5 ऐसे डॉक्टरों की कहानियां जो मुफ्त इलाज करके समाज में बदलाव ला रहे

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डॉक्टर अब सिर्फ बीमारियों का इलाज ही नहीं कर रहे हैं बल्कि लोगों को आत्म निर्भर भी बना रहे हैं। देश के कुछ ऐसे डॉक्टर्स भी हैं जो समाज को स्वस्थ बनाने के साथ बदलाव भी ला रहे हैं। कल वर्ल्ड डॉक्टर्स डे है। भारत के प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. विधान चन्द्र रॉय को श्रद्धांजलि और सम्मान देने के लिए हर एक जुलाई को चिकित्सक दिवस के रूप मनाया जाता है। इस मौके पर जानिए देश के 5 ऐसे डॉक्टर जो वाकई धरती पर भगवान का रूप साबित हो रहे हैं…

1- डॉ. योगी ऐरन

  • देहरादून के डॉ. योगी ऐरन एक प्लास्टिक सर्जन हैं और उम्र 80 साल है। डॉ. योगी का पूरा जीवन ऐेसे लोगों के लिए समर्पित रहा जो आग में झुलस चुके हैं या जंगली जानवर का शिकार बन चुके हैं।
  • ऐसे लोगों को बचाने के लिए वह सालभर में करीब 500 से अधिक सर्जरी निशुल्क करते हैं। इस मिशन में एक असिस्टेंट भी जो करीब 25 सालों से उनके साथ काम कर रहा है। इनका बेटा भी इस काम में उनकी मदद करता है।
  • अपनी क्लीनिक चलाने के अलावा डॉ. योगी अलग-अलग गांवों में जाकर साल में कई बार 15-15 दिन का कैंप लगाकर सर्जरी करते हैं। कैंप के लिए वे करीब 15 डॉक्टरों की टीम अमेरिका से भी बुलाते हैं और निशुल्क इलाज करते हैं।
  • कैंप के लिए ऐसे गांवों को चुनते हैं जहां आमतौर पर कोई सुविधाएं नहीं पहुंच पातीं। हिमालय के पिछड़े गांवों में करीब 10 हजार लोग अभी भी इलाज के लिए वेटिंग लिस्ट में हैं। कैंप के दौरान डॉक्टरों के साथ मिलकर करीब 10 सर्जरी रोजाना की जाती हैं। इसके अलावा डॉ. योगी साइंस पार्क का भी निर्माण करा रहे हैं।

2- डॉ. अभिजीत सोनवाणे

  • डॉ. अभिजीत सोनवाणे अक्सर पुणे में सड़क किनारे बैठे गरीब लोगों से उनका हाल पूछते देखे जाते हैं। 4 साल पहले इस्तीफा देकर उन्होंने सोहम ट्रस्ट की शुरुआत की। लक्ष्य था, ऐसे लोगों का निशुल्क इलाज करना जो बेहद गरीब हैं।
  • डॉ. अभिजीत के मुताबिक, निशुल्क इलाज की शुरुआत ऐसे लोगों से की जो सड़क किनारे रहते हैं और भीख मांगते हैं। उनकी मदद करना मेरे लिए कोई अभियान नहीं बल्कि एक जिम्मेदारी है जो मैं निभा रहा हूं।
  • शुरुआत ऐसे लोगों के इलाज से हुई लेकिन बाद में इन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए कोशिश की। इस पहल का नाम रखा ‘बैगर टू आंत्रप्रेन्योर’। इसके तहत भिखारियों को पैसे कमाकर सम्मान से साथ जीना सिखाया गया।
  • डॉ. अभिजीत ने उन्हें नाई की दुकान खोलने, मंदिर के बाहर फूल बेचने, दीया बनाने जैसे काम शुरू करने में मदद की है। उनकी पहल का नतीजा है कि कभी भीख मांगने वाले 37 लोग अब पैसे कमा रहे हैं।

3- डॉ. मनोज दुरईराज

  • डॉ. मनोज दुरईराज कार्डियक सर्जन हैं और पुणे में इनका क्लीनिक हैं। वह मेरियन कार्डियक सेंटर और रिसर्च फाउंडेशन चला रहे हैं यहां ऐसे लोगों को निशुल्क इलाज किया जाता है जिनके हार्ट में डिफेक्ट है।
  • इसकी शुरुआत इनके पिता डॉ. मैनुअल दुरईराज ने की थी जो कार्डियोलॉजिस्ट थे जिन्होंने 2 दशक तक भारतीय आर्मी और तीन पूर्व राष्ट्रपति की देखभाल की। 1991 में डॉ. मनोज ने मेरियन कार्डियक सेंटर और रिसर्च फाउंडेशन से जुड़े और 2005 में दिल्ली एम्स से पढ़ाई पूरी के बाद पिता की विरासत को आगे बढ़ाया।
  • डॉ. मनोज अब तक 350 से अधिक निशुल्क हार्ट सर्जरी कर चुके हैं इनमें ज्यादातर बच्चे शामिल हैं जो जन्मजात दिल की बीमारी के साथ पैदा हुए थे।
  • डॉ. मनोज का कहना है पिता ऐसे लोगों की मदद करते थे जिनके पास इलाज के लिए पैसा नहीं और दूर-दराज इलाकों से आते थे। उनकी इस बात ने मुझे प्रेरित किया और मैं भी वही कर रहा हूं।
  • डॉ. मनोज आसपास के क्षेत्रों में जाकर उन लोगों का इलाज करते हैं जिनके पास महाराष्ट्र का बीपीएल कार्ड नहीं है। कार्डियक सेंटर में सिर्फ सर्जरी ही नहीं ऑपरेशन के बाद निशुल्क दवाइयों और देखरेख का भी ध्यान दिया जाता है।

