विदेशों में बैन हैं ये प्रोडक्ट, लेकिन भारत में धड़ल्ले से बिक रहे हैं क्योकि

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भारत की बेस्ट सेलिंग कार मारुति-सुजुकी अल्टो 800, टाटा नैनो और ह्यूंदै i10 ग्लोबल एनसीएपी के इंडिपेंडेंट क्रैश टेस्ट में फेल होने के बाद भी न केवल अपने बाजार में बिक रही हैं, बल्कि पसंद भी की जा रही हैं। हमारी जान की कोई कीमत है या नहीं!

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‘द हिंदू’ में साल 2010 में छपी एक खबर के मुताबिक देश में बिकने वाले ब्रैंडेड शहद दूषित होता है। जब सेंटर फॉर साइंस ऐंड इन्वाइरनमेंट ने भारत में बिकने वाले 12 ब्रैंड्स के शहद के नमूनों की जांच की तो इनमें से 11 ब्रैंड्स में 6 हानिकारक एंटीबायॉटिक्स पाए गए। इन 12 ब्रैड्स में डाबर, हिमालया, पतंजलि, बैद्यनाथ, खादी और 2 बाहर के ब्रैंड्स शामिल थे। भारतीय कंपनियां शहद का निर्यात करते समय इस बात का ध्यान रखती हैं कि शहद में एंटीबायॉटिक्स न मिले हों, या सीमित मात्रा में मिले हों, क्योंकि बाहरी देशों में शहद में एंटीबायॉटिक्स का प्रयोग या तो बैन है, या फिर सीमित मात्रा में होता है, लेकिन यही कंपनियां अपने देश में ऐसा कोई बैन न होने के चलते अपने ही लोगों की सेहत से खिलवाड़ कर रही हैं।

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डिस्प्रिन, नोवाल्जिन, डी-कोल्ड, विक्स ऐक्शन-500, एंट्रोक्विनॉल, फ्यूरॉक्सॉन ऐंड लोमोफेन, निमुलिड और ऐनल्जिन जैसी दवाओं कि लंबी लिस्ट है जो बाहरी देशों में बैन हैं, लेकिन भारत में धड़ल्ले से बिक रही हैं।

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अगर आप किंडर जॉय या किंडर सरप्राइज एग अमेरिका ले जाने की कोशिश करेंगे तो आप पर एक अवैध किंडर एग के लिए 2,500 डॉलर का फाइन लग जाएगा। इस चॉकलेट एग में सरप्राइज टॉय छिपा होने के कारण इसे अमेरिका में बैन कर दिया या है। उनका मानना है कि कैंडी के अंदर टॉय छिपा होने के कारण बच्चों का गला चोक होने का खतरा रहता है, लेकिन हमारे यहां के बच्चों को तो खतरों से खेलने की आदत है। है न!

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67 ऐसे पेस्टिसाइड हैं जो कई देशों में बैन हैं, लेकिन भारत में अब भी बिक रहे हैं। केंद्र सरकार द्वारा इन पेस्टिसाइड्स की जांच के लिए गठित की गई समिति के विशेषज्ञों ने भी इनमें से अधिकतर पेस्टिसाइड्स को ग्रीन सिग्नल दे दिया, और कुछ पेस्टिसाइड्स के नियंत्रित उपयोग की हिदायत देते हुए उन्हें भी मार्केट में बिकने का सर्टिफिकेट दे दिया। कार्बेरिल, एसीफेट, डाइमेथोएट, क्लोरपाइफॉस, लिंडेन, क्विनल्फॉस, फॉस्फोमिडॉन, कार्बैंडिज्म, 2.4-D और ग्लाईफोसेट जैसे हानिकारक पेस्टिसाइड्स अभी भी भारत में उपयोग किए जाते हैं।

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