प्रमाणित कारण के साथ जानिए कौन सा उपवास आपको करना चाहिए और कौन सा नहीं

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एक वेग के बारे में वागभट्ट जी कहते हैं कि यदि आप इसे रोकेंगे तो बहुत तकलीफ होने वाली है. इस वेग का नाम है भूख. ये भूख एक ऐसा वेग है जो अगर आपने इसको रोकने की कोशिश कि तो सबसे ज्यादा 103 रोग उन्होंने गिनाये है.

अगर भूख को रोकने की आपने कोशिश कि तो पहला रोग एसिडिटी से शुरू होगा और आखिरी जायेगा अंतड़ियों का कैंसर(इनटेसटाइनल कैंसर). तो जबरदस्ती भूख को मत रोकिये.

अगर आप उपवास रखतें हैं तो – तो उन्होंने कहा है कि उपवास शरीर की शुद्दी की किर्या है, और वो आगे कहते हैं कि शरीर की शुद्दी होती है तो इसके साथ मन और चित्त दोनों की शुद्दी होती है. तो उपवास एक किर्या है. जो शरीर शुद्दी, मन और चित्त तीनों की शुद्दी के लिए है. लेकिन उसके लिए नियम है.वो कहते हैं कि अगर शरीर में अतिरिक्त कुछ हो रहा है जैसे की खाना खाते हुवे ऐसा लगना कि जरुरत से ज्यादा कुछ खा लिया है. तो आपको तुरंत महसूस हो जायेगा. तो शरीर बता देगा कि आज कुछ जायदा ही खा लिया. तो स्तिथि कुछ ऐसी हो कि आपको किसी चीज का स्वाद अधिक पसंद आ गया या आपको किसी ने आग्रह पूर्ण खिला दिया या मूड ही आपका ऐसा था, या बातें करते करते खा गये और आपको पता न चला. तो ऐसी स्तिथि में जरुर आप उपवास रखिये.

उपवास के नियम

पहला नियम – पहला नियम ये हैं की कभी भी उपवास अगर रखना है तो सप्ताह में एक दिन तो ठीक है. लेकिन उस उपवास वाले दिन नियमित रूप से समय समय पर बीच बीच में पानी पीते रहें. बिना पानी का उपवास अच्छा नही है.

क्यों पीते रहें बीच बीच में पानी आप भले ही उपवास करो लेकिन शरीर में जो अम्ल बनने की किर्या है वो तो रुकने वाली नही है. वो तो तभी रुकेगी जब आप मर जाएंगे. और पेट में जो अम्ल है वो हाइड्रोक्लोरिक एसिड है. जो कि ख़राब अम्लों की गिनती में आता है. तो ये तो पेट में रिलीज़ होता ही रहेगा. क्योंकि वो पेट में खाने पचाने के लिए उत्पन्न होता रहता है, तो खाना आप खायेंगे नही और इसका रिलीज़ होना रुकेगा नही. क्यूंकि शरीर आपके कंट्रोल में नही है वो प्रकृति और भगवन के कंट्रोल में ही है.

थोडा पानी पीते रहे क्यूंकि जो पेट में हाइड्रोक्लोरिक एसिड है, ये डाइल्युट होकर पेशाब के रास्ते निकलता रहे. तो कोई हानि नही पहुंचाएगा.

अगर पानी नही पीया   अगर आप उपवास में पानी नही पियेंगे. तो ये हाइड्रोक्लोरिक एसिड आपकी अंतड़ियों को जला देगा. तब आप कोई गंभीर बीमारी के शिकार होंगे. और तब अगर आप शायद बीमार हो जायें और आपकी बीमारी ठीक भी न होने पाए. क्यूंकि वागभट्ट जी कहते हैं कि शरीर के किसी बी अंग का कोई परमानेंट डैमेज हो गया तो वह दोबारा नही बनता.

पानी ना पीने के नुकसान  फिर आपको पेप्टिक अल्सर होगा, आँतों में घाव बन जायेगा, और फिर वो इतनी ख़राब स्तिथि में लेकर जायेगा तो डॉक्टर कहेगा कि आंते निकाल कर काटो.

ऐसा मत करिए वागभट्ट जी कहते हैं. कि अगर आपने दिन में 3 समय भोजन किया है तो 7वें दिन एक दिन का उपवास रख लीजिये, लेकिन थोडा थोडा पानी पीते रहिये. अगर दुसरे शब्दों में कहें तो निर्जला उपवास मत कीजिये.

हमारे देश में अपने देखा होगा कि जब निर्जला उपवास का समय आता है, तो सात दिन तक निर्जला उपवास रखा जाता है. और महिलाएं लगातार रखती भी हैं बहुत तकलीफ देगा आपको. आप तो भक्ति भाव से करते हैं लेकिन वो जो शारीरिक रूप से तकलीफ देगा वो अच्छा नही है.

वागभट्ट जी ने एक सुंदर वाक्य लिखा है कि जो शाकाहारी लोग हैं इनके लिए उपवास की कोई जरुरत नहीं है, उनके लिए ऐसे ही अच्छा है. दोस्तों अगर हमारे इस लेख और विडियो से किसी की आस्था को कुछ ठेस पहुची है तो हमारी टीम आपसे माफ़ी मांगती है. हमने व्रत को स्वस्थ के साथ जोड़कर उसके बारे में आपको कुछ जानकारी देने का प्रयास किया है. 

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