4- डॉ. मनोज कुमार

  • ब्रिटेन में 15 साल काम कर केरल लौटे मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. मनोज कुमार का लक्ष्य ग्रामीण क्षेत्र में रह रहे मानसिक रोगों से पीड़ित लोगों का निशुल्क इलाज करना है।
  • केरल के रहने वाले डॉ. मनोज के मुताबिक, सरकार मानसिक रोगियों के लिए बेहतर सुविधाएं मुहैया नहीं करा रही इसलिए मैं अपने राज्य के लोगों की मदद कर रहा हूं।
  • डॉ. मनोज ने केरल के कोझिकोड में 2008 में मेंटल हेल्थ एक्शन ट्रस्ट की स्थापना की। उनकी इस पहल में कई विशेषज्ञ और आम लोग भी वर्तमान में ट्रस्ट से करीब 1 हजार वॉलेंटियर जुड़े हैं। इनमें होममेकर, रिटायर्ड प्रोफेशनल और ऐसे लोग शामिल हैं जो दूसरों की मदद करने के लिए तत्पर रहते हैं।
  • बीमार होने पर परिजन सबसे इन्हीं वॉलेंटियर से संपर्क करते हैं। अधिक गंभीर स्थिति न होने पर टीम में मौजूद प्रशिक्षित प्रोफेशनल्स इलाज करते हैं। केरल के मलप्पुरम, वायनाड, कोझिकोड, थ्रिसूर, अलेप्पी समेत केरल में ट्रस्ट के 25 सेंटर्स हैं। हर केंद्र की स्थापना गांव में ही की गई है।
  • केंद्रों में प्रशिक्षित सायकोलॉजिस्ट और सायकियाट्रिक सामाजिक कार्यकर्ता हैं जो मरीजों की काउंसलिंग करने के साथ थैरेपी देते हैं। लेकिन दवाएं देने का काम डॉ. मनोज कुमार करते हैं।
  • पेशेंट से दूर या इमरजेंसी की स्थिति में डॉ. मनोज कुमार वॉट्सएप, स्काइप और गूगल हैंगआउट की मदद से वीडियो कॉलिंग के जरिए जुड़ते हैं। उनकी स्थिति जानने के बाद थैरेपी दें या दवाएं, केंद्र के लोगों को निर्देश देते हैं।

5- डॉ. किरण मार्टिन

  • डॉ. किरण मार्टिन बाल रोग विशेषज्ञ हैं। दिल्ली की 60 स्लम कॉलोनियों के 5 लाख लोगों को सेवाएं दे रही हैं। इसकी शुरुआत 1988 में हुई थी, जब वह पहली बार साउथ दिल्ली के स्लम एरिया में कॉलरा फैलने के बाद पहुंचीं थी।
  • यहां के लोगों की मदद करने के लिए उन्होंने पेड़ के नीचे कुर्सी-मेज रखकर क्लीनिक शुरू की। आशा नाम का एक संगठन बनाया और महिलाओं को ट्रेनिंग देकर उन्हें कम्युनिटी हेल्थ वर्कर बनाया।
  • इन महिलाओं को प्रशिक्षित करने के बाद फर्स्ट-एड बॉक्स दिया ताकि वे बीमारी और संक्रमण को रोकने के लिए प्राथमिक उपचार कर सकें। यह टीम महिलाओं को पोषण, सेहत और कैसे बच्चों को बीमारियों से दूर रखें इसकी जानकारी देती है।
  • गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए आशा कार्यकर्ता लैब भी संभाल रही हैं। यहां ईसीजी, एक्स-रे जैसी सुविधाएं दी जा रही हैं। लोगों को साफ पानी मिले इसके लिए डॉ. किरण ने कई जगह हैंडपंप भी लगवाए हैं।
  • गरीब लोगों के लिए फाइनेंस स्कीम की शुरुआत की है। जिसके मुताबिक, लोग खाता खुलवा सकते हैं और कर्ज भी ले सकते हैं। ये सुविधा झोपड़ियों में रहने वालों के बच्चों को शिक्षित करने और रोजगार शुरु करने में मदद कर रही है।

Source : DB Group