1) व्यक्ति या इकाई जिसकी भूमि का अधिग्रहण किया गया है, यदि यह महसूस करता है कि उसे अधिग्रहण के एवज में कम मुआवजा मिला है, तो वह उस जिले के जिला जूरी प्रशासक के समक्ष वाद दायर कर सकता है, जिस जिले में अमुक भूखंड स्थित है ।
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(J.2.2) प्रत्येक मुआवजा दावे के निस्तारण के लिए जिला जूरी प्रशासक जिले की मतदाता सूची में से रेंडमली चयन करते हुए 30 से 55 वर्ष आयु वर्ग के उन नागरिको की जूरी बुलाएगा जिन्हें पिछले 10 वर्ष की अवधि में किसी जूरी मंडल में जूरी सदस्य के रूप में नही बुलाया गया हो तथा उन्हें कभी किसी अपराध के लिए दोषी नही पाया गया हो ।
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(J.2.3) जूरी मंडल का आकार- जूरी मंडल में जूरी सदस्यों की न्यूनतम संख्या 12 तथा अधिकतम संख्या 1500 सदस्य होगी । यदि दिए गए मुआवजे और मांगे गए मुआवजे में 10 लाख रू का अंतर होगा तो जूरी मंडल 12 सदस्यीय होगा, तथा दावे की राशि में प्रति 5 लाख रू की बढ़ोतरी पर एक जूरी सदस्य बढ़ा दिया जाएगा । किन्तु यह संख्या 1500 सदस्यों से अधिक नही होगी ।
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(J.2.4) जिला जूरी मंडल द्वारा दिए गए फैसले के खिलाफ प्रवृत कानूनों के अनुसार उच्च जूरी मंडल या उच्च न्यायलय तथा तदुपरांत उच्चतम जूरी मंडल या उच्चतम न्यायलय में अपील की जा सकेगी ।
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सेक्शन-राईट टू रिकाल : RTR-NLAO, राष्ट्रीय भूमि अधिग्रहण अधिकारी के लिए राईट टू रिकाल प्रक्रिया :

(RTR.1) [केबिनेट सचिव, केंद्र सरकार या उनके द्वारा नियुक्त किये गए अधिकारी के लिए निर्देश]
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यदि कोई नागरिक मतदाता NLAO बनना चाहता है तो वह केबिनेट सचिव के समक्ष उपस्थित होकर या अपने वकील के माध्यम से शपथपत्र प्रस्तुत करेगा । केबिनेट सचिव सांसद के चुनाव के लिए निर्धारित राशि के बराबर राशि जमा कर ऐसे शपथपत्र को दर्ज कर लेगा ।
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(RTR.2) [पटवारी/तलाटी के लिए निर्देश]

यदि किसी जिले का मतदाता पटवारी कार्यालय में अपने मतदाता पहचान पत्र के साथ उपस्थित होकर NLAO के लिए अनुमोदन दर्ज कराता है, तो पटवारी 3 रू शुल्क लेकर उसे कम्पूटर में दर्ज करेगा तथा बदले में एक रसीद देगा, जिस पर उसकी मतदाता पहचान संख्या, अनुमोदित उम्मीदवारों के नाम, समय तथा दिनांक अंकित करेगा । मतदाता अधिक से अधिक पांच उम्मीदवारों को अनुमोदित कर सकेगा ।
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(RTR.3) [पटवारी/तलाटी के लिए निर्देश]
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पटवारी नागरिक द्वारा दर्ज करायी गयी प्राथमिकता के अनुसार उम्मीदवारों के अनुमोदनों को प्रधानमन्त्री की वेबसाईट पर उसकी मतदाता संख्या के साथ दर्ज करेगा ।
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(RTR.4) [पटवारी/तलाटी के लिए निर्देश]
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यदि कोई मतदाता अपने किसी अनुमोदन को रद्द करवाता है तो पटवारी बिना कोई शुल्क लिए उसे रद्द कर देगा, तथा इसे प्रधानमन्त्री की वेबसाईट पर दर्ज करेगा ।
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(RTR.5) [केबिनेट सचिव के लिए निर्देश]
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पिछले महीने के अंतिम दिन तक उम्मीदवारों को प्राप्त नागरिको के अनुमोदनों की संख्या को केबिनेट सचिव हर महीने की 5 तारीख को प्रकाशित करेगा ।
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(RTR.6) [प्रधानमन्त्री के लिए निर्देश]
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यदि किसी उम्मीदवार को कुल मतदाताओं के 51% अनुमोदन प्राप्त हो जाते है, ( कुल पंजीकृत मतदाताओं के 51%, न कि उन मतदाताओं के जिन्होंने अनुमोदन किया है ) तो प्रधानमन्त्री उसे NLAO के पद पर नियुक्त कर सकते है या उन्हें ऐसा करने की आवश्यकता नही है अथवा प्रधानमन्त्री अपने पद से इस्तीफा दे सकते है या उन्हें ऐसा करने की आवश्यकता नही है । इस सम्बन्ध में प्रधानमन्त्री का फैसला अंतिम होगा ।
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सेक्शन-5. टी सी पी – जनता की आवाज के प्रावधान :

(टी सी पी -1) [जिला कलेक्टर के लिए निर्देश]
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यदि कोई नागरिक मतदाता इस क़ानून में कोई संशोधन करना चाहता है तो वह कलेक्टर कार्यालय में उपस्थित होकर शपथपत्र प्रस्तुत कर सकेगा । कलेक्टर 20 रू प्रति पृष्ठ की दर से शुल्क लेकर इसे प्रधानमन्त्री की वेबसाईट पर दर्ज करेगा और बदले में छपी हुयी रसीद देगा ।
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(टी सी पी -2) [पटवारी/तलाटी के लिए निर्देश]
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यदि कोई मतदाता इस अधिनियम के किसी सेक्शन, अनुच्छेद या धारा में संशोधन चाहता है या टी सी पी की धारा एक के तहत दर्ज किये गए किसी शपथपत्र पर अपनी ‘हाँ’ या ‘नही’ दर्ज कराता है, तो पटवारी 3 रू लेकर उसे दर्ज करेगा तथा प्रधानमन्त्री की वेबसाईट पर डाल देगा ।
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(टी सी पी -3) [प्रधानमन्त्री तथा सभी के लिए निर्देश]
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यदि किसी शपथपत्र पर कुल मतदाताओं के 51% मतदाता ‘हा’ँ दर्ज कर देते है, तो प्रधानमन्त्री ऐसे शपथपत्र पर कार्यवाही कर सकते है, या इस्तीफा दे सकते या उन्हें ऐसा करने की जरुरत नही है । प्रधानमन्त्री का फैसला अंतिम होगा । नागरिको की ‘हाँ’/’नही’ बाध्यकारी नही होगी ।

========ड्राफ्ट की समाप्ति======

 

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