बैठकर और खड़े होकर भोजन करने में अंतर – अगर इसको समझ लिया तो आधी प्रॉब्लम दूर हो जाएगी

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दोस्तों जैसा कि आपने पिछले विडियो में देखा खाना खाने के कुछ नियम राजीव भाई ने बताए थे जिससे आप अगर पालन करे तो आपका स्वास्थ्य सही रहेगा. ये नियम ये थे कि खाने को हमेसा चबाकर खाए. अब आप कहेगे कि कितना चबाना है तो जितने आपके दांत है आपको उतनी बार खाने को चबाना है. इससे अलग एक नियम और था कि अगर खाने खाते समय आपको तनाव में नहीं रहना है, जल्दबाजी नहीं करनी है. अगर आपकी कोई मज़बूरी है तो उसके बारे में भी विस्तार से बताया था. जैसे अगर ट्रेन पकडनी है तो उसे आप छोड़ नहीं सकते तो आप खाना जल्दी में ना खाए, खाने को छोड़ दे और उसे पैक करवा ले और ट्रेन में खाए. इन दोनों नियमो के बारे में विस्तार से जानने के लिए आप पिछले पोस्ट पढ़ सकते है. अब हम अगले नियम की बात करेंगे कि खाना कैसे खाना चाहिए.

अगर आप खाना खा रहे है तो हमेशा बैठकर बैठकर खाना खाए. ये खड़े होके खाना खाने का नियम मनुष्य के लिए नही है. ये नियम जानवरों के लिए है. इसके पीछे जो कारण है वो ये है कि जानवर चार पैरो पर चलते है उनका शरीर में सेण्टर ऑफ़ ग्रेविटी (Center of Gravity) केंद्र मनुष्य से अलग है. क्योंकि मनुष्य दो पांवो पर चलता है, और जानवर 4 पांव पर चलता है. इसलिए मनुष्य और पशु दोनों का गरुत्व केंद्र अलग अलग होता है

आयुर्वेद के अनुसार पशुओं को खड़े होकर भोजन करने की अनुमति है मनुष्यों को नही है. मनुष्य को बेठकर ही खाना चाहिए. इसका मतलब ये कि खड़े होकर खाने के सिस्टम को बफैलो सिस्टम कहते है. बफैलो मतलब मस्सी (भैंस) मस्सी. अब आपके मन में एक सवाल आएगा कि हम शादी में गये है और वहा व्यवस्था ऐसी है कि खड़े होके ही खाना पड़ता है तो उस स्तिथि में क्या करे ? तो मेरी आपसे विनती है की आप जहाँ भी शादी में गये है, लग्न प्रसंग में गये है, या किसी अन्य प्रसंग में गये है और वहां पर खड़े होकर खाना खाने का सिस्टम है तो आप अपनी प्लेट में खाना ले लीजिये और वहा पर कही बैठने का स्थान देखकर बेठ कर खाइए.

आयुर्वेद के अनुसार खड़े होकर भोजन करना बहुत तकलीफ का काम है. अब वो तकलीफ क्या है मै आपको बताता हूँ. अभी आप बेठे है, थोड़ी देर में आप खड़े हो जाइए. आपको बैठने में और खड़े होने में अंतर महसूस होता है. और जब आप बैठते है तो आपका अच्छा महसूस होता है. क्योकि बैठने पर शरीर का गरुत्व केंद्र बदल जाता है. अब इसका कारण यह होता है किजब आप खड़े होकर खाना खाते है तो पृथ्वी का जो गुरुत्व बल होता है वो आपके ऊपर सबसे ज्यादा होता है. और जब आप खड़े होकर खाना खाते है तो आपने जो खाना खाया वो तेजी से अंदर जाता है.

आयुर्वेद के नियम अनुसार खाना धीरे धीरे नीचे उतरना चाहिए. लेकिन खड़े होकर खायेंगे तो खाना जल्दी से नीचे उतर जायेगा. ये जो जल्दी से उतरा हुआ खाना है इसमें जो लार की मात्र जो आहार नली में मिलनी चाहिए वो कम हो जाती है और गरुत्व बदलने के कारण ये जल्दी से नीचे आता है. इस खाने को पाचन में संकट पैदा हो जाता है. खड़े होकर जो खाना खाया उसको पचने में बहुत ज्यादा समय लगता है और पाचन करने में शरीर के अंगो को भी तकलीफ ज्यादा होती है. इसलिए आयुर्वेद में बहुत सख्ती से नियम बनाया है कि मनुष्य जाति के लोगों के लिए बैठकर भोजन करना ही सबसे अच्छा है.

अब आपके मन में ये सवाल आएगा कि बैठना कैसे है. आप कहेगे जी मैं तो कुर्सी पे बेठ के खाता हूँ, मतलब कि डाइनिंग टेबल पर. ये सही तरीका नहीं है. सबसे सही तरीका सुख आसन है जिसे आलती पालती भी बोलते है.

