गर्व की बात : आयुर्वेद सूर्य जितना ही पुराना है, जानिए कैसे

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अब यह जो भिन्नता है भारत और यूरोप में क्योंकि सूर्य वहां कम है और यहां पर ज्यादा है तो आप जानते हैं कि दुनिया में पूरे ब्रह्मांड का केंद्र ही सूर्य है. अगर सूर्य मेहरबान है तो सबकुछ आपके लिए है और जो सूर्य की मेहरबानी नहीं है तो आप के लिए कुछ भी नहीं है तो इस देश में बहुत कुछ ऐसा जो शायद ऐसे ही कारण से ही इस देश में आयुर्वेद जन्म लिया होगा और आयुर्वेद ने जन्म लिया होगा तो यह उतना ही पुराना होगा जितना पुराना भारत है.

कुछ विदेशी इतिहासकार ऐसा बोलते हैं कि आयुर्वेद ढाई हजार साल पुराना है. कुछ जर्मन लोगों ने बोलना शुरु किया कि भारत का आयुर्वेद साढे 3000 साल पुराना, कुछ ने बोलना शुरु किया कि भारत का आयुर्वेदिक 10000 साल पुराना, कोई बोलता है 10000 साल, कोई कहता है ढाई हजार साल ,वह अपनी अपनी बुद्धि के हिसाब से कहते हैं

लेकिन हमारा कहना है कि अगर यह 10000 साल का किस्सा है, दो ,5 साल हजार का किस्सा है तो वह हनुमान जी गए थे लक्ष्मण को संजीवनी बूटी लाने के लिए ,वह किस्सा तो और हनुमान जी का किस्सा तो हम सब जानते हैं. संजीवनी उनको पहचान में नहीं आए तो पर्वत ही उखाड़ कर ले आए तो जो वैद्य थे जिनका नाम था सुशेन, उन्होंने कहा कि मैंने तुमसे एक बूटी लाने को कहा था तो उन्होंने कहा कि वह मुझे समझ में नहीं आया तो मैं पूरा पर्वत ले आया और यह कहानी आगे बढ़ती है.

रामचरितमानस में तो नहीं, रघुवंशम् में कि उस एक छोटे से पर्वत के टुकड़े में से हजार 1200 औषधियां वैद्य सुशेन ने निकाली थी और उसे औषधियों की ताकत से रामचंद्र जी ने राम रावण से युद्ध किया था और सभी घायल सैनिकों को रात भर में पांव का लेपन करके अगले दिन फिर लड़ने के लिए तैयार कर दिया था तो हम कैसे कहें कि यह आयुर्वेद 2000 साल, 5000 साल का है. श्रीराम को ही 800000 साल से ज्यादा हो गए हैं.

अगर हम हिसाब निकालें और जो भगवान राम के पहले की बात करें तो भगवान राम खुद ही कह रहे हैं कि मेरे जो पूर्वज थे, रघु, दिलीप, वह सभी आयुर्वेद के ज्ञाता थे. मतलब जड़ी बूटियों का उनको ज्ञान था. अगर राम के पूर्वज उनको भी जड़ी बूटियों का ज्ञान था तो बढ़ते चले जाएं तो यह समय की सीमा तो रुकती नहीं तो हमने अपने मन में संतोष के लिए यह टाइम मान लिया है. यह भारत की जड़ी बूटियों का विज्ञान या आयुर्वेद उतना ही पुराना है जितना भारत है.

अब भारत की उमर हम जैन शास्त्र के हिसाब से निकाले तो भगवान आदिनाथ से शुरू होती है और भगवान आदिनाथ का समय 1-2 साल का नहीं है, हजार 2000 साल का नहीं है, कुछ करोड़ साल का है तो भारत भी कुछ करोड़ साल का है तो भारत की जड़ी-बूटियां भी कुछ करोड़ साल की होंगी क्योंकि भारत में एक चीज जो निश्चित है. बाकी की बहुत सारी चीज बदली होंगी. वह सूर्य का प्रकाश यह भगवान आदिनाथ के जमाने में भी होगा और इस सन 2018 में भी है तो सूर्य के प्रकाश के कारण जैव विविधता उस समय भी रही होगी, जो आज है. आज शायद कमी आई है उस समय उससे भी ज्यादा रही होगी क्योंकि हमने आज जो विकास का रास्ता अपनाया है उसमें इस जैव विविधता का ही सबसे ज्यादा नाश हो रहा है.

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