भोजन को बनाते समय इन चीजों की जानकारी घर की महिलाओं को होना बहुत आवश्यक है

2931

नमस्कार दोस्तों, एक बार फिर से आपका हमारी वेबसाइट में बहुत बहुत स्वागत है. यहाँ आपको राजीव दीक्षित जी के हर प्रकार के घरेलू नुस्खे एवं औषधियां मिलेंगी. आज जो हम आपको नियम बताने जा रहें हैं, वह नियम खास करके माताओं के लिए बहुत जरूरी है. आयुर्वेद में अष्टांग हृदयम में इस नियम को बहुत महत्वपूर्ण बताया गया है.

भोजन को बनाते समय जो भी बर्तन का आप इस्तेमाल करें, उसका मुंह खुला होना चाहिए जैसे की कड़ाही आदि. इसके इलावा भोजन को पकाते समय या खाते समय सूर्य का प्रकाश और पवन का स्पर्श साथ होना बहुत जरूरी है. पहले जमाने में लोग चूल्हे इस्तेमाल करते थे. वहां सूर्य का प्रकाश हमेशा पड़ता था. आज भी कुछ गाँव में चूल्हे बचे है.

हमेशा भोजन को पकने के लिए ऑक्सीजन की जरूरत रहती है. ऑक्सीजन यानी की आग. आग के बिना भोजन का पकना असंभव है. इसलिए भोजन पकाने वाला बर्तन जितना खुला होगा, उतनी ही ज्यादा ऑक्सीजन और पवन उसको मिलेगी. इससे हमारा भोजन बहुत अच्छे से पकता है और बहुत ही स्वादिष्ट पकता है. इसका सीधा सा मतलब एक ही है कि प्रेशर कुकर में खाना मत बनाइए. क्योंकि वह खुला हुआ नहीं है. प्रेशर कुकर चारों तरफ से बंद है ना उसमें पवन जा सकता है और ना ही प्रकाश जा सकता है. उसमें से पवन तो बाहर आ सकता है लेकिन अंदर नहीं जा सकता. क्यों कि कोई रास्ता नहीं है. इसलिए कुकर का खाना क्वालिटी में सबसे खराब होता है.

विज्ञानियों की रिसर्च के अनुसार अगर डाल को कुकर में बना कर देखें और भगोले में बनाकर देखें तो आपको साफ़ पता चल जायेगा की कुकर में बनी डाल के माइक्रो न्यूट्रिएंट्स, खुले मुंह वाले बर्तन के माइक्रो न्यूट्रिएंट्स के मुकाबले बहुत कम होते है. दोनों की क्वालिटी में अंतर आ जाता है. इसके दो कारण है, एक तो कुकर में पवन नहीं गया और दूसरा सूर्य का प्रकाश नहीं गया. और तो और कुकर एलुमिनियम का है. जबकि अल्मुनियम दुनिया का सबसे खराब मेटल है खाना बनाने के लिए.

एलुमिनियम का आविष्कार इसलिए हुआ ताकि उससे हवाई जहाज, मिसाइल, चंद्रयान, रॉकेट आदि बनाये जा सकें. क्योंकि इसको प्रेशर बर्दाश्त करने की ताकत बहुत है. एलुमिनिय का हवाई जहाज 35000 फीट पर होता है तो एयर प्रेशर सबसे ज्यादा होता है. इसके उल्ट अगर स्टील का हवाई जहाज बनाएंगे तो फट जाएगा यानी कि ब्लास्ट हो जाएगा. परन्तु एल्युमीनियम खाना बनाने के लिए अच्छा धातु नही है.

इसके इलावा अगर आप सोलर कुकर का भी इस्तेमाल करना चाहते हैं, तो ध्यान रखिये की उसमे एल्युमीनियम का उपयोग न किया गया हो. राजीव जी ने बताया की उनके पास हजारों मरीज़ इसे थे जो कि ना तो कोई नशा करते थे न ही कुछ. फिर भी वह दमा, अस्थमा आदि जैसे रोगों का शिकार रहते थे. तो जब राजीव जी ने उनके घर जाकर देखा तो उन्हें समझ आये की उनके रहन सहन में कोई कमी नही थी. बल्कि वह जिस बर्तन में खाना बनाते या खाते थे, वह एल्युमीनियम से बने हुए थे. इसका कारण ये थे की लोगो के अनुसार एल्युमीनियम बाकी मेटल्स के बदले अधिक सस्ता होता है.

एल्युमीनियम का अविष्कार अंग्रेजो के भारत रहने के समय में हुआ था. तब 1905 में उन्होंने इससे हवाई जहाज़ बनाये. तो एक बार उन्हें किसी वैज्ञानिक से पता चला की एल्युमीनियम के बर्तन में खाना कभी नही पकाना या खाना चाहिए क्यों कि ये ज़हर सिद्ध हो सकता है. लेकिन तब अंग्रेजो ने सोचा की क्यों न इन बर्तनों में देश के क्रांतिवीर नोज्वानो को खाना खिलाया जाये, जो तब उनकी जेलों में क़ैद थे. ऐसे उनके लिए सांप भी मर जाता और लाठी भी नही टूटती. अभी आप जेल में जाएंगे तो हमारे भाई बंधु जो अभी भी जेल में है उनको एलुमिनियम के बर्तन में ही खाना दिया जाता है.

हमारी आप सब से विनती है कि आप घर में कोई भी अल्मुनियम का बर्तन  कभी मत लाइए. कुकर को जितना कम इस्तेमाल करें उतना अच्छा. फिर आप कहेंगे उस में समय कम लगता है, तो हमने भी उसका  कैलकुलेशन किया है जिसके अनुसार कुकर में दाल बनाने में 10 मिनट लगता है और भगोने में 25 मिनट लगता है. बस इतना ही अंतर है 15 मिनट बचाते हैं आप और 1 दिन में महीने का फिर साल का फिर 100 साल का कैलकुलेशन हमने किया, जितना समय आप बचाते हैं, उतना समय तो आपका हॉस्पिटल में चला जाता है. जब आप दमा अस्थमा के मरीज हो जाते हैं और वह समय बचाया हुआ वहां जाता है. पैसे के साथ समय तो जाता ही है उसके साथ पैसा भी जाता है तो अल्टीमेटली कोई बेनिफिशियल नहीं है.

अगर आपको सस्ता बर्तन ही चाहिए तो आप लोग पीतल या कांसे के बर्तनों का उपयोग कर सकते है. हमेशा कांसे के बर्तन में खाएं तो अमृत है. और लोहे के बर्तन में खाएंगे तो वह लोहे ही जैसा है. कांसे के बर्तन में दही खट्टा होता है, लेकिन जब आप दही में गुड मिलाकर कांसे के बर्तन में खाएंगे तब हरा नहीं होगा दही जैसे ही खट्टा हुआ तुरंत दूध डाल दीजिए.

खाना पकाने के लिए मिट्टी सबसे अच्छी है. कांच भी मिट्टी का ही एक स्वरूप है. कांच से जो बनता है ना, वह मिट्टी से ही बनता है या फिर सिलिका से बनता है. सिलिका मान्य मिट्टी. कांच का बर्तन भी मिट्टी के बर्तन की जगह ले सकते हैं लेकिन वह थोड़ा महंगा है परन्तु उनसे सस्ती मिट्टी है.

अधिक जानकारी लिए नीचे दी गयी विडियो देखना ना भूलें.