आचार में जरुर मिलाएं ये एक चीज, आचार दवाई का काम करेगा

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हमारे रसोई में बहुत सारी औषधियां उपलब्ध होती हैं जिन्हें हम आम भाषा में मसाले कहते हैं दरअसल मसाला अरबिक शब्द है हमारे शास्त्रों में इन मसालों के लिए औषधि शब्द का उपयोग हुवा है ऐसी ही एक औषधि है मैथीदाना जो की हर रसोई में पाया जाता है जो की रसोई में पाए जाने वाली अन्य ओषधियों में उच्च श्रेणी में आती है

मैथी दाने की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह दो तरह के रोगों का नाश करती है वात और कफ के रोगों को जड़ से ख़त्म करने की शक्ति इसमें है वात की बीमारियाँ निम्लिखित है घुटनों में दर्द, कंधे दुखना, जोड़ों का दर्द ये लोग जरुर मैथी दाना खाएं

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मैथी का उपयोग करने का तरीका

बाग़भट्ट जी ने मैथी का उपयोग करने का तरीका बहुत ही सरल बताया है कि रात को एक चम्मच मैथी दाना एक गिलास गर्म पानी में डाल दें रात भर उसको रखें सुबह होने पर चबा चबाकर खाएं चबा चबाकर खाने का बहुत महत्व है कुछ लोग मैथी की फंकी लेते हैं पिस्सा हुवा मैथी की फंकी का इतना महत्त्व नही है जितना चबाकर खाई हुयी मैथी का है

मैथी को चबाकर खाने का महत्त्व

चबाकर मैथी खाने का महत्त्व ये है कि जैसे ही मैथी को चबाना शुरू करते हैं तो लार बननी बहुत तेजी से शुरू होती है क्यूंकि मैथी का स्वाद कटुक और कसाये है अगर इस स्वाद की कोई भी चीज हम खायेंगे तो मुँह में लार बनना बहुत तेजी से शुरू हो जाता है और वो लार हमारे जीवन के लिए बहुत महत्वपूर्ण और उपयोगी है

मैथीदाने वाला आचार का महत्त्व

हमारे घरों में जो भी आचार होता है उन सबमें इसीलिए मैथीदाना डाला जाता है और बाग़भट्ट जी ने बताया है कि जो भी मैथी दाने वाला आचार हम अपने घरों में खाते हैं वो आचार नही बल्कि औषधि है, दवा है आप अपने जीवन में ऐसा आचार खाने से कभी भी मना न करें जिसमे मैथी दाना हो चाहे किसी भी तरह का आचार हो आम का ,मिर्च,नींबू का जरुर खाएं

इसका कारण यह है की किसी भी फल या आचार पर फल और आचार से ज्यादा असर औषधि का होता है जैसे अगर आप आम का आचार डालते है तो उस पर आम से ज्यादा औषधि का असर होता है

और एक बात आचार में पड़ी हुयी मैथी का असर पानी में भिगोई हुयी मैथी से ज्यादा होता है वागभट्ट जी कहते है की अगर मैथी को तेल में भिगोकर आपने रख लिया तो उसकी शक्ति पानी में भीगी हुयी मैथी दाने की शक्ति से 20 गुना ज्यादा तक बढ़ जाएगी और आप सभी जानते है की आचार में सरसों का तेल भी होता है यानी आचार वाली मैथी की शक्ति आम मैथी से 20 गुना ज्यादा तक होती है

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अगर कोई भी व्यक्ति वात और कफ के रोगों से पीड़ित है तो बेझिझक आचार खाएं. लेकिन मैथी पित्त को बढाती है इसलिए पित्त के रोगियों से प्रार्थना है की वे इसका उपयोग न करें पित्त के रोग हैं एसिडिटी, अल्सर, मुँह में पानी आना, खाने का हजम न होना, खाना खाने के बाद 2-3 घंटे तक खाने का स्वाद मुँह में रहना, डकार और हिचकी आना इत्यादि