आप कितना टैक्स सरकार को देते है और सरकार उसमे से कितना आप पर खर्च करती है

7300

हम हर साल  हमारे जीवन की खून पसीने की कमाई से सरकार को टैक्स देते हैं और हम टैक्स दुसरे देशो के नागरिको से बहुत ज्यादा दे रहे हैं दुनिया का कोई देश इतना टैक्स नहीं देता जितना हम देते हैं. अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस या कनाडा कोई भी देश हो वहा के लोग दो या तीन तरह के टैक्स देते हैं वहां पर इनकम टैक्स होता है, वैल्यू एडेड टैक्स होता है और किसी किसी देश में लोकल टैक्स होता है. उनको दो तीन तरह के टैक्स भरने पड़ते हैं. भारत में हम लोगो को 64 तरह के टैक्स भरने पड़ते है हमें अपनी आमदनी पर इनकम टैक्स देना पड़ता है उसी तरह अगर हम कोई कंपनी चलाते हैं तो उसके लिए कॉरपोरेट टैक्स भरना पड़ता है, हम कोई चीज खरीदते हैं तो उस पर हमें सेंट्रल एक्साइज टैक्स देना पड़ता है, उत्पादन कर देना पड़ता है, बिक्री कर देना पड़ता है, वैल्यू एडेड टैक्स देना पड़ता है, सड़क पर चलते हैं तो रोड टैक्स देना पड़ता है. हम जितने टैक्स देते हैं

इस विडियो में देखिए हमारा टैक्स का पैसा कहा जाता है >>

अगर आप सब टैक्स की सूची बनाए तो हम 64 तरह के टैक्स देते हैं. हमारे यहां केंद्र सरकार अलग टैक्स लेती है और राज्य सरकार अलग लेती है. हम केंद्र सरकार, राज्य सरकार को टैक्स देते हैं फिर नगरपालिकाओं को भी देते हैं. कभी-कभी तो पंचायतों और नगर पंचायतों को भी दे देते हैं. कभी ग्राम पंचायत को भी दे देते हैं तो इसका हमने हिसाब निकाला सारे भारतवासी एक साल में साडे आठ लाख करोड़ (2009 के आंकड़ो के अनुसार) का टैक्स केंद्र सरकार को देते है फिर राज्य सरकारों को, फिर नगरपालिकाओं को अलग-अलग टैक्स देते है. एक आदमी साल में औसतन करीब 11 से 12000 रूपये टैक्स देता हैं. देश का नागरिक इसलिए टैक्स देता हैं ताकि सरकार हमारी मदद करें. हमे मदद ये चाहिए कि हम बीमार पड़े तो हमारा इलाज हो, चलने के लिए हमें सड़क मिले, बिजली मिले, पानी मिले, हमारे बच्चों को शिक्षा मिले, व्यापार की व्यवस्था हो, इसलिए टैक्स देते हैं.

लेकिन हमारी जो सरकार है यह टैक्स के पैसे तो हमसे ले लेती है लेकिन उसी टैक्स के पैसे में से भ्रष्टाचारी अधिकारी और नेता घूसखोरी और लूटमार कर लेते है हम टैक्स तो दे रहे हैं लेकिन हमारा टैक्स देने का फायदा क्या है कोई फायदा नहीं. आपको मालूम है कि सरकार कितना पैसा खा जाती हैं. हमारे यहां एक प्रधानमंत्री थे उनका नाम था श्री राजीव गांधी जो यह कहा करते थे कि जब कोई आदमी 1 रुपया टैक्स देता है इसके बदले में हम विकास के लिए उसका 1 रुपया  जब उसपर खर्च करते हैं तो उस गरीब आदमी को 15 पैसे ही मिलते हैं. 1 रुपया  तो ले लिया सरकार ने हमसे और उस एक रुपए के बदले में सरकार हमको 15 पैसे देती है. इसका मतलब 85 पैसा आपका अधिकारी और नेता खा जाते हैं अगर आप सोचोगे कि कारखाने बने, रोजगार मिले, सड़क बने, बिजली की सुविधा हो, कानून व्यवस्था हो, हॉस्पिटल हो, शिक्षा हो, सब काम सही से हो जिसके लिए हम टैक्स देते है फिर इस टैक्स मे से 85% सरकार के नेता और अधिकारी लूट लेते है तो 15% बचता है उसमे हमारा कुछ नहीं हो पाता न शिक्षा हो पाती है, न चिकित्सा न कुछ और इसलिए भारत गरीब है और गरीबी और ज्यादा बढ़ रही है उसका कारण ये है कि ये नेताओं और अधिकारीयों की लूट खोरी बढ़ रही है, भ्रष्टाचार बढ़ रहा है, रिश्वतखोरी बढ़ रही है इसका कारण ये समस्या है. यही सबसे बड़ा कारण है कि देश की गरीबी मिटने की बजाय और ज्यादा बढ़ रही है.