कैसे अमेरिका ने 10 साल ईरान और इराक का फुद्दू काटा और अपने हतियार बेचे

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युद्ध किस तरह से किए जाते हैं या करवाए जाते हैं एक छोटा उदाहरन आपको देता हूं आपको बिल्कुल स्पष्ट में समझ में आएगा कि हथियार बेचने के लिए क्या-क्या किया जाता है दुनिया में 1979 में अमेरिका का एक अखबार है उसका नाम है वाशिंगटन पोस्ट में एक न्यूज़ आई खबर आई जुलाई के महीने में 16 तारीख को 16 जुलाई 1979 को 16 जुलाई 1979 को  अमेरिका का बहुत बड़े पैमाने पर बिकने वाला खबर वाशिंगटन पोस्ट उसके फ्रंट पेज पर मुख्य पेज पर एक खबर छपी खबर यह थी कि इराक और इरान नाम के दो देश पड़ोसी देश इनके बीच में एक क्षेत्र है दो देशों के बीच में एक  क्षेत्र है उसको अरबी भाषा में शत अल अरब कहते हैं तो शत अल अरब नाम का क्षेत्र है जो इराक ओर उनके बीच में इसमें भयंकर मात्रा में तेल छुपा हुआ है यह खबर वाशिंगटन पोस्ट के फ्रंट पेज पर छप गई अब यह खबर जब छपी तो दोनों देशों की सरकार के कान खड़े हो गए और उन्होंने देखना शुरु किया कि जो ये शत अल अरब नाम का क्षेत्र है इसमें इतना अधिक तेल है और  खबर जब छपी तो उसमें रेफरेंस दिया गया की अमेरिका के जो सेटलाइट अंतरिक्ष में घूम रहे हैं उनसे मिली जानकारी के अनुसार तो और ज्यादा विश्वास हो गया

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अब इसमें अविश्वास का कोई कारण ही नहीं है तो ईरान और इराक दोनों देशों की सरकार के कान खड़े हो गए और दोनों देशों ने यह कहना शुरु कर दिया कि यह जो शत अल अरब है जहां पर ज्यादा मात्रा में तेल छुपा हुआ है ये हमारा है दोनों ने क्लेम करना शुरू कर दिया ईरान ने कलेम  किया इराक में क्लेम किया जब दोनों देशों ने एक ही क्षेत्र परअधिकार जताना शुरू किया तो झगड़ा होना स्वाभाविक था. तो इनका झगड़ा यूनाइटेड नेशन में गया संयुक्त राष्ट्र को तो इस लिए बनाया गया है दो देशों के आपसी झगड़े का निपटारा करने के लिए लेकिन आप जानते हैं कि संयुक्त राष्ट्र काम करता है अमेरिका के इशारे पर पूरी तरह से पूरी तरह से अमेरिका के जेब में रहने वाला संगठन हो गया है अमेरिका किसी भी देश पर अगर हमला करने का फैसला करें तो संयुक्त राष्ट्र उसको पलट नहीं सकता जैसा की अभी आपने इराक के केस में देखा इराक के केस में संयुक्त राष्ट्र के द्वारा बनाई गई रिपोर्ट ये  कहती है कि इराक के पास कोई nuclear वेपन नहीं है अमेरिका कहता है संयुक्त राष्ट्र कहता नहीं है तो फिर संयुक्त राष्ट्र ने कहा कि हम इराक के खिलाफ युद्ध की अनुमति नहीं  दे सकते अमेरिका ने कहा तुम बाजू में बैठो हम युद्ध शुरू करते हैं

संयुक्त राष्ट्र  के सारे प्रस्ताव का उल्लंघन करके अमेरिका ने युद्ध शुरू किया और संयुक्त राष्ट्र कुछ नहीं कर पाया क्योंकि संयुक्त राष्ट्र  एक ऐसा शेर है जिसके दांत नहीं है किसी को काट नहीं सकता सकता है गुरर्रा सकता है बस और अमेरिका के जेब में रहता है संयुक्त राष्ट्र क्योंकि अमेरिका के द्वारा दिए गए  फंड्स पर संयुक्त राष्ट्र की बहुत सारी व्यवस्था चलती हैं फंड्स तो दूसरे देश भी देते हैं लेकिन अमेरिका थोड़ा ज्यादा देती है इसलिए उसकी बात माननी पड़ती है

 तो इसी तरह से 1979  में जब यह घटना घटित हुई तो संयुक्त राष्ट्र में मामला गया संयुक्त राष्ट्र के प्रतिनिधियों ने इसमें कोई फैसला नहीं दिया लिहाजा दोनों देशों ने एक-दूसरे के खिलाफ युद्ध करने का तय कर लिया जब फैसला नहीं हो पाया झगड़े का तो इराक और इरान एक दुसरे के खिलाफ लड़ने लगे वही टाइम में सद्दाम हुसैन इराक का प्रेसिडेंट बना और इसको अमेरिका ने प्रेसिडेंट  बनवाया क्योंकि संयुक्त राष्ट्र सॉरी अमरीका द्वारा समर्थित एक पार्टी है इराक में उसका नाम है  बाथ पार्टी जिसका वो लीडर था  सद्दाम हुसैन तो बाथ पार्टी को सत्ता में लाने का काम अमेरिका ने करवा दिया सद्दाम हुसैन को लीडर बनाने का काम अमेरिका ने करा दिया.

