भूख रोकने के नुकसान और उपवास का सही तरीका जिससे कभी कमजोरी नहीं आयेगी

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दोस्तों जब आप जब भोजन कर रहे है या पानी पी रहे है या कोई भी वस्तु आपके शरीर के अंदर जा रही है तो हमेशा बैठकर ही करिये. खड़े खड़े कुछ मत कीजिए. ये खड़े होकर खाना और खड़े होकर पीना, सब तकलीफ देने वाले बहुत बुरे लक्षण है. इससे बहुत तकलीफ आयेगी आपको भविष्य में .

आयुर्वेद में इसे बहुत सख्ती से कहा है कि खड़े होकर खाना और खड़े होकर बिलकुल ना करे चाहे पीना कुछ भी पीना हो या कुछ भी खाना हो . इसका कारण शरीर का गुरुत्व बल है, अगर खड़े होकर खाते है तो वो बल ज्यादा होता है और बैठकर खाते है तो कम. क्योकि शरीर का गुरुत्व केंद्र बदल जाता है. खड़े होकर अगर खाते है तो वो ज्यादा तेजी से अंदर जायेगा जो नुकसान देता है, वो जल्दी पचता नहीं है, शरीर के पचाने वाले अंगो को भी तकलीफ होती है.

अब इसके आगे का नियम इसके आगे का नियम है कि आप जब खा रहे है तो खाने के बीच में अंतर कितना होना चाहिए. जैसे आपने सुबह का नाश्ता या दोपहर का भोजन तो दोनों खाने के बिच में न्यूनतम समय 4 घंटे जरूरी है. इसका सीधा सा मतलब ये है कि अगर अभी आपने 12 बजे खाना खाया तो दूसरा कुछ भी खाए वो 4 बजे के पहले नही होना चाहिए.

अब ऐसे ही अधिकतम समय पर चर्चा कर लेते है. अधिक से अधिक कितना होना चाहिए तो अधिक से अधिक समय 6 घंटे का है. दोपहर का भोजन और शाम के भोजन में अधिक से अधिक अंतर 6 घंटे और कम से कम अंतर 4 घंटे. आप इसको जिंदगी भर मेन्टेन करे. आप हमेशा इस अंतर को बनाए रखिये.

आब आपके मन में एक सवाल आ रहा होगा कि अगर 6 घंटे से ज्यादा अंतर हो जाये और किसी कारण से भोजन नहीं खा पाते है तो क्या करे. तो आप ध्यान रखिये कि जैसे ही 6 घंटे आपके पुरे हो रहे है तो आप बीच बीच में थोडा थोडा पानी पीते रहिये, हर आधे घंटे या 40  मिनट में एक या आधा गिलास पानी पीते रहिये. आप पानी की जगह जूस भी पी सकते है. कुछ फल भी खा सकते है.

अब आपके मन में सवाल आएगा कि इसका क्या कारण है, इसका ये कारण है कि आपके शरीर में हमेशा एसिड बनता है, जिसको हम हाइड्रो क्लोरिड एसिड कहते है. अगर पेट में कुछ है तो वो हाइड्रो क्लोरो एसिड है जो खाने को पचाने में उपयोगी होता है और अगर पेट में कुछ नही है तो ये एसिड आपके पेट को खाना शरू कर देता है. और जब एसिड पेट को खाना शुरु करेगा तो उसी में से बीमारी निकलती है जैसे अल्सर, पेटिक अल्सर. मतलब ये कि ज्यादा देर भूखा रहना अच्छा नही है. अगर भूखा रहना है तो फिर उसका नियम है

जैसे आपको उपवास करना है तो उपवास का भी आयुर्वेद में नियम है. एक दिन का उपवास करना है, उसका लग नियम है. दो दिन का करना है, अलग नियम है. आठ दिन का करना है, अलग नियम है ऐसे ही 15 दिन और 1 महीने के उपवास का भी नियम है. सभी उपवासों के अलग अलग नियम है. आयुर्वेद में इसका अलग से पूरा अध्याय है, लेकीन सामान्य नियम जो राजीव भाई ने बताया कि किसी भी कारण से आपको उपवास करना पड़े तो हर आधे घंटे या 40 मिनट में आधा गिलास पानी जरुर पीते रहे ताकि आपके शरीर को कोई भयंकर बीमारी न लग जाये.

अगर आपका उपवास ऐसा है जिसमे आप कुछ नही ले सकते तो पानी जरुर लेते रहिये और अभी एक भाई ने जो पूछा था कि निम्बू मिलाया हुआ पानी ले सकते है क्या तो इसका जवाब भी दे दू, अगर आप नींबू डालकर लेते है तो बेहतर है. और अगर आप चाहे तो उसमे थोडा शहद मिला दे तो वो और भी बेहतर है लेकिन एक बात का ध्यान रखे जो लोग जैन धर्म का पालन करते है, वो शहद ना मिलाए क्योकि जैन धर्म में शहद खाना निषेध है. अगर आप चाहे तो उस पानी में थोडा गुड मिलाके पीजिये.

आपका उपवास कितना भी करना है एक दिन का या एक महीने का बीच बीच में पानी पीते रहिये. अपने पेट को खाली मत रखिये. अगर किसी कारणवश पानी ज्यादा नहीं पी सकते तो पानी जैसा ही कुछ पीते रहिये. जैसे रस पीते रहिये, फल खाते रहिये. केले को छोडकर सभी फलो में 80% तक पानी हो होता है केला एक ऐसा फल है जिसमे पानी सबसे कम है. कई फलो में तो 90% तक पानी होता है. उपवास की स्थिति में ये जरुर करिये और समान्य रूप से एक भोजन से दुसरे भोजन के बीच में अधिक से अधिक 4 घंटे का अंतर कम से कम 6 घंटे का अंतर रखिये.

इस विडियो में देखिए कैसे उपवास करना चाहिए >>