राजीव भाई ने एक जानकारी और दी थी कि कुर्सी पे बैठकर खाना खाने का नियम यूरोप के लोगो का है. और उसके पीछे भी कारण है. यूरोप और भारत में बहुत अंतर है यूरोप और भारत में सबसे बड़ा अंतर यह है कि यूरोप में ठंडी बहुत है. आप जानते होंगे कि वहा पर इतनी ठंडी है कि एक वर्ष में आठ महीने सूर्य का प्रकाश नही निकलता. तापमान माइनस -40 डिग्री सेंटीग्रेट होता है बर्फ पे बर्फ जमी रहती है. जहाँ ठंडी बहुत होती है उन लोगो के शरीर में Synovial fluid कम बनता है. Synovial fluid एक ऐसा फ्लूइड होता है जो शरीर में जितने भी जॉइंट्स है उनमे हडियो के बीच में होता है जो हड्डियों के घर्षण को कम करता है और हड्डियों को घसने से बचाता है. जैसे गाड़ी में मुग़ले आयल डालते है, वैसे ही ये शरीर का मुगले आयल है. जिसे Synovial fluid कहते है.

Synovial fluid ठंड वाले देश के लोगों में कम होता है. तो वो जल्दी उठ बैठ नही सकते इसलिए उनको नियम है कि वो खड़े होकर खाए या कुर्सी पर बैठ कर खाए क्यूंकि घुटना उनका मुड नही सकता. क्योकि Synovial fluid की कमी के कारण सख्त हो गया है. इसलिए यूरोप के लोग मेज कुर्सी पर बैठके खाना खाते है. भारत वासियों के लिए ये नियम नही है, क्योकि यहाँ मौसम सामान्य रहता है. भारत में तो जमीन पे बैठके खाना ही सबसे अच्छा है तो आयुर्वेद में इसका एक सूत्र स्पेशल बताया गया है कि निरोगी होने के लिए जमीन पे बैठ कर भोजन करे. और ये बहुत आवश्यक है.

भारत में कई परंपराएं ऐसी हैं जिनका सीधा संबंध मनुष्य के स्वास्थ्य से है। ऐसी ही एक परंपरा है जमीन पर बैठकर खाना खाने की। भारतीय घरों में जहां आज भी खाना पारंपरिक तरीके से परोसा जाता है, वहां लोग जमीन पर बैठकर ही खाना खाते हैं.

वजन नियंत्रण में रहता है – जब आप सुखासन में यानी पालती मारकर बैठते हैं, तो आपका दिमाग अपने आप शांत हो जाता है और बेहतर ढंग से भोजन पर ध्यान केंद्रित कर पाता है। साथ ही सुखासन में बैठकर खाने पर आप जरूरत से ज्यादा खाने से बचते हैं।

शरीर को लचीला बनाता है – जब आप पद्मासन में बैठते हैं, तो आपकी श्रोणि, निचली पीठ, पेट के आसपास और पेट की मांसपेशियों में खिंचाव होता है जिसके कारण डाइजेस्टिव सिस्टम आराम से अपना काम कर पाता है और बेहतर रीति से पचाने में मदद मिलती है।

पाचन तंत्र सुधारता है – जब आप भोजन करने के लिए सुखासन की मुद्रा में बैठते हैं तो आप स्वाभाविक रूप से खाने के लिए थोड़ा आगे झुकते हैं और खाने को निगलने के लिए वापस अपनी पहले वाली अवस्था में आ जाते हैं। इस तरह आगे और पीछे की ओर झुकने से आपकी पेट की मांसपेशियां सक्रिय रहती हैं जिससे आपके लिए भोजन को पचाना बहुत आसान हो जाता है।

परिवार को बांधता है – आमतौर पर जमीन पर बैठकर खाना खाने की प्रथा एक परिवारिक गतिविधि है। सही समय पर यदि पूरा परिवार एक साथ खाना खाए तो आपसी सामंजस्य बढ़ता है। इसलिए यह अपने परिवार के साथ जुड़ने का एक बेहतरीन कारण बन जाता है।

समय से पहले बुढ़ा नहीं होने देता – खाना खाने का ये पारंपरिक तरीका आपको समय से पहले बुढा नहीं होने देता क्योंकि इस मुद्रा में बैठकर खाना खाने से रीढ़ की हड्डी और पीठ से जुड़ी समस्याएं नहीं होती हैं। साथ ही, जो लोग कंधों को पीछे धकेलते हुए गलत मुद्रा में बैठने के कारण किसी तरह के दर्द से परेशान होते हैं। वह समस्या भी इस आसन में बैठकर खाना खाने से दूर हो जाती है।

जोड़ों को लचीला बनाता है – पद्मासन और सुखासन एक ऐसी मुद्रा है जो आपके पूरे शरीर को लाभ पहुंचाती है। ये केवल आपके पाचन तंत्र को बेहतर बनाने में ही मदद नहीं करते, बल्कि आपके जोड़ों को कोमल और लचीले बनाए रखने में भी मदद करते हैं। गठिया व हड्डियों की कमजोरी जैसे अपक्षयी रोगों से भी बचाते हैं। लचीलेपन के साथ जोड़ों में चिकनाई आती है जिससे जमीन पर बैठने में आसानी होती है।

दिल को मजबूत बनाता है – जब आप जमीन पर बैठकर खाना खाते हैं तो ब्लड सर्कुलेशन सुधरता है। इस तरह दिल बड़ी आसानी से पाचन में मदद करने वाले सभी अंगों तक खून पहुंचाता है, लेकिन जब आप कुर्सी पर बैठ कर खाना खाते हैं तो यहां ब्लड सर्कुलेशन विपरीत होता है। इसमें सर्कुलेशन पैरों तक होता है, जो कि खाना खाते समय जरूरी नहीं होता है।

इस विडियो में देखिए क्यों खड़े होकर खाना नहीं चाहिए >>