जिस समय सद्दाम हुसैन लीडर बना इराक का उस समय ये पढ़ाई करता था लॉ का स्टूडेंट था  सेकंड ईयर में पढ़ता था बगदाद यूनिवर्सिटी में अमेरिका से इसकी बहुत नजदीकी रही सद्दाम हुसैन की तो अमेरिका ने पैसा देकर समाचारों में काफी कुछ उसके बारे में अच्छी-अच्छी बातें लिख कर लीडर  बना दिया और सद्दाम हुसैन लेटर होकर प्रेसिडेंट हो गया प्रेसिडेंट होने के बाद उसने अमेरिका के कहने पर ईरान के खिलाफ युद्ध शुरू कर दिया इधर अमेरिका ने सद्दाम हुसैन को हथियार बेचना शुरू किया उधर अमेरिका ने ईरान को भी हथियार बेचना शुरू किया दोनों देशों ने भरपूर हथियार खरीदे और एक-दूसरे के खिलाफ इस्तेमाल किए 10 साल तक यह युद्ध होता रहा ईरान और इराक का लाखों लोग इसमें मारे गए और हजारों करोड़ डॉलर के हथियार इसमें खर्च हो गए 10 साल के बाद फिर क्या हुआ जब अमेरिका की कंपनियों ने भरपूर हथियार बेच लिए और उनके सारे खजाने खाली हो गए गोडाउन खाली हो गए तब अमेरिका ने दोनों देशों से कहा की आप शांति वार्ता करो

10 साल तक युद्ध कराया अब कहा शांति वार्ता करो तो शांति वार्ता कराने के लिए एक विशेष सत्र बुलाया गया यूनाइटेड नेशन का उसने दोनों देशों को साथ बिठाया गया और उनको यह कहा गया कि अगर आपके इस क्षेत्र में तेल है तो तेल की खोज कर लो मिलेगा तो आधा-आधा बांट लो है ना कितना सरल है लेकिन 10 साल के बाद जब युद्ध हो गया हथियार बिक गए सबकुछ हो गया खजाने खाली हो गए और दोनों देशों को साथ बिठा कर कहा गया कि तेल है तो खोज लो मिले तो आधा-आधा बांट लो इसमें परेशानी क्या है अब दोनों ही देशों ने यह कहा कहा कि हम तेल की खोज करें तो हमारे पास  उतनी इन्वेस्टमेंट की कैपेसिटी नहीं है क्योंकि हथियार खरीदने में सारे पैसे खत्म हो गए दोनों देशों के जितना भी रिज़र्व था सारा खजाना खाली हो गया पैसा तो सब अमेरिका पहुंच गया तो दोनों देशों को अमेरिका ने कहा अच्छा ठीक है आपके पास ठीक नहीं हैं हम पैसे लगा देते हैं राइट्स हमको दे  दो अमेरिकी कंपनियों को वहां तेल खोजने का पूरा अधिकार मिल गया अमेरिकी कंपनियों ने उस इलाके में तेल खोजना  शुरू किया

2 साल के बाद अमेरिकी कंपनियों ने कहा कि इस इलाके में कोई तेल नहीं है अब देखिए इस इलाके में कोई तेल नहीं है तो दोनों देश खामोश हो कर शांत बैठ गई 10 साल पहले यह खबर आई थी वाशिंगटन पोस्ट में कि इसमें भरपूर तेल है तो इन लोगों ने शिकायत किया वाशिंगटन पोस्ट के खिलाफ के जब वाशिंगटन पोस्ट के खिलाफ शिकायत हुआ तो वाशिंगटन पोस्ट के एडिटर ने क्षमा  मांग लिया कि गलत खबर छप गई माफ कर दीजिए हमको और अमेरिका ने उसकी पैरवी कर दिया कि हां हां माफ कर दीजिए कभी गलत खबर छप जाती है तो कहा गया कि खबर तो सेटेलाइट के माध्यम से आई थी तो सैटेलाइट भी गलती कर सकता है मशीन है ना मशीन तो गलती कर सकती आदमी  कर सकता है आदमी मशीन बनाता है तो मशीन भी गलती कर सकती है

तो लिहाजा वह चैप्टर वहां खत्म हो गया लेकिन खूबसूरती इस पूरी दुर्घटना की यह रही कि दोनों देश एक दूसरे की जान के दुश्मन हो गए एक ही कोम को मानने वाले एक ही कोम मजहब को मानने वाले एक साथ अल्लाह की प्रार्थना करने वाले लोग एक दूसरे की जान के दुश्मन हो गए और इतने जान के दुश्मन हो गए कि उनके बंटवारे हो गए और झगडे शुरू हो गए हो और आज तक रुके नहीं तो युद्ध कैसे कराया जाता है उसका मैंने आपको एक मिसाल दिया इसी तरह से वियतनाम में हुआ था इसी तरह से कोरिया में हुआ था इसी तरह से लैटिन अमेरिका के चिल्ली कोलम्बिया जैसे देशों में हुआ था तो दुनिया के छोटे-छोटे ऐसे देशों में जहां पर सरल प्रकृति के लोग रहते हैं जिनकी प्रकृति बहुत सहज और सरल होने की होती है उन देशों के नेताओं को बरगला कर अधिकारियों को खरीद कर लोगों का दिमाग बदलके  कैसे युद्ध के लिए तैयार किया जाता है उसके लिए पिछले 50 साल से 55 साल से 57 साल से जभी से माने 1945 से बहुत बड़ा पर्यास यूरोप और अमेरिका के द्वारा हो रहा है और वह प्रयास ये है कि उनको हथियार बेचने हथियार बेच कर मुनाफा कमाना है और मुनाफा कमा कर अपने देश को अमीर और अमीर और अमीर  बनाते चले जाना है

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