जानिए अजवाइन में ऐसा क्या है कि दोपहर में लेनी चाहिए लेकिन रात को नहीं

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कौन कौन सी चीजें हैं जो हमारे वात पित्त और कफ तीनों को कंट्रोल कर सकती हैं ये तीनों सम भाग में रहे तो अच्छा है तो बागभट्ट जी कहते हैं कि रसोई से बाहर जाने की जरुरत नही है सब वहीं है बाग़भट्ट जी कहते हैं कि दुनिया का सबसे बड़ा औषधि केंद्र हमारा रसोई घर ही हैं जिसे हम रसोई में मसाला कहते हैं दरअसल वो औषधीयां ही हैं. मसाला शब्द हमारे देश का नही हैं ये एक अरबिक शब्द है हमारे देश का शब्द हैं औषधि हमारे देश के जितने भी दसवीं शताब्दी से पहले के पुराने शास्त्र हैं कहीं भी मसाला शब्द का प्रयोग नही हैं सभी जगह औषधि का यूज हुवा है. मुगलों के राज्य के बाद के शास्त्रों में मसाला शब्द का प्रयोग हुवा हैं सब जगह औषधि शब्द है जैसे जीरा औषधि धनिया औषधि.

ये सभी रसोई की जो भी औषधियां हैं. ये सब चिकित्सा के लिए है. हमारे पुराने समय की दादी नानी हैं जिन्होंने अपनी बेटी पोतियों को सब्जी में ये ओषधियों का यूज करना सिखाया कि कितना जीरा डालेगा, कितना हिंग डलेगा और दूसरी औषधियां कितनी डलेंगी.

वो सभी वैज्ञानिक और चिकित्सक थीं वे जानती थीं कि हर रोज हमारे शरीर में वात पित्त और कफ की मात्रा सम विषम होती रहती है जिस समय जो प्रकोप( वात, पित्त, कफ) बढता है उस समय की सब्जी में वो ही औषधि डाली जाती है जिससे की वह प्रकोप को कंट्रोल कर सके जैसे की दोपहर की सब्जी जो बनती है उसमें आजवाइन जरुर डाली जाती है और वोही सब्जी अगर रात को भी बनाई जाए तो उसमें आजवाइन नही डाली जाती क्योंकि आजवाइन पित्त नाशक है और दोपहर को पित्त भड़कता है जो की आजवाइन से कंट्रोल हो जाता है इसीलिए दोपहर को दहीं और मठठे में आजवाइन डाली जाती है

अंग्रेजों के आने के बाद हम उनके गुलाम हो गये जब हम जी डी पी का कैलकुलेशन करते हैं तो अंग्रेजों के तरीके से जब चोरी और भ्रस्टाचार बढ़ जाये तो पुलिस का खर्च बढ़ जाता है और हमारे देश की जी डी पी बढ़ जाती है लेकिन महिलाओं द्वारा रसोई में किये गये काम की तुलना कोई सरकार नही करती क्योंकि अंग्रेजों के यहाँ महिलाओं द्वारा किये गये काम को कोई महत्त्व नही दिया जाता

2000 साल तक युरोप में महिलाओं द्वारा किये गये काम के बदले उन्हें पुरूषों से दो गुना कम वेतन दिया जाता था आज भी कई देशों में ऐसा ही है क्योंकि वो लोग महिलाओं में आत्मा ही नही मानते महिला कुछ करे तो बेकार उर उनके यहाँ से यही सोच हमारे देश में आ गयी अंग्रेजो के 200 साल के समय में हमारे देश के सब दिमाग ख़त्म हो गये सोचना विचारना बंद हो गया और महिलाओं के काम को महत्त्व देना बंद कर दिया जो कैलकुलेशन वो ले आए उसे ही हम सबने मान लिया

लेकिन महिलाएं जो कर रही हैं वो किसी डॉक्टर से कम नही हैं बस फर्क इतना है की डॉक्टर को ये जानकारी देने के लिए हम फीस दे रहे है और दादी नानी फोकट में ये एडवाइस दे रही है की धनिया खाओ जीरा खाओ आजवाइन खाओ आपके पेट की गैस खत्म हो जाएगी साढे तीन हजार साल से महिलाएं आजवाइन का यूज कर रही हैं कि गैस ख़त्म हो जाएगी एसिडिटी ख़त्म हो जाएगी लेकिन कोई महत्त्व नही दिया जा रहा अगर आप सब्जी में आजवाइन नही डालते तो खाना खाने के बाद थोडा ले लें अगर आजवाइन सही नही बैठती तो उसे काले नमक के साथ लें उससे बैलेंस बैठ जायेगा और 3 दिन में आपकी गैस ख़त्म हो जाएगी बाग़भट्ट जी कहते हैं की हमारी रसोई में घी के बाद जो पित्त नाशक है वो है आजवाइन